वोट बैंक की राजनीति से सीएए पर दृष्टिकोण तय नहीं होना चाहिए : भारत का विरोधियों को दो-टूक संदेश

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 15 Mar 2024 10:20 PM
वोट बैंक की राजनीति से सीएए पर दृष्टिकोण तय नहीं होना चाहिए : भारत का विरोधियों को दो-टूक संदेश
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नयी दिल्ली/वाशिंगटन. भारत ने शुक्रवार को संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के खिलाफ अमेरिका सहित विभिन्न पक्षों द्वारा की जाने वाली आलोचना को दृढ.ता से खारिज करते हुए कहा कि संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए “प्रशंसनीय पहल” के बारे में “वोट-बैंक की राजनीति” के आधार पर दृष्टिकोण तय नहीं किए जाने चाहिए.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिन लोगों को भारत की बहुलतावादी परंपराओं और क्षेत्र के विभाजन के बाद के इतिहास की सीमित समझ है, उनके लिए बेहतर होगा कि वे व्याख्यान देने का प्रयास नहीं करें. उन्होंने यह कड़ी टिप्पणी प्रेस वार्ता में उस समय की गयी जब उनसे वाशिंगटन और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से सीएए के खिलाफ आलोचना के बारे में पूछा गया.

कानून को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए जायसवाल ने कहा, “सीएए नागरिकता देने के बारे में है, नागरिकता छीनने के बारे में नहीं. यह नागरिकता के मुद्दे को संबोधित करता है, मानवीय गरिमा प्रदान करता है और मानवाधिकारों का समर्थन करता है.” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “जहां तक सीएए को लागू करने के बारे में अमेरिकी विदेश विभाग के बयान का संबंध है, हमारा मानना है कि यह गलत, आधी-अधूरी जानकारी वाला और अवांछित है.” उन्होंने कहा कि सीएए, 2019 भारत की समावेशी परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को ध्यान में रखकर लाया गया है.

जायसवाल ने कहा, “यह अधिनियम अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश किया था.” उन्होंने कहा, “भारत के साझेदारों और शुभचिंतकों को उस मंशा का स्वागत करना चाहिए जिसके साथ यह कदम उठाया गया है.”

सीएए को लेकर चिंतित हैं, इसके क्रियान्वयन पर नजर रख रहे: अमेरिका
अमेरिका ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह भारत में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) को अधिसूचित किए जाने को लेकर चिंतित है और इसके क्रियान्वयन पर निकटता से नजर रख रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”हम 11 मार्च को जारी की गई नागरिकता (संशोधन) अधिनियम की अधिसूचना को लेकर चिंतित हैं.” मिलर ने एक सवाल के जवाब में कहा, ”हम इस बात पर निकटता से नजर रख रहे हैं कि इस अधिनियम को कैसे लागू किया जाएगा. धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और सभी समुदायों के साथ कानून के तहत समान व्यवहार मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत हैं.”

भारतीय सैनिकों का पहला दल मालदीव से भारत वापस आया: विदेश मंत्रालय

भारत ने शुक्रवार को कहा कि मालदीव में उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर(एएलएच) का संचालन करने वाला उसके सैन्यर्किमयों का पहला दल द्वीपीय राष्ट्र से वापस आ गया है. सैन्य दल का स्थान नागरिक तकनीकी विशेषज्ञों ने ले लिया है. मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपने देश से भारतीय सैन्यर्किमयों के पहले दल की वापसी के लिए 10 मार्च की समय सीमा तय की थी.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, ”एएलएच का संचालन करने वाली र्किमयों की पहली टीम की वापसी पूरी हो गई है. पहली खेप के तहत जिन लोगों को बदला जाना था, उन्हें बदलने का काम पूरा हो गया है.” भारतीय सैन्यर्किमयों की वापसी के मुद्दे को लेकर गठित उच्च स्तरीय कोर समूह की दूसरी बैठक के बाद मालदीव के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत 10 मई तक दो चरणों में अपने सभी सैन्यर्किमयों को बदल देगा.

कोर ग्रुप की दूसरी बैठक दो फरवरी को दिल्ली में हुई. दुबई में दिसंबर में सीओपी-28 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू के बीच एक बैठक के बाद दोनों पक्षों ने कोर समूह के गठन का निर्णय लिया था. मुइज्जू, जिन्हें व्यापक रूप से चीन समर्थक नेता के रूप में देखा जाता है, ने राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद कहा कि वह भारतीय सैन्यर्किमयों को अपने देश से बाहर निकालने के अपने चुनावी वादे को निभाएंगे. मुइज्जू (45)ने पिछले साल सितंबर में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में भारत के प्रति दोस्ताना रुख रखने वाले मौजूदा राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को हराया था.

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