भारतीय मुसलमानों को सीएए पर चिंता की जरूरत नहीं, उन्हें हिंदुओं के समान अधिकार मिलते रहेंगे: सरकार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 12 Mar 2024 10:44 PM
भारतीय मुसलमानों को सीएए पर चिंता की जरूरत नहीं, उन्हें हिंदुओं के समान अधिकार मिलते रहेंगे: सरकार
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नयी दिल्ली/भदोही. गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) पर भारतीय मुसलमानों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस कानून में उनकी नागरिकता को प्रभावित करने वाला कोई प्रावधान नहीं है. मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता कानून का भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है जिनके पास अपने समकक्ष हिंदू भारतीय नागरिकों के समान अधिकार हैं.

मंत्रालय ने सीएए के संबंध में मुसलमानों और छात्रों के एक वर्ग की आशंका को दूर करने की कोशिश करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि ”इस कानून के बाद किसी भी भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश करने के लिए नहीं कहा जाएगा.” केंद्र ने 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के बिना दस्तावेज वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए तेजी से नागरिकता प्रदान करने के वास्ते नागरिकता (संशोधन) कानून को सोमवार को अधिसूचित किया.
गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ”उन तीन मुस्लिम देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के कारण पूरी दुनिया में इस्लाम की छवि बुरी तरह खराब हुई है. हालांकि, इस्लाम एक शांतिपूर्ण धर्म होने के नाते, कभी भी धार्मिक आधार पर घृणा, हिंसा, उत्पीड़न को बढ.ावा नहीं देता है.” बयान में कहा गया कि यह कानून अत्याचार के नाम पर इस्लाम की छवि खराब होने से बचाता है.

कानून की आवश्यकता बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि भारत का अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ प्रवासियों को इन देशों में वापस भेजने के लिए कोई समझौता नहीं है. बयान में कहा गया, ”यह नागरिकता कानून अवैध प्रवासियों के निर्वासन से संबंधित नहीं है. इसलिए मुसलमानों और छात्रों सहित लोगों के एक वर्ग की चिंता अनुचित है कि सीएए मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ है.” मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता अधिनियम की धारा 6, जो प्राकृतिक आधार पर नागरिकता से संबंधित है, के तहत दुनिया में कहीं से भी मुसलमानों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने पर कोई रोक नहीं है.

बयान में कहा गया कि अन्य धर्मों वाले भारतीय नागरिकों की तरह भारतीय मुस्लिमों के लिए आजादी के बाद से उनके अधिकारों की स्वतंत्रता और अवसर को कम किए बिना, सीएए ने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आने वाले लोगों के उत्पीड़न की पीड़ा को कम करने तथा उनके प्रति उदार व्यवहार दिखाने के उद्देश्य से नागरिकता के लिए आवेदन की योग्यता अवधि को 11 से कम कर पांच साल कर दिया है.

नौ में कोई एक दस्तावेज दे सकते हैं सीएए आवेदक

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता पाने के इच्छुक आवेदक यह साबित करने के लिए वैध या कालातीत (एक्सपायर्ड) पासपोर्ट, पहचान पत्र, भू-रिकार्ड समेत नौ दस्तावेजों में कोई भी एक कागजात जमा कर सकते हैं कि वह अफगानिस्तान या बांग्लादेश या पाकिस्तान के नागरिक हैं.

सोमवार को जारी किये गये सीएए नियमों के अनुसार आवेदक यह साबित करने के लिए वीजा और भारत में आगमन पर आव्रजन मुहर सहित 20 दस्तावेजों में कोई एक सौंप सकते हैं कि वे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में दाखिल हुए थे. इन दस्तावेजों में किसी ग्रामीण या शहरी निकाय के निर्वाचित सदस्य या किसी राजस्व अधिकारी द्वारा जारी संबंधित प्रमाणपत्र भी शामिल है.

नियमों में यह भी कहा गया है कि आवेदकों को किसी स्थानीय प्रतिष्ठित सामुदायिक संगठन से जारी अर्हता प्रमाण पत्र भी देना होगा जो इस बात की पुष्टि करे कि आवेदक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय में किसी एक का सदस्य है और अब भी उसी समुदाय में है.

सरकार ने सोमवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू किया. उसने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उन बिना दस्तावेज वाले गैर मुसलमानों को त्वरित ढंग से नागरिकता देने के लिए इस कानून के नियम जारी किये जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आ गये थे. सीएए के तहत इन तीन देशों के उत्पीड़ित गैर मुसलमानों– हिंदुओं, सिखों, जैनियों, बौद्धों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. आवेदकों को इस बात की घोषणा करनी होगी कि वे अपनी वर्तमान नागरिकता का परित्याग करते हैं तथा वे ‘भारत को अपना स्थायी निवास’ बनाना चाहते हैं.

कोई भी आवेदक अफगानिस्तान, पाकिस्तान या बांग्लादेश का नागरिक है, यह साबित करने के लिए वहां की सरकार द्वारा जारी पासपोर्ट, भारत में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय या विदेशी पंजीकरण अधिकारी द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र या आवास परमिट, सरकारी प्रशासनिक इकाई द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल या कॉलेज या विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी स्कूल प्रमाणपत्र या शैक्षणिक प्रमाणपत्र शामिल हैं.

स्वीकार्य होने वाले अन्य दस्तावेजों में अफगानिस्तान या बांग्लादेश या पाकिस्तान की सरकार या उन देशों के किसी अन्य सरकारी प्रशासनिक निकाय द्वारा जारी पहचान पत्र, कोई लाइसेंस या प्रमाणपत्र और अन्य कागजात शामिल हैं जो यह दर्शाते हों कि आवेदक के माता-पिता, दादी-दादी या नाना-नानी में कोई अफगानिस्तान या बांग्लादेश या पाकिस्तान के नागरिक हैं या नागरिक रहे थे.
अफगानिस्तान या बांग्लादेश या पाकिस्तान की सरकार या वहां के किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी ऐसा दस्तावेज भी मान्य होगा जो यह स्थापित करता हो कि आवेदक अफगानिस्तान या बांग्लादेश या पाकिस्तान से है. नियमों के अनुसार ये दस्तावेज उनकी वैधता अवधि बीत जाने के बाद भी मान्य होंगे.

पूर्वोत्तर के आदिवासी क्षेत्रों में नहीं लागू होगा सीएए

संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा प्राप्त क्षेत्रों समेत पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकांश आदिवासी क्षेत्रों को सोमवार को लागू हुए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के दायरे से बाहर रखा गया है. कानून के मुताबिक, इसे पूर्वोत्तर के उन राज्यों में भी लागू नहीं किया जाएगा, जहां इनर लाइन परमिट (आईएलपी) व्यवस्था लागू है.

आईएलपी अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर में लागू है. आईएलपी के तहत देश के अन्य हिस्सों से इन राज्यों की यात्रा करने के इच्छुक किसी व्यक्ति को राज्य सरकार से विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है. अधिकारियों ने 2019 में पारित कानून का हवाला देते हुए कहा कि छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषदों वाले आदिवासी क्षेत्रों को भी सीएए के दायरे से बाहर रखा गया है.

असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में ऐसी स्वायत्त परिषदें अस्तित्व में हैं. इनमें असम में कार्बी आंगलोंग, दिमा हसाओ और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद क्षेत्र, मेघालय में गारो हिल्स और त्रिपुरा में आदिवासी क्षेत्र शामिल हैं. सीएए में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसियों को नागरिकता देने का प्रावधान है.

सीएए पूर्व प्रभाव से प्रदान करेगा नागरिकता : अधिकारी

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम,2019 (सीएए) के तहत पात्र आवेदकों को भारतीय नागरिकता पूर्व प्रभाव से दी जाएगी जैसा कि इस कानून में उल्लेखित किया गया है. सीएए लागू करने के लिए नियमों को अधिसूचित किये जाने के एक दिन बाद, गृह मंत्रालय ने अधिनियम के तहत भारतीय नागरिकता पाने के पात्र लोगों के आवेदन करने के वास्ते एक पोर्टल शुरू किया. पोर्टल में, नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6बी के तहत नागरिकता पाने के लिए आवेदन करने के बारे में ‘अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों’ (एफएक्यू) के उत्तर दिये गए हैं.

सीएए के तहत किस तारीख से नागरिकता दी जाएगी, इस बारे में गृह मंत्रालय के पोर्टल पर कहा गया है, ”नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6बी के तहत ‘रजिस्ट्रार न्यूट्रीलाइजेशन’ द्वारा नागरिकता प्रदत्त किये गए लोग भारत में प्रवेश करने की तारीख से इस देश के नागरिक माने जाएंगे.” एफएक्यू के बारे में पूछे जाने पर गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि सीएए के तहत नागरिकता पूर्व प्रभाव से दी जाएगी जैसा कि कानून में उल्लेखित किया गया है.

अधिकारी ने कहा, ”आवेदक के भारत में प्रवेश करने की तारीख सीएए के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान करने की तारीख होगी. यह 10 साल, 15 साल, या 25 साल पहले की हो सकती है.” सीएए के तहत कवर किए गए व्यक्ति को नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6बी के तहत आवेदन करना होगा. यह आवेदन ऑनलाइन माध्यम से और मोबाइल सीएए-2019 नाम के मोबाइल एप्लिकेशन पर उपलब्ध होगा. आवेदक को नामित अधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति के माध्यम से अधिकार प्राप्त समिति को ऑनलाइन आवेदन करना होगा.

सीएए नागरिकता छीनने वाला नहीं, देने वाला कानून है : दानिश आजाद अंसारी

(उप्र) 12 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, हज एवं वक्फ राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने केंद्र द्वारा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के नियमों को अधिसूचित किये जाने के एक दिन बाद मंगलवार को कहा कि इसको लेकर संदेह नहीं होना चाहिए क्योंकि ये नागरिकता देने वाला कानून है किसी की नागरिकता छीनने वाला नहीं.

भदोही जिले के प्रभारी मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने यहां जिलाधिकारी कार्यालय में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि केंद्र की ओर से सोमवार को लागू किया गया सीएए हर तबके, यहां तक कि मुस्लिम समाज ने भी दिल खोल कर स्वागत किया है.

केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सोमवार को विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए)-2019 को लागू करने का ऐलान कर दिया ताकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आने वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान की जा सके.

सीएए के नियम जारी हो जाने के साथ ही अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार इन तीन देशों के प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देना शुरू कर देगी. अंसारी ने कहा, ” देश में सीएए कानून लागू करने में मोदी की गारंटी है कि इससे देश में एक भी मुसलमान की नागरिकता छीनने का कोई खतरा नहीं और न ही कोई संदेह होना चाहिए.” राज्­य सरकार के मंत्री ने कहा, ” आज मुस्लिम समाज ये जानता है कि उसके लिए जरूरी मुद्दे शिक्षा और रोजगार हैं, इसलिए वह बहकने वाला नहीं.”

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