
नयी दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर इंडिया गेट पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क अवरुद्ध करने के अलावा उसके र्किमयों के काम में बाधा डालने और उन पर हमला करने के आरोप में कम से कम 15 लोगों को गिरफ्तार किया है. यह जानकारी एक अधिकारी ने सोमवार को दी.
अधिकारी ने बताया कि रविवार को प्रदर्शन स्थल पर स्थिति तब बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने घटनास्थल से हटाए जाने के दौरान पुलिसर्किमयों पर कथित तौर पर मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया. अधिकारी ने कहा, ”स्थिति हाथापाई में बदल गई और कुछ प्रदर्शनकारियों ने हमारे र्किमयों पर मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया, जो असामान्य और दुर्लभ कार्रवाई है.” उन्होंने कहा कि अब तक पुलिस ने कम से कम 15 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है.
पुलिस अधिकारी ने कहा, ” इंडिया गेट कोई निर्धारित विरोध स्थल नहीं है. प्रदर्शनकारियों को वहां से जाने के लिए कहा गया था. जंतर-मंतर निर्धारित विरोध स्थल है और कोई भी अनुमति लेकर वहां प्रदर्शन कर सकता है. रविवार को प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड लांघकर सी-हेक्सगन को जाम कर दिया था. वे एक घंटे से अधिक समय तक सड़क पर बैठे रहे और यहां तक कि यातायात जाम में फंसे लोग भी उनसे रास्ता खाली करने का अनुरोध कर रहे थे.” उन्होंने बताया कि जब पुलिस दलों ने प्रदर्शनकारियों को जाने के लिए कहा, तो उन्होंने दुर्व्यवहार किया, पुलिसर्किमयों पर हमला किया और कुछ ने तो मिर्च स्प्रे का भी इस्तेमाल किया.
अधिकारी ने कहा, “झड़प के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए आरएमएल अस्पताल ले जाया गया. हम पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं.” माओवादी नेता माडवी हिडमा के समर्थन में कथित तौर पर नारेबाजी किये जाने के बारे में पूछे जाने पर, अधिकारी ने कहा कि पुलिस मामले की सभी कोण से जांच कर रही है.
‘द डेल्ही कोआर्डिनेशन कमेटी फॉर क्लीन एयर’ ने एक बयान में कहा कि शहर की बिगड़ती वायु गुणवत्ता सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ”गंभीर खतरा” बन गई है और आरोप लगाया कि अधिकारी प्रदूषण के मूल कारणों का समाधान करने में विफल रहे हैं.
कमेटी ने आरोप लगाया गया कि वायु गुणवत्ता “गंभीर” श्रेणी में बनी हुई है, जबकि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान खोजने के बजाय जल छिड़काव, क्लाउड सीडिंग और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) स्टेशन के पास छिड़काव जैसे “दिखावटी उपायों” पर निर्भर है.
इंडिया गेट के पास प्रदर्शन : दिल्ली पुलिस ने कहा, प्रदर्शनकारियों ने हिडमा के समर्थन में नारे लगाए
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को यहां एक अदालत को बताया कि प्रदूषण को लेकर इंडिया गेट के पास प्रदर्शन के दौरान पुलिसर्किमयों पर कथित तौर पर ‘पेपर स्प्रे’ का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार पांच प्रदर्शनकारी मारे गए माओवादी नेता माडवी हिडमा के समर्थन में नारे लगा रहे थे.
न्यायिक मजिस्ट्रेट अरिदमन सिंह चीमा ने उन पांच छात्रों के खिलाफ मामले की सुनवाई की जिनके खिलाफ कर्तव्य पथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पांचों प्रदर्शनकारियों को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. अदालत ने मामले में एक व्यक्ति को उसकी उम्र का सत्यापन होने तक निगरानी गृह भेज दिया. अदालत ने जिन पांच छात्रों को न्यायिक हिरासत में भेजा है, उनकी पहचान आकाश, अहान, अक्षय, समीर और विष्णु के तौर पर की गई है.
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से किया गया कृत्य) 74 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 221 (सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालना) और 223 (सरकारी कर्मचारी के वैध आदेश की अवज्ञा) सहित सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है.
कार्यवाही के दौरान, जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि गिरफ्तार किए गए लोग माडवी हिडमा के समर्थन में नारे लगा रहे थे. हिडमा शीर्ष माओवादी नेता था, जो इस महीने की शुरुआत में आंध्र प्रदेश में एक मुठभेड़ में मारा गया था. जांच अधिकारी ने मजिस्ट्रेट को प्रदर्शन के दौरान हिडमा के खिलाफ नारे लगाते प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो भी दिखाया. बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि पूछताछ के दौरान कम से कम तीन छात्रों को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया. उन्होंने मजिस्ट्रेट को कुछ तस्वीरें भी दिखाईं जिनमें कथित तौर पर उनके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे.
उन्होंने कहा, “वे छात्र हैं, वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने गए थे. किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि में शामिल होने नहीं.” उन्होंने न्यायाधीश से आरोपी अहान को राहत देने का भी आग्रह किया, जिसे मंगलवार को होने वाली परीक्षा में शामिल होना है. हालांकि, न्यायाधीश ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि “उसे विरोध स्थल पर जाने से पहले ही यह पता था.” वकील ने कहा, “हमें कोई आदेश नहीं मिला. 24 घंटे हो गए हैं, हमें प्राथमिकी की कोई प्रति नहीं मिली है.” वकील ने कहा “हमारे द्वारा जमा की गई तस्वीर पुलिस की बर्बरता दिखाती है. वे इस मामले से क्या उजागर करना चाहते हैं? क्या उन्हें कोई व्हाट्सएप लिंक मिला है? वे सिफ.र् छात्र हैं.”
एसएफएस ने दिल्ली प्रदूषण से संबंधित प्रदर्शन में असंबद्ध नारा लगाने वालों से दूरी बनाई
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को लेकर रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल संगठनों में से एक ‘साइंटिस्ट्स फॉर सोसाइटी’ (एसएफएस) ने उन समूहों से अपनी दूरी बना ली है, जिन्होंने वायु प्रदूषण की समस्याओं से इतर नारे लगाये. एसएफएस ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि वह केवल प्रदूषण के मुद्दे पर ही इस प्रदर्शन में शामिल हुआ था. संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की गंभीर वायु गुणवत्ता की समस्या को उजागर करना, नागरिकों को शिक्षित करना और शासन की ”असमर्थता तथा अनिच्छा” पर प्रश्न उठाना था.
एसएफएस ने बताया कि हिमखंड तथा बीएससीईएम नामक दो संगठनों ने सभा के दौरान भाकपा (माओवादी) के नेता माडवी हिडमा की कथित ‘गैर-न्यायिक’ हत्या के संबंध में नारे लगाने शुरू कर दिए. समूह ने कहा कि वह ऐसे मुठभेड़ों की स्पष्ट रूप से निन्दा करता है और उच्च-स्तरीय जांच की मांग का समर्थन भी करता है, लेकिन इसने मुठभेड़ संबंधी मुद्दे को उठाने के लिए प्रदूषण संबंधी प्रदर्शन को ‘उचित मंच नहीं’ माना. एसएफएस के अनुसार, उसे पहले से यह सूचना नहीं थी कि ये संगठन अन्य मांगें भी शामिल करने वाले हैं.
बयान में कहा गया, ”जैसे ही हमें स्थिति का पता चला, हमने पहले उन्हें (असंबद्ध नारे लगाने वालों को) रोकने का प्रयास किया; लेकिन जब वे नहीं माने, तो हमने तुरंत खुद को उनसे अलग कर लिया और प्रदर्शन अलग से जारी रखा.” समूह ने इस कृत्य को ”अलोकतांत्रिक” और संयुक्त मोर्चे की मर्यादाओं तथा न्यूनतम साझा कार्यक्रम के विरुद्ध माना. एसएफएस ने प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी की भी निन्दा की है और सभी कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है.



