‘इंडिया’ गठबंधन के पक्ष में लहर, तीन हफ्ते में प्रधानमंत्री की सत्ता से विदाई : कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद सोमवार को दावा किया कि देश में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की लहर है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सत्ता से विदाई में सिर्फ तीन सप्ताह का समय बचा है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि निर्वाचन आयोग बिना किसी देरी के चौथे चरण के मतदान के अंतिम आंकड़े जारी करेगा.

रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स” पर पोस्ट किया, “आज चौथा चरण खत्म होने के साथ अब तक 379 सीटों के लिए मतदान संपन्न हो चुका है. प्रधानमंत्री मोदी की विदाई में सिर्फ तीन हफ़्ते बचे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव की दिशा अब बिल्कुल साफ. है.” उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भाजपा दक्षिण में साफ. एवं उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत में ‘हाफ’ होने जा रही है.

रमेश ने दावा किया, “यही कारण है कि प्रधानमंत्री के चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही है. वह हर चरण की वोटिंग के बाद और भी ज्यादा हताश और निराश दिखने लगते हैं. प्रथम चरण की वोटिंग के बाद उन्होंने लोगों को डराना शुरू कर दिया और ध्रुवीकरण का सहारा लिया. दूसरे चरण के बाद वह हास्यास्पद रूप से भैंसों को छीनने की साज.शि का आरोप लगाने लगे और बेशर्मी से झूठ बोलने लगे. तीसरे चरण के मतदान के बाद तो उन्होंने पूरी तरह से अपना नियंत्रण ही खो दिया है – उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दो सबसे पसंदीदा मित्रों के पास काला धन भरा हुआ है, जिसकी सप्लाई वे टेम्पो से करते हैं.”

प्रधानमंत्री बताएं कि वाराणसी बंदरगाह परियोजना विफल क्यों हुई: कांग्रेस

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाराणसी में रोडशो के बाद सोमवार को उनके संसदीय क्षेत्र से संबंधित कुछ विषयों को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि प्रधनमंत्री को बताना चाहिए कि वाराणसी बंदरगाह परियोजना विफल क्यों हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रोड शो किया. इस दौरान लोगों ने फूलों की बारिश करके उनका स्वागत किया.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”वाराणसी बंदरगाह क्यों विफल हुआ? अब इसे अडाणी समूह को क्यों बेचा जा रहा है? निवर्तमान प्रधानमंत्री वाराणसी में एक भी नए स्कूल या अस्पताल खोलने में क्यों विफल रहे? वाराणसी में मैला ढोने के कारण 25 लोगों की जान क्यों गई?” उन्होंने दावा किया, ”प्रधानमंत्री ने 2019 की शुरुआत में वाराणसी बंदरगाह का उद्घाटन किया गया था. इसमें हज.ारों करोड़ रुपए ख.र्च किए गए और 35.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो हैंडलिंग का अनुमान था. लेकिन मार्च 2020 तक, यहां 0.008 प्रतिशत से भी कम कार्गो हैंडलिंग हो रहा था. सबसे पहले तो वाराणसी के लोगों को बताया गया कि यह परियोजना उनके लिए ”गिफ़्ट” है, लेकिन इसके लिए धन तो जनता के टैक्स के पैसे से आया.”

रमेश ने सवाल किया, ”किसी को उसी के पैसे से ‘गिफ़्ट'(उपहार) दिया जाता है?” उन्होंने कहा, ”10 साल तक सांसद और प्रधानमंत्री रहने के बाद वाराणसी को एक भी नया सरकारी अस्पताल नहीं मिला. न ही इसे एक भी नया जवाहर नवोदय विद्यालय या केन्द्रीय विद्यालय मिला है. पिछले दशक में, ज.लिे की जनसंख्या में अनुमानित रूप से 15-20 प्रतिशत, या 6 लाख नए निवासियों की वृद्धि हुई होगी.” उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया, ”जनसंख्या में हुई इस वृद्धि के लिए आवश्यक नए स्कूल और अतिरिक्त अस्पताल बिस्तर कहां हैं? निवर्तमान प्रधानमंत्री ने अपने मतदाताओं की इन बुनियादी ज.रूरतों की उपेक्षा क्यों की है?”

भाजपा के ‘अन्याय काल’ में एमएसएमई क्षेत्र तबाह हो गया: कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 10 वर्ष के ‘अन्याय काल’ में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) क्षेत्र पूरी तरह से बर्बाद हो गया. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल भी किया कि भाजपा सरकार में ‘राजनीतिक बन चुका’ एमएसएमई बोर्ड सरकार को एमएसएमई नीति पर कोई गंभीर सलाह कैसे दे सकता है? रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसका जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 30 प्रतिशत और निर्यात में 40 प्रतिशत योगदान होता है. इस क्षेत्र में 12 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है. लेकिन, भारत के छोटे व्यवसायों के लिए पिछले 10 वर्ष का अन्याय काल बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है. मोदी सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है. इसकी दुर्भावना से भरी एमएसएमई विरोधी नीतियों ने इस क्षेत्र को तबाह कर दिया है.” उन्होंने कहा कि यह तथ्य है कि पिछले 10 साल में नरेंद्र मोदी ने केवल अपने कुछ गिने-चुने पूंजीपति मित्रों के लिए काम किया है.

रमेश ने दावा किया, ”नतीजा यह है कि एमएसएमई का जीडीपी में दशकों में सबसे कम योगदान रहा है और (इस क्षेत्र को) सबसे अधिक कर दर का सामना करना पड़ा है. इस क्षेत्र में नौकरी की संख्या में भारी कमी आई है. हजारों एमएसएमई बंद हो रहे हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी का एमएसएमई पर सबसे बुरा असर पड़ा, गलत जीएसटी से एमएसएमई को सबसे अधिक नुकसान हुआ, मित्र पूंजीपतियों के हित में नीतियां बनायी गईं, एमएसएमई को 45 दिन में पेमेंट के प्रावधान वाली गलत नीति बनी, चीनी सामानों की अनियंत्रित डंपिंग की गई तथा एमएसएमई बोर्ड पर भाजपा के मित्रों का कब्जा हो गया.

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