एजीआर पर पुर्निवचार के अदालती फैसले के बाद एयरटेल करेगी सरकार से संपर्क? विट्टल

नयी दिल्ली: दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल उच्चतम न्यायालय के नए आदेश को ध्यान में रखते हुए समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मामले में एक बार फिर सरकार से राहत की मांग करेगी। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपने एक आदेश में कहा था कि सरकार दूरसंचार कंपनियों के लंबित एजीआर बकाये का पुर्निमलान करने के साथ उन पर पुर्निवचार भी कर सकती है। यह प्रक्रिया केवल वित्त वर्ष 2016-17 ही नहीं, बल्कि सभी वर्षों के बकाया एजीआर पर लागू होगी।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को कर्जग्रस्त कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के 2016-17 के लिए करीब 5,606 करोड़ रुपये के एजीआर बकाये के पुर्निमलान की अनुमति दी थी। एजीआर के ही आधार पर दूरसंचार कंपनियां सरकार को लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का भुगतान करती हैं। इसकी गणना को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।

एयरटेल के वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गोपाल विट्टल ने कहा, हमने पहले भी कहा था कि एजीआर गणना में कुछ त्रुटियां थीं। हमने इसकी समीक्षा की मांग की थी लेकिन उस समय फैसला हमारे पक्ष में नहीं गया था।… लेकिन अब अदालत की तरफ से एजीआर पुर्निमलान की अनुमति दिए जाने को हम सकारात्मक कदम मानते हैं। आने वाले दिनों में हम इस संबंध में सरकार से संपर्क करेंगे।

विट्टल ने कंपनी के तिमाही नतीजों पर निवेशकों के साथ चर्चा में कहा कि एयरटेल इस मामले में आने वाले समय में ‘एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए’ उचित प्रक्रिया का पालन करेगी। शीर्ष अदालत के इस आदेश से दूरसंचार कंपनियों को एजीआर बकाया की गणना और देनदारी के पुनर्मूल्यांकन का मौका मिल सकता है। ऐसा होने से दूरसंचार उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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