वांगचुक व समर्थकों ने चौथे दिन भी भूख हड़ताल जारी रखी

नयी दिल्ली. पिछले चार दिन से अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि पिछली रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एक सदस्य उनके पास आया और उन्हें अपना समर्थन दिया. आरएसएस सदस्य ने उन्हें मच्छर भगाने वाली दवा दी. वांगचुक राष्ट्रीय राजधानी में लद्दाख भवन में डेरा डाले हुए हैं. उनके समूह के एक सदस्य के अनुसार अभी तक केंद्र सरकार के किसी प्रतिनिधि ने उनसे संपर्क नहीं किया है.

अपने कई समर्थकों के साथ रविवार से अनशन कर रहे वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “एक व्यक्ति रात 10.30-11 बजे के बीच आया और वह हमारे लिए मच्छर भगाने वाली हर्बल दवा लाया. वह गेट से दूर रहा और उसने कहा कि वह किसी सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड नहीं होना चाहता.”

वांगचुक ने कहा, ”उन्होंने कहा कि वह आरएसएस और भाजपा के करीब हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें मुझसे और लद्दाख के लोगों से सहानुभूति है, लेकिन वह खुलकर सामने नहीं आ सकते.” वांगचुक ने कहा, “कल भाजपा नेता नरेश जी, मुरली मनोहर जोशी जी का विशेष संदेश लेकर आए थे. इससे हमें लगता है कि जब न्याय की बात आती है तो लोग पार्टी, धर्म से ऊपर उठ जाते हैं. वे अंधे अनुयायी नहीं हैं, वे सही और गलत में भेद कर सकते हैं.” वांगचुक के साथ अनशन कर रहे एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार ने अभी तक उनसे संपर्क नहीं किया है.

समूह के एक सदस्य ने पीटीआई-भाषा से कहा, “हमारा अनशन जारी है. आज सुबह कई सदस्यों का रक्तचाप कम था.” समूह लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के मुद्दे पर अपनी चिंताओं से अवगत कराने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री से मुलाकात की अनुमति देने की मांग कर रहा है.

संविधान की छठी अनुसूची में पूर्वोत्तर के असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन के लिए प्रावधान शामिल हैं. यह स्वायत्त परिषदों की स्थापना करता है जिनके पास इन क्षेत्रों पर स्वतंत्र रूप से शासन करने के लिए विधायी, न्यायिक, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां हैं. छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को शामिल करने के अलावा, प्रदर्शनकारी राज्य का दर्जा, लद्दाख के लिए लोक सेवा आयोग तथा लेह और कारगिल जिलों के लिए अलग लोकसभा सीटों की मांग कर रहे हैं.

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