वाल्मीकि निधि का दुरुपयोग बेल्लारी क्षेत्र के मतदाताओं को रिश्वत देने के लिए किया गया: ईडी

नयी दिल्ली/बेंगलुरु. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि इस साल आम चुनावों के दौरान बेल्लारी लोकसभा सीट के सात लाख से अधिक लोगों को कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने के लिए 200-200 रुपये दिए गए थे और यह पैसा कर्नाटक के पूर्व जनजातीय मंत्री बी. नागेंद्र और उनके सहयोगियों द्वारा कथित वाल्मीकि घोटाले से हासिल धन से आया था.
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक ने इन सरकारी निधियों का उपयोग अपने निजी खर्चों को पूरा करने के लिए किया, जैसे स्वयं और अपने सहयोगियों के लिए हवाई जहाज की टिकट खरीदना, बिजली बिलों का भुगतान, वाहन रखरखाव और घरेलू कर्मचारियों के मासिक वेतन का भुगतान. नागेन्द्र (53) को सोमवार को बेंगलुरू में विशेष जनप्रतिनिधि अदालत ने जमानत दे दी.

संघीय एजेंसी ने इस मामले में अपना पहला आरोपपत्र पिछले महीने बेंगलुरु में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष दायर किया था, जिसमें नागेंद्र को आरोपी नंबर एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. इसके अलावा 24 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनमें उनके सहयोगी और कुछ कंपनियां शामिल हैं.

धन शोधन का यह मामला कर्नाटक पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कर्नाटक मर्हिष वाल्मीकि एसटी विकास निगम (केएमवीएसटीडीसी) के खातों से करोड़ों रुपये निकालकर रकम को ह्लफर्जी खातोंह्व में भेजा गया और बाद में फर्जी संस्थाओं के माध्यम से धन शोधन किया गया.

कथित अनियमितताएं तब सामने आईं जब वाल्मीकि निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी. 21 मई को मृत मिले. उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा था जिसमें निगम से विभिन्न बैंक खातों में अवैध रूप से धन हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया था. इस मामले में नागेन्द्र और उनसे कथित रूप से जुड़े पांच अन्य लोगों को ईडी ने गिरफ्तार किया था.

पूर्व मंत्री ने ईडी को बताया कि उनके मंत्रालय के तहत वाल्मीकि निगम के प्रबंध निदेशक जे जी पद्मनाभ ने उनकी जानकारी या बोर्ड की मंजूरी के बिना निगम के धन को ह्लधोखाधड़ी सेह्व हस्तांतरित कर दिया. उन्होंने कुछ भी गलत काम से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें गबन किए गए धन से व्यक्तिगत रूप से कोई लाभ नहीं हुआ.

अपने बयान में पद्मनाभ ने ईडी को बताया कि वह नागेन्द्र सहित उच्च अधिकारियों के आदेश पर काम कर रहा था और धोखाधड़ी की गतिविधियों पर उसका कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं था. बेल्लारी ग्रामीण सीट से विधायक नागेंद्र ने इन आरोपों के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. नागेद्र के निजी सहायकों – बी विजय कुमार गौड़ा और नेक्केंटी नागराज – और उनके सहयोगी रुद्रय्या की भूमिका के बारे में ईडी ने दावा किया कि उन्होंने बड़ी मात्रा में धनराशि इधर-उधर करने की बात ह्लस्वीकारह्व की है, जो चुनावी उद्देश्यों के लिए धन की हेराफेरी की व्यापक साजिश से मेल खाती है.

एजेंसी ने कहा कि अपराध से हासिल आय का एक बड़ा हिस्सा नागेंद्र के पास आया था और उस राशि का उपयोग लोकसभा चुनाव 2024 से संबंधित गतिविधियों के लिए किया गया था. इसने कहा, ह्लवाल्मीकि निगम से निकाली गई यह नकदी बी नागेन्द्र के निजी सहायक विजय कुमार गौड़ा ने उनके निर्देश पर प्राप्त की और वितरित की.” ईडी के मुताबिक, गौड़ा ने एजेंसी को दिए अपने बयान में कहा कि उन्होंने नागेंद्र द्वारा बताए गए लोगों को नकदी सौंपी थी.

एजेंसी के अनुसार गौड़ा ने एजेंसी को दिए बयान में कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बेल्लारी संसदीय सीट पर किस तरह नकदी बांटी गई थी. ईडी ने आरोप पत्र में कहा, ह्लकांग्रेस उम्मीदवार श्री ई. तुकाराम के पक्ष में वोट डालने के लिए प्रत्येक मतदाता को 200 रुपये दिए गए. इसके अतिरिक्त, प्रत्येक मतदान केंद्र को 10,000 रुपये आवंटित किए गए ताकि मतदाताओं की सहायता करने और मतदान केंद्रों की देखरेख के लिए जिम्मेदार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रतिफल दिया जा सके.ह्व

इसमें आरोप लगाया गया है कि नागेंद्र ने बेल्लारी लोकसभा सीट के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों एन. भारत रेड्डी (बेल्लारी शहर), विधायक गणेश (कांपली) और कुडलिगी विधायक डॉ एन टी श्रीनिवास के साथ समन्वय करके पैसे बांटे. ईडी के अनुसार, इन विधायकों ने यह सुनिश्चित किया कि नकदी उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को वितरित की जाए और जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों से इसकी ‘पुष्टि’ हुई. ईडी ने कहा कि जांच में वाल्मीकि निगम के भीतर एक ‘जटिल’ धन शोधन अभियान का पता चला है, जिसमें 187.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मार्च-मई, 2024 के बीच निगम के खाते से धोखाधड़ी से निकाल ली गई थी.

घोटाले के बाद भी वाल्मीकि निगम के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी: मुख्यमंत्री सिद्धरमैया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक मर्हिष वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में धन की कोई कमी नहीं रहेगी. निगम में इस साल की शुरुआत में धन के गबन के आरोप सामने आए थे. सिद्धरमैया ने जनजातीय विकास पर एक बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ”वाल्मीकि निगम में धन का गबन आदिवासी विकास के लिए धन की किसी तरह की कमी की वजह नहीं बनेगा.” उन्होंने कहा कि सरकार निगम को धन आवंटित करेगी जैसी कि इस साल फरवरी में बजट में घोषणा की गई थी.

सिद्धरमैया ने कहा कि 89.63 करोड़ रुपये का गबन किया गया जिसमें से 71.54 करोड़ रुपये बरामद कर लिए गए हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निगम में घोटाले की जांच के दौरान कांग्रेस विधायक बी नागेंद्र और पांच अन्य प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था. नागेंद्र को यहां विशेष जन प्रतिनिधि अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी. ईडी ने पिछले सप्ताह कहा था कि नागेंद्र की पहचान घोटाले में प्रमुख आरोपी के तौर पर की गई है जिसकी साजिश उन्होंने कथित रूप से 24 अन्य लोगों के साथ रची.

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