हमें बेसब्री से चंद्रमा पर भोर होने, ‘विक्रम’ और ‘प्रज्ञान’ के सक्रिय होने का इंतजार: जितेंद्र सिंह
क्या चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर सक्रिय होंगे? इसरो फिर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश करेगा?

नयी दिल्ली/बेंगलुरु. केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि चंद्रमा पर कुछ ही घंटे बाद सूर्योदय होने वाला है और सभी को चंद्रयान-3 के लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ के सक्रिय होने का इंतजार है. उन्होंने कहा कि जब ऐसा होगा तो यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन जाएगा.
अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ सिंह ने लोकसभा में ”चंद्रयान-3 की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारे राष्ट्र की अन्य उपलब्धियां” विषय पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ”यह बात साझा करते हुए मुझे हर्ष है कि कुछ ही घंटे बाद ‘विक्रम’ और ‘प्रज्ञान’ अपनी नींद से जाग जाएंगे, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है.” उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण से लेकर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की यात्रा में कुछ क्षण चिंता और आशंका वाले तथा संवेदनशील रहे. सिंह ने कहा कि अब आने वाले कुछ घंटे भी थोड़ी चिंता वाले हैं.
सिंह ने कहा कि चांद पर 14 दिन की एक रात समाप्त होने वाली है और वहां भोर होने का समय है. उन्होंने कहा कि हमने वहां सोलर बैटरी की व्यवस्था की है, जो चंद्रमा पर सूर्योदय होते ही चार्ज होने लगेंगी. उन्होंने कहा, ”हम सबको चिंता है कि उन बैटरी से ‘वेक अप र्सिकट’ सक्रिय होना चाहिए. हमें उस पल का बेसब्री से इंतजार है जब ‘विक्रम’ आंखें मलते-मलते उठ खड़ा होगा और प्रज्ञान भी उसके साथ उठ जाएगा. फिर वह अद्भुत बात होगी, जो दुनिया में अभी तक नहीं हुआ और भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला पहला देश बन जाएगा.”
गौरतलब है कि इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने दो सितंबर को कहा था कि चंद्रमा पर भेजे गए चंद्रयान-3 के रोवर और लैंडर ठीक से काम कर रहे हैं और चूंकि चंद्रमा पर अब रात हो जाएगी, इसलिए इन्हें ‘नि्क्रिरय’ किया जाएगा. चंद्रमा की एक रात पृथ्वी की 14 रात्रि के बराबर होती है. डॉ. सिंह ने कहा कि इससे पहले चंद्रयान-3 के धरती की कक्षा से निकलकर सुगमता से चंद्रमा की कक्षा में जाने, चंद्रयान-3 के सॉफ्ट लैंडिंग करने जैसे क्षण भी चिंता वाले रहे.
उन्होंने चर्चा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर की कांग्रेस के शासनकाल में इसरो की शुरुआत संबंधी टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सदस्य ने वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साइकल पर प्रक्षेपण का सामान ले जाने वाला चित्र अपने भाषण में प्रस्तुत किया, जिससे पता चलता है कि उस समय साधनों का अभाव था.
अंतरिक्ष विभाग का बजट कम होने के कुछ सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2013-14 में अंतरिक्ष विभाग का बजट 5168.96 करोड़ रुपये था, जो चालू वित्त वर्ष के लिए 12543.91 करोड़ है, इसी तरह विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का कुल बजट 2013-14 में 21025.06 करोड़ रुपये था, जो इस वित्त वर्ष में 57303.60 करोड़ रुपये है.
उन्होंने द्रमुक सांसद ए राजा की इस टिप्पणी पर दुख जताया कि इसरो के वैज्ञानिक तमिल या अंग्रेजी बोलते हैं, संस्कृत या हिंदी नहीं.
सिंह ने कहा कि इसरो हमारी व्यापक संस्कृति का सर्वश्रेष्ठ गुलदस्ता है, जिसमें इसके संस्थापक विक्रम साराभाई गुजरात से थे, तो सतीश धवन जम्मू कश्मीर के रहने वाले पंजाबी परिवार से, वहीं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम तमिलनाडु के रामेश्वर से थे. उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए, जो महत्व को कम कर दें.
सिंह ने कहा कि सदन में जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वेदों के साथ विज्ञान को जोड़ा तो भी कुछ विपक्षी सदस्यों ने आलोचना की.
उन्होंने कहा कि उन सदस्यों को पता होना चाहिए कि इसरो देश में सांस्कृतिकता को आधुनिकता से जोड़ने वाला संस्थान है, जिसके वैज्ञानिक मिशन से पहले और लैंडिंग के बाद तिरुपति जाकर मंदिर में दर्शन करते हैं और सफल मिशन होने पर वहां लड्डू बांटे जाते हैं. सिंह ने कहा, ”इससे सुंदर और पवित्र प्रथा क्या होगी. अगर हम संस्कृति की बात करते हैं तो क्या हर्ज है.”
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की एक टिप्पणी के जवाब में जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहले श्रीहरिकोटा में प्रक्षेपण होता था तो अखबार में छोटी सी खबर छपती थी, लेकिन 2020 के बाद बदलाव आया और श्रीहरिकोटा के दरवाजे आम लोगों के खोल दिये गये.
उन्होंने कहा कि श्रीहरिकोटा से पिछले दिनों ‘आदित्य एल-1’ मिशन का प्रक्षेपण 10 हजार से अधिक लोगों ने देखा, वहीं चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के समय प्रक्षेपण स्थल पर करीब 1000 मीडियाकर्मी स्थल पर थे और पहली बार मीडिया ऐसे कार्यक्रम में पहुंचा था.
चंद्रयान-2 की विफलता के बारे में जानकारी मांगने संबंधी तृणमूल कांग्रेस सदस्य सौगत राय के सवाल पर सिंह ने कहा कि वह विफलता नहीं थी, चंद्रयान-2 अब भी काम कर रहा है और चंद्रयान-3 के साथ ‘रोज सुबह का अभिवादन’ करता है.
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 के समय केवल यह हुआ था कि पूरी प्रक्रिया गणना के अनुसार नहीं हो सकी थी. सिंह ने कहा कि इससे पहले चंद्रमा के अधिकतर मिशन पहली बार में असफल रहे और अमेरिका तो शुरुआती तीन प्रयासों में नाकाम रहा, लेकिन भारत को केवल एक बार असफलता मिली, जिससे सीखकर हमने सफल प्रक्षेपण कर दिखाया.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने पहले भाषण में जहां स्वच्छ भारत का आह्वान किया था. उसी तरह साल-दर-साल उन्होंने लाल किले के अपने भाषणों में ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘ई-गवर्नेंस’, ‘गहन समुद्र मिशन’ और ‘गगनयान’ जैसे विषय रखे.
सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लाल किले से दिये गये 10 भाषणों में उक्त बातें प्राथमिक रूप से विज्ञान आधारित हैं, जो दर्शाता है कि सरकार विज्ञान, वैज्ञानिकों और विज्ञान-आधारित प्रयासों को कितना महत्व देती है. उन्होंने कहा कि सरकार ने अंतरिक्ष विभाग के तहत ‘वैभव’ कार्यक्रम की शुरुआत की है ताकि युवा वैज्ञानिक विदेश से स्वदेश लौट सकें.
क्या चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर सक्रिय होंगे? इसरो फिर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश करेगा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा पर सुबह होने के साथ ही अब अपने चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ के सौर ऊर्जा से संचालित लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ के साथ संपर्क स्थापित कर इन्हें फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रहा है ताकि वे वैज्ञानिक प्रयासों को जारी रख सकें.
चंद्रमा पर रात होने से पहले, लैंडर और रोवर दोनों इस महीने की शुरुआत में क्रमश? चार और दो सितंबर को सुप्तावस्था या निष्क्रय अवस्था (स्लीप मोड) में चले गये थे. इसरो यदि चंद्रमा पर सूर्योदय होते ही लैंडर और रोवर को फिर से सक्रिय कर देता है तो चंद्रयान-3 के पेलोड द्वारा एक बार फिर से प्रयोग किये जा सकेंगे.
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र, जहां लैंडर और रोवर दोनों स्थित हैं, पर सूर्य की रोशनी फिर से आने और उनके सौर पैनल के जल्द ही चार्ज होने की उम्मीद है. इसरो अब लैंडर और रोवर के साथ फिर से संपर्क स्थापित करने और इन्हें सक्रिय करने का प्रयास कर रहा है.
इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक नीलेश देसाई ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”हमने लैंडर और रोवर दोनों को ‘स्लीप मोड’ पर डाल दिया है क्योंकि तापमान शून्य से 120-200 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जायेगा. बीस सितंबर से चंद्रमा पर सूर्योदय हो रहा होगा और हमें उम्मीद है कि 22 सितंबर तक सौर पैनल और अन्य उपकरण पूरी तरह से चार्ज हो जाएंगे, इसलिए हम लैंडर और रोवर दोनों को सक्रिय करने की कोशिश करेंगे.”
उन्होंने कहा, ”यदि हमारी किस्मत अच्छी रही, तो हमारे लैंडर और रोवर दोनों सक्रिय हो जाएंगे और हमें कुछ और प्रायोगिक डेटा मिलेंगे, जो चंद्रमा की सतह की आगे की जांच के लिए हमारे लिए उपयोगी होंगे. हम 22 सितंबर से होने वाली गतिविधि का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हम लैंडर और रोवर दोनों को सक्रिय करने और कुछ और उपयोगी डेटा प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं.” चंद्रमा पर उतरने के बाद, लैंडर और रोवर और पेलोड ने एक के बाद एक प्रयोग किए ताकि उन्हें 14 पृथ्वी दिन (एक चंद्र दिवस) के भीतर पूरा किया जा सके, चंद्रमा पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है.
लैंडर और रोवर का कुल वजन 1,752 किलोग्राम है और इन्हें वहां के परिवेश का अध्ययन करने के लिए एक चंद्र दिन की अवधि (लगभग 14 पृथ्वी दिवस) तक संचालित करने के लिए तैयार किया गया था. इसरो को उम्मीद है कि जब चंद्रमा पर फिर से सूर्योदय होगा तो ये फिर सक्रिय हो जाएंगे और वहां प्रयोग तथा अध्ययन करना जारी रखेंगे.
इसरो ने चार सितंबर को कहा था, ”सौर ऊर्जा खत्म हो जाने और बैटरी से भी ऊर्जा मिलना बंद हो जाने पर विक्रम, प्रज्ञान के पास ही नि्क्रिरय अवस्था में चला जाएगा. उनके 22 सितंबर, 2023 के आसपास सक्रिय होने की उम्मीद है.” इसरो ने कहा था कि पेलोड को बंद कर दिया गया और लैंडर के रिसीवर को चालू रखा गया है. भारत ने 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 के ‘विक्रम’ लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद इतिहास रच दिया था. भारत चंद्रमा की सतह पर पहुंचने वाला चौथा देश और इसके दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया है.