जेडएसआई ने पहली बार भारत में युन्नान कीलबैक सांप की मौजूदगी की पुष्टि की

कोलकाता. भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के वैज्ञानिकों ने भारत में युन्नान कीलबैक सांप की मौजूदगी की पहली बार पुष्टि की है. युन्नान कीलबैक (फाउलीया युन्नानेंसिस) एक विषहीन सांप है जो एशिया के विभिन्न भागों में पाया जाता है तथा उपोष्णकटिबंधीय जंगलों, आर्द्रभूमियों और चावल के खेतों में पाया जाता है.

जेडएसआई ने सोमवार को एक बयान में कहा कि ऐतिहासिक संग्रहों की हाल में अवलोकन के दौरान, जेडएसआई के सरीसृप अनुभाग के शोधकर्ताओं सुमिध रे, अनिरबन दास और प्रत्यूष महापात्रा ने 1868 के युन्नान अभियान में प्रसिद्ध प्रकृतिवादी डॉ. जॉन एंडरसन द्वारा एकत्र किए गए मूल नमूनों में से एक की पहचान की.

एंडरसन ने 1879 में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के भारतीय संग्रहालय में जमा किए गए तीन नमूनों के आधार पर ‘युनानेंसिस’ का वर्णन किया था, जिन्हें बाद में जेडएसआई (वाउचर संख्या जेडएसआई-आर-4191, 4192, 4196) को हस्तांतरित कर दिया गया था.
इन मूल नमूनों में से एक को अब अनुसंधान दल द्वारा औपचारिक रूप से “लेक्टोटाइप” नाम दिया गया है.

इस ऐतिहासिक पहचान के अलावा, टीम ने सरीसृप अनुभाग में संरक्षित सात और नमूने (सामूहिक रूप से वाउचर संख्या जेडएसआई-आर-24039 के अंतर्गत सूचीबद्ध) खोजे. ये नमूने जेडएसआई के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एस. बिस्वास और उनकी टीम द्वारा 22 दिसंबर, 1982 को अरुणाचल प्रदेश के मियाओ से लगभग 16 किलोमीटर पूर्व में, नामदाफा बाघ अभियारण्य के गिब्बन्स लैंड से एकत्र किए गए थे.

सावधानीपूर्वक पुन? परीक्षण से इनकी पुष्टि युन्नान कीलबैक के रूप में हुई है, जो भारत में इस प्रजाति का पहला सत्यापित रिकॉर्ड प्रदान करता है. युन्नान कीलबैक वर्तमान में दक्षिण-पश्चिमी चीन (युन्नान प्रांत) और पूर्वोत्तर भारत (अरुणाचल प्रदेश) में पाया जाता है तथा संभवत? इसका क्षेत्र म्यांमा के समीपवर्ती क्षेत्रों तक फैला हुआ है.

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