नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने 13 दिसंबर को संसद की सुरक्षा का उल्लंघन करने के मामले में गिरफ्तार एकमात्र महिला आरोपी नीलम आजाद को जमानत देने से बुधवार को इनकार कर दिया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने कहा कि यह मानने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि आजाद के खिलाफ आरोप ”प्रथम दृष्टया” सत्य हैं.
न्यायाधीश ने कहा, ”यह मानने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि याचिकाकर्ता नीलम के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हैं. इसलिए, इस अदालत को नहीं लगता कि यह नीलम को नियमित जमानत देने का उपयुक्त मामला है और मौजूदा जमानत याचिका खारिज की जाती है.” न्यायाधीश ने कहा कि सभी आरोपियों- आजाद, मनोरंजन डी, सागर शर्मा, अमोल धनराज शिंदे, ललित झा और महेश कुमावत – को आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा पिछले साल 13 दिसंबर को संसद को निशाना बनाने को लेकर दी गई धमकी के बारे में पहले से जानकारी थी.
उन्होंने कहा कि इस खतरे की आशंका और इस बारे में जानकारी होने के बावजूद आरोपी व्यक्तियों ने उसी दिन संसद में कथित अपराध को अंजाम दिया. न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री और आरोपपत्र को देखने से यह भी पता चलता है कि कथित आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने से पहले बैठकें की गई थीं, जिनमें कथित आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने की पूरी साजिश पर चर्चा की गई थी और फरवरी, 2022 से घटना के दिन तक कुल पांच ऐसी बैठकें आयोजित की गईं और आजाद ने ऐसी अंतिम तीन बैठकों में भाग लिया.
न्यायाधीश ने नौ सितंबर को सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 16 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी. आजाद की ओर से पेश वकील ने बहस के दौरान न्यायाधीश से कहा कि उनकी मुवक्किल संसद की सुरक्षा का उल्लंघन करने में शामिल नहीं थी और उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है. वकील ने दावा किया कि पुलिस ने मामले में पहले ही एक आरोप पत्र और दो पूरक आरोप पत्र दायर कर दिए हैं और अदालत ने उन पर संज्ञान ले लिया है.
वकील ने अदालत से कहा, ”मनोरंजन डी और सागर शर्मा संसद में कूदे और धुंआ फैलाया.ह्व उन्होंने कहा कि आजाद संसद के बाहर थी, जहां उसने ह्लबेरोजगार युवाओं की समस्या को उजागर करने के लिएह्व इसी तरह के धुंए के कनस्तर खोले और पर्चे फेंके तथा वह सोशल मीडिया के माध्यम से जनता का ध्यान आर्किषत करने का प्रयास कर रही थी. आजाद ने दावा किया कि धुंआ फैलाने वाले ये कनस्तर हानिकारक नहीं थे.
आजाद ने अपनी याचिका में कहा था, ”वह आपराधिक साजिश का हिस्सा नहीं थी. जांच पूरी हो चुकी है और अदालत को मामले का फैसला करने में काफी समय लगेगा.” अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अपराध को ”गंभीर” बताया. उसने आरोप लगाया कि आजाद भारत की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने में शामिल थी.
वर्ष 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले की वर्षगांठ पर सुरक्षा चूक की एक बड़ी घटना हुई थी और सागर शर्मा और मनोरंजन डी. शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए, कनस्तरों से पीली गैस फैलाई और नारे लगाए, जिसके बाद कुछ सांसदों ने उन्हें काबू में कर लिया. लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों – अमोल शिंदे और आजाद – ने संसद परिसर के बाहर ह्लतानाशाही नहीं चलेगीह्व के नारे लगाते हुए कनस्तरों से रंगीन धुआं फैलाया.