एमएसपी कानून जल्दबाजी में नहीं लाया जा सकता; सरकार के साथ वार्ता के लिए आगे आएं किसान: मुंडा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 13 Feb 2024 08:43 PM
एमएसपी कानून जल्दबाजी में नहीं लाया जा सकता; सरकार के साथ वार्ता के लिए आगे आएं किसान: मुंडा
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नयी दिल्ली. केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने मंगलवार को कहा कि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी वाला कानून सभी हितधारकों से परामर्श किए बिना जल्दबाजी में नहीं लाया जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारी किसान समूहों से इस मुद्दे पर सरकार के साथ रचनात्मक चर्चा करने का आग्रह किया.

मुंडा ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में प्रदर्शनकारी किसानों को कुछ तत्वों के प्रति ”जागरूक और सतर्क” रहने के लिए आगाह किया, जो राजनीतिक लाभ के लिए उनके विरोध प्रदर्शन को बदनाम कर सकते हैं. मुंडा उस मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जिसने किसानों की चिंताओं को हल करने के लिए चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), किसान मजदूर मोर्चा सहित विभिन्न किसान समूहों के साथ दो दौर की चर्चा की. हालांकि, बातचीत बेनतीजा रहने पर किसान समूहों ने मंगलवार को अपना ‘दिल्ली चलो’ मार्च शुरू कर दिया.

मुंडा ने कहा, ”दो दौर की चर्चा में हम उनकी कई मांगों पर सहमत हुए. लेकिन कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई. बातचीत अभी भी जारी है.” उन्होंने कहा कि केंद्र उनकी कई मांगों को पूरा करने पर सहमत हो गया है जो प्रशासनिक स्तर पर की जा सकती हैं. मंत्री ने कहा कि हालांकि एमएसपी की गारंटी देने वाली नीति के लिए राज्य सरकारों सहित सभी हितधारकों के विचारों को ध्यान में रखते हुए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

मुंडा ने कहा, ”हमें एमएसपी के बारे में यह देखना है कि कानून किस तरह बनाना है तथा इसमें क्या लाभ और क्या नुकसान है.” उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार सभी हितधारकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए “ठोस काम” करती है और “जल्दबाजी” में ऐसी कोई घोषणा नहीं करेगी जो बाद में विफल हो जाए.

मुंडा ने कहा, “वे (किसान संगठन) चाहते हैं कि हम कुछ चीजों की घोषणा करें. सरकार घोषणा करने के लिए नहीं, बल्कि काम करने के लिए है. घोषणा ठोस चर्चा के बाद ही की जाती है. ठोस चर्चा के लिए, हमें प्रत्येक हितधारक के हित को ध्यान में रखना होगा.” उन्होंने यह भी कहा कि कृषि राज्यों से जुड़ा विषय है.

उन्होंने कहा, “मान लीजिए कि हम राष्ट्रीय स्तर पर कुछ करते हैं, वही लोग कल कहेंगे कि आपने राज्यों को विश्वास में नहीं लिया. यह भी उचित नहीं होगा.” मंत्री ने कहा कि चर्चा के दौरान किसानों से अनुरोध किया गया कि वे या तो संजय अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति का हिस्सा बनें जो पहले से ही एमएसपी प्रणाली को मजबूत करने पर विचार कर रही है, या एक नयी समिति का हिस्सा बनें.
उन्होंने कहा, “…हम एक समिति बनाएंगे और हमने उनसे इसका हिस्सा बनने को कहा. वे इसके लिए भी तैयार नहीं थे.” मुंडा ने कहा कि पूरे मामले को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए.

मंत्री ने कहा कि सरकार स्पष्ट संदर्भ शर्तों के साथ समग्र समयबद्ध चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन वे इसके लिए भी तैयार नहीं हैं.
तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेते समय सरकार द्वारा किए गए समिति गठन के वादे के आठ महीने बाद एमएसपी पर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति जुलाई 2022 में गठित की गई थी. आज तक, इसने 37 बैठकें/कार्यशालाएं आयोजित की हैं.
यह उल्लेख करते हुए कि केंद्र किसानों की चिंताओं को हल करने के लिए किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है, मुंडा ने कहा, “वे (किसान) अब तारीख बताएंगे”.

उन्होंने कहा, ह्लहमने उनसे कहा है कि हम बातचीत के लिए तैयार हैंङ्घ अगर वे बात नहीं करना चाहते हैं और समस्या पैदा करना उनका उद्देश्य है, तो मैं किसानों को ऐसे लोगों से सावधान रहने की सलाह दूंगा जो राजनीतिक लाभ के लिए एक स्थिति पैदा करना चाहते हैं.ह्व मुंडा ने कहा, ”मैं किसानों से अपील करना चाहता हूं कि उनके बीच कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं जो किसानों को बदनाम करने के लिए कोई स्थिति पैदा करना चाहते हैं. उन्हें इनसे सावधान रहना चाहिए.” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और पिछले 10 वर्षों में कृषि बजट को 27,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.24 लाख करोड़ रुपये सालाना कर दिया है.

एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के अलावा, किसान कृषकों के कल्याण के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन तथा कर्ज माफी समेत अन्य मांग कर रहे हैं. किसान पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए “न्याय”, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने, विश्व व्यापार संगठन से हटने और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग कर रहे हैं.

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