वैश्विक तेल बाजार में बेहद अशांत स्थिति, स्थिर होने पर होगी कटौती: हरदीप पुरी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 03 Jan 2024 10:01 PM
वैश्विक तेल बाजार में बेहद अशांत स्थिति, स्थिर होने पर होगी कटौती: हरदीप पुरी
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नयी दिल्ली. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में आई नरमी के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना पर बुधवार को कहा कि वैश्विक बाजार इस समय ‘बेहद अशांत’ है और किसी भी कटौती से पहले इसे स्थिर होना होगा. सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल विपणन कंपनियों ने पिछले 21 महीनों से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है.

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपारेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) का लगभग 90 प्रतिशत घरेलू पेट्रोलियम बाजार पर नियंत्रण है. पुरी ने यहां खुदरा कीमतों में कटौती को लेकर तेल कंपनियों के साथ किसी तरह की बातचीत के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, “ऐसे किसी भी मुद्दे पर तेल विपणन कंपनियों के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है.” उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां ईंधन मूल्य निर्धारण के बारे में अपना फैसला खुद करती हैं.

इसके साथ ही पेट्रोलियम मंत्री ने रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-हमास संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा, “हम इस समय अत्यधिक अशांत स्थिति में हैं. वैश्विक मानचित्र पर दो क्षेत्र हैं जो संघर्ष की स्थिति में हैं.” पुरी ने कहा कि वैश्विक समुद्री परिवहन का 12 प्रतिशत, तेल का 18 प्रतिशत और एलएनजी व्यापार का चार-आठ प्रतिशत लाल सागर एवं स्वेज नहर के जरिये संचालित होता है. लाल सागर में जहाजों पर हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय तेल की कीमतों में उछाल आया था लेकिन बाद में दरें कम हो गई हैं.

पुरी ने कहा, “इस अत्यधिक अस्थिर स्थिति में हमारा प्राथमिक दायित्व तेल की उपलब्धता और किफायत को सुनिश्चित करना है. हम इस स्थिति को बहुत सावधानी से देख रहे हैं.” उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां मूल्य संशोधन के बारे में सरकार से नहीं पूछती हैं.
पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल, 2022 से ही स्थिर बनी हुई हैं. राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर है और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर है.

रूस से तेल खरीद में भुगतान की कोई समस्या नहीं: पेट्रोलियम मंत्री

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को कहा कि रूस से तेल खरीदने में भुगतान की कोई समस्या नहीं है और इस खरीद में हाल में आई गिरावट उसकी तरफ से दी जाने वाली कम छूट का नतीजा है. पुरी ने एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2022 में भारत ने जितने तेल का आयात किया था उसमें रूसी तेल की हिस्सेदारी सिर्फ 0.2 प्रतिशत थी. लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच रूस ने तेल खरीद पर छूट की पेशकश की जिसके बाद यह हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई और रूस अब भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता देश है.

पुरी ने कहा कि भारत अपने आयात स्रोतों में विविधता लेकर आया है और देश सबसे सस्ती उपलब्ध दरों पर खरीदारी करेगा.
उन्होंने कहा, “भारतीय उपभोक्ताओं को बिना किसी व्यवधान के सबसे किफायती मूल्य पर ईंधन मिलने की शर्त है. रूस से तेल आयात 40 प्रतिशत तक बढ़ गया था. अब अगर यह 33 प्रतिशत या 28-29 प्रतिशत पर आ गया है तो इसके लिए भुगतान की कोई समस्या नहीं है. यह विशुद्ध रूप से उस कीमत की वजह से है जिस पर हमारी रिफाइनिंग कंपनियों को तेल मिलेगा.” उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कंपनी ने भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण आपूर्ति रोके जाने की शिकायत नहीं की है. इसके बजाय आपूर्तिकर्ता पहले बेचने और बाद में भुगतान एकत्र करने के इच्छुक हैं.

उन्होंने कहा, “हम रूस से प्रतिदिन 15 लाख बैरल तेल खरीद रहे हैं. देश में 50 लाख बैरल की दैनिक खपत में से 15 लाख बैरल प्रतिदिन खरीद रहे हैं. अगर वे छूट नहीं देंगे, तो हम इसे क्यों खरीदेंगे?” लाल सागर में मालवाहक जहाजों पर हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमलों पर पुरी ने कहा कि कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने अपना रास्ता बदल लिया है और अब केप ऑफ गुड होप से होकर गुजर रहे हैं. हालांकि लाल सागर और स्वेज नहर से बचने पर लंबी यात्रा होगी लेकिन जहाजों को स्वेज नहर पारगमन शुल्क भी नहीं देना होगा. स्वेज नहर का इस्तेमाल लगभग एक तिहाई वैश्विक कंटेनर जहाज करते हैं. इसके जरिये 82 लाख बैरल कच्चे तेल का परिवहन होता है.

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