
नयी दिल्ली/कोझिकोड कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि वह ”मोदी उपनाम” संबंधी टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी को दोषी ठहराने संबंधी फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध करने वाली उनकी याचिका खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी.
पार्टी ने कहा कि देश को एकजुट करने के मिशन से राहुल गांधी या पार्टी को कोई रोक नहीं पाएगा. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने उत्तरी केरल के कोझिकोड जिले में पूर्वोत्तर के हिंसाग्रस्त राज्य मणिपुर में शांति बहाली की मांग के लिये आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गांधी से जुड़े मानहानि मामले और अदालत के फैसले पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बारे में बात की.
उन्होंने कहा कि गुजरात की अदालत से गांधी के खिलाफ आये फैसले में “हैरान करने वाला कुछ भी नहीं” है और ”हमारे सामने एक और विकल्प है… उच्चतम न्यायालय. देखते हैं. कांग्रेस पार्टी यह विकल्प भी अपनाएगी.” वेणुगोपाल के यह बयान देने से कुछ ही देर पहले गुजरात उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोषसिद्धि के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध करने संबंधी उनकी याचिका खारिज कर दी.
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत का कांग्रेस नेता को दोषी ठहराने का आदेश ”न्यायसंगत, उचित और वैध” है. बैठक के दौरान वेणुगोपाल ने कहा, “वर्तमान समय में हम कैसे मान लें कि गुजरात जैसे राज्य से न्याय मिलेगा? एक बात जो फैसले लिखने वालों और ऐसे फैसलों के लिए जमीन तैयार करने वालों को समझनी चाहिए, वह यह है कि राहुल गांधी एक ऐसे नेता हैं जिन्हें किसी भी फैसले या अयोग्यता से तोड़ा नहीं जा सकता है.” बाद में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि कोई भी निर्णय गांधी या कांग्रेस पार्टी को राष्ट्र को एकजुट करने के उनके मिशन से नहीं रोक पाएगा.
वेणुगोपाल ने पूछा, “राहुल गांधी और कांग्रेस देश के लोगों को एकजुट करने का काम आगे बढ़ाएगी… शुरुआती फैसले और सजा को पांच या छह महीने हो गए हैं. क्या वह डरे हुए और चुप थे?” उन्होंने यह भी कहा कि गांधी इन सभी मुद्दों से पार पा लेंगे. वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, “मामला तब शुरू हुआ जब अडाणी-मोदी संबंध उजागर हुआ. हमें नहीं पता था कि अडाणी इतने शक्तिशाली हैं….” यदि दोषसिद्धि पर रोक लग जाती, तो राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होने का मार्ग प्रशस्त हो जाता.
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर 2019 के मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी.
फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था. राहुल गांधी 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. राहुल गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी की थी कि ”सभी चोरों का मोदी उपनाम ही क्यों होता है?” इस टिप्पणी को लेकर विधायक ने गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था.
भाजपा ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया, कांग्रेस ने सरकार पर आवाज दबाने का आरोप लगाया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ‘मोदी उपनाम’ वाली टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध करने संबंधी याचिका को खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले का शुक्रवार को स्वागत किया. इसके विपरीत कांग्रेस ने फैसले पर नाखुशी जताते हुए सरकार पर आवाज को दबाने का आरोप लगाया. भाजपा ने आरोप लगाया कि दूसरों को गाली देना और उन्हें बदनाम करना कांग्रेस नेता की फितरत है.
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने कहा कि यह निर्णय कानूनी रूप से गलत है और वह इसके विरुद्ध बहुत जल्द उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी.
मुख्य विपक्षी दल ने यह आरोप भी लगाया कि यह सब स्वतंत्र विचारों का गला घोंटने की सरकार की साजिश है और इस मकसद को पूरा करने के लिए मानहानि के कानून का दुरुपयोग किया गया है.
भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने ‘मोदी उपनाम’ वाले अपने बयान के लिए माफी मांगने से इनकार कर ‘अहंकार’ दिखाया है. प्रसाद ने कहा कि अगर वह इस तरह का व्यवहार करते हैं और लोगों एवं संस्थानों को बदनाम करते हैं तो कानून उन्हें छोड़ेगा नहीं. उन्होंने कहा कि जो लोग दावा कर रहे हैं कि गांधी की सजा कठोर है तो उन्हें जवाब देना चाहिए कि पूर्व सांसद ने इतना कठोर अपराध क्यों किया. प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ मानहानि के 10 मामले हैं.
प्रसाद ने कहा, ”आज का निर्णय विधि सम्मत है, उचित है और स्वागत योग्य है.” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस का कोई नेता साजिश से नहीं डरेगा और इस मामले में राजनीतिक एवं कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्होंने ट्वीट किया, ”देश अब मोदी जी की भष्टाचार पर दोहरी नीति बड़ी गहराई से जान चुका है. कांग्रेस का कोई भी नेता, हमारा कोई भी कार्यकर्ता, इस राजनीतिक साजिश से नहीं डरता. हम राजनीतिक और कानूनी लड़ाई, दोनों लड़ेंगे. सत्यमेव जयते.” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने आरोप लगाया कि ‘अहंकारी सत्ता’ सच को दबाने के लिए हर हथकंडे आजमा रही है.
कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, ”यह फैसला निराशाजनक जरूर है, लेकिन अप्रत्याशित नहीं है.” उन्होंने कहा, ”यह मामला सिर्फ राहुल गांधी या किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है, क्योंकि यह स्वतंत्र विचार और अभिव्यक्ति की बात है. इस सरकार का उद्देश्य है कि अभिव्यक्ति की आजादी पर नियंत्रण किया जाए. इसीलिए मानहानि के कानून का दुरुपयोग किया गया है.”
सिंघवी ने कहा, ”राहुल गांधी जी सत्य की राह के निडर यात्री हैं और वे भाजपा के झूठ का पर्दाफाश करते रहेंगे. इस तरह के पर्दाफाश से मोदी सरकार बौखलाई रहती है. हमें विश्वास है कि सत्य की जीत होगी और इस अहंकारी सत्ता को अंत में कड़ा जवाब मिलेगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक साजिश है कि स्वतंत्र विचारों का गला घोटा जाए और कोई व्यक्ति स्वतंत्र रूप से अपने विचार नहीं व्यक्त कर सके.
उनका कहना था कि यह फैसला कानूनी रूप से गलत है और इसे बहुत जल्द उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी. गुजरात उच्च न्यायालय ने मोदी उपनाम वाली टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध खारिज कर दिया.
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर 2019 के मामले में सूरत की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी. फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था. राहुल गांधी वर्ष 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे.



