नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्ला खान के अध्यक्ष रहने के दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड में कथित अनियमितताओं से संबंधित धनशोधन मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया और उन्हें जांच में शामिल होने का आदेश दिया. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने खान को मामले में 18 अप्रैल को पूर्वाह्न 11 बजे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश होने को कहा.
पीठ ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा, ”आप उन्हें तब गिरफ्तार करें यदि कोई साक्ष्य है और जब कोई साक्ष्य नहीं है तो उन्हें गिरफ्तार नहीं करें. आपको पीएमएलए की धारा 19 के तहत प्रक्रिया का पालन करना होगा. हम मानते हैं कि आप उन्हें तब तक गिरफ्तार नहीं करेंगे जब तक आप स्वयं धारा 19 के संबंध में संतुष्ट नहीं हो जाते. यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि यदि वह पेश होते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.” धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19 ईडी को उसके पास मौजूद साक्ष्य के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अनुमति देती है जो यह बताती है कि व्यक्ति ने कानून के तहत दंडनीय अपराध किया है.
पीठ ने मामले के गुणदोष के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय के 11 मार्च के फैसले में की गई कुछ टिप्पणी से असहमति जतायी और कहा कि इसका मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. पीठ ने अपने आदेश में कहा, ”हम वर्तमान वर्तमान एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) पर इस हद तक विचार करने के इच्छुक नहीं हैं कि यह याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत के लाभ से वंचित करता है. हालांकि, हम स्पष्ट करते हैं कि फैसले में पीएमएलए की धारा 50 की व्याख्या और गुणदोष पर की गई कुछ टिप्पणियों पर हमें कुछ आपत्तियां हैं.”
इसमें कहा गया है, ”हालांकि, हम स्पष्ट करते हैं कि उक्त फैसले में की गई उक्त टिप्पणियों को प्रतिवादी-ईडी द्वारा उन सबूतों और सामग्री से संबंधित गुणदोष पर निष्कर्ष के तौर पर नहीं माना जाएगा जिस पर उसने भरोसा किया है. इस मुद्दे को खुला छोड़ दिया गया है.” खान के खिलाफ धनशोधन का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी और दिल्ली पुलिस की तीन शिकायतों से जुड़ा है.
विधायक के परिसरों पर छापेमारी कर चुके ईडी ने दावा किया है कि खान ने दिल्ली वक्फ बोर्ड में कर्मचारियों की अवैध भर्ती के माध्यम से “अपराध की बड़ी रकम” नकद में अर्जित की और उसे अपने सहयोगियों के नाम पर अचल संपत्ति खरीदने में लगाया.
पीठ ने खान द्वारा ईडी के समन को नजरअंदाज करने पर भी नाराजगी व्यक्त की.
पीठ ने खान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी से कहा, ”हुआ यह है कि… बार-बार समन जारी किए गए और आप पेश नहीं हुए. यह गलत है. हम इसे कैसे माफ कर सकते हैं?” पीठ ने कहा कि ईडी ने अब ऐसे सबूत एकत्र किए हैं जो उसके पास तब नहीं थे जब खान को सीबीआई मामले में जमानत दी गई थी और उसके बाद एकत्र किए गए सबूतों से उनका सामना कराने की जरूरत है.
ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में एक और गिरफ्तारी की
प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन मामले में चनप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने गोवा विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के कोष का कथित तौर पर ”प्रबंधन” किया था. आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि सिंह को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और अगले दिन यहां की एक विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया. सूत्रों ने बताया कि अदालत ने सिंह को 18 अप्रैल तक ईडी हिरासत में भेज दिया.
ईडी द्वारा इस मामले में यह 17वीं गिरफ्तारी है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस मामले में पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं. चनप्रीत सिंह को पहले इसी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी गिरफ्तार किया था. धन शोधन का मामला सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित है. ईडी ने अदालत को सूचित किया है कि चनप्रीत सिंह ने 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान आप के प्रचार के लिए नकद भुगतान का ”प्रबंधन” किया था और उनका पार्टी के साथ ”जुड़ाव” है.