परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों को अनुमति को लेकर विधेयक क्यों नहीं लाया गया: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 26 Aug 2025 08:56 PM
परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों को अनुमति को लेकर विधेयक क्यों नहीं लाया गया: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने और उन्हें संचालित करने की अनुमति देने के लिए दो मौजूदा अधिनियमों में संशोधन करने के वादे को लेकर मंगलवार को कहा कि यह हैरानी की बात है कि हाल ही में संपन्न संसद के मानसून सत्र में इससे जुड़ा कोई विधेयक पेश नहीं किया गया.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल भी किया कि क्या ये विधेयक तीन महीने बाद होने वाले शीतकालीन सत्र में पेश किए जाएंगे? रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,” वित्त मंत्री द्वारा पेश 2025-26 के बजट में परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े वादे किए गए थे, जैसे परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 में संशोधन और परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन करके निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने और चलाने की अनुमति देना.” उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि हाल ही में संपन्न संसद के मानसून सत्र में इन दोनों में से कोई भी विधेयक पेश नहीं किया गया.

उन्होंने कहा, ” अब सवाल यह है कि क्या ये विधेयक तीन महीने बाद होने वाले शीतकालीन सत्र में पेश किए जाएंगे? इसके अलावा, उस विधेयक का क्या होगा जो एक स्वतंत्र नियामक निकाय की स्थापना से संबंधित है – ऐसा निकाय जो परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान का हिस्सा न हो? ” रमेश के अनुसार, अगर सरकार सच में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना चाहती है, तो इस तरह का कदम उठाना बेहद ज़रूरी हो जाता है.

कांग्रेस नेता ने कहा, “यह भी याद रखना चाहिए कि तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पूर्ण समर्थन के साथ अरुण जेटली और सुषमा स्वराज – दोनों ने परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई थी. प्रस्तावित संशोधन उनकी उस उपलब्धि को उलटने जैसा होगा.”

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