लीजिए जल्द ही लोहे की साइकिल का जमाना लदने वाला है क्योंकि बांस से बनी साइकिल लांच हो चुकी है। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने देश में बांस से बनी पहली साइकिल पेश की। ट्रायल व फीडबैक के बाद बाजार में उतारा जाएगा। शर्मा ने कल इसे चलाकर देखा और वीडियो भी जारी कर दिया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा कि फिट इंडिया #FitIndia अभियान को आगे बढ़ाने का सस्टेनेबल तरीके से साइकिल चलाने से बेहतर और क्या तरीका हो सकता है? आइए, इस इनोवेशन को #SundaysOnCycle का हिस्सा बनाएं।
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने इसकी तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इसे ‘घास’ की श्रेणी में रखने की नीति ने इस सेक्टर के लिए अवसरों की दुनिया खोल दी है।
मांडविया ने असम सीएम की तारीफ करते हुए कहा कि असम की इस BIS-सर्टिफाइड बांस की साइकिल में पूरे देश में सस्टेनेबल साइकिलिंग की नई संस्कृति को प्रेरित करने की क्षमता है। इसके बाद #FitIndia अभियान को आगे बढ़ाने का सस्टेनेबल तरीके से साइकिल चलाने से बेहतर और क्या तरीका हो सकता है? आइए, इस इनोवेशन को #SundaysOnCycle का हिस्सा बनाएं।
उधर बांस से बनी पहली साइकिल को लांच करने के बाद असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि ‘आप जानना चाहते हैं कि मैं किस पर सवारी कर रहा हूँ? यह एक बांस की साइकिल है- जिसका ढांचा पूरी तरह से बांस से बना है और यह BIS से सर्टिफाइड है। अगले कुछ दिनों में, हम इसे गुवाहाटी के पार्कों में उपलब्ध कराएंगे ताकि लोग इसे चला सकें और लॉन्च से पहले इस प्रोडक्ट पर अपना फ़ीडबैक दे सकें।
बांस से 800 से ज़्यादा उत्पाद
जानते चलें कि असम में पाए जाने वाले बांस से 800 से ज़्यादा उत्पाद बनाए जा सकते हैं और इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो सकता है- जैसे मेथनॉल से लेकर ATF और मज़बूत स्ट्रक्चर बनाने तक।
बैम्बू इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के फाउंडर और डायरेक्टर योगेश सुरेश शिंदे ने कहा कि कंपनी असम सरकार और बीआईएस की मदद से अपना नया ब्रांड, ‘असम बैम्बू साइकिल’ लांच कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी को असम इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एआईडीसी), गुवाहाटी स्मार्ट सिटी लिमिटेड और गुवाहाटी नगर निगम से मदद मिली है। उनके अनुसार, शुरुआती प्रोडक्शन का लक्ष्य हर महीने 1,000 साइकिल बनाना है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 5,000 साइकिल प्रति माह करने की योजना है।