आग लगने का मामला: राजकोट गेम जोन के छह साझेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, दो गिरफ्तार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 26 May 2024 09:28 PM
आग लगने का मामला: राजकोट गेम जोन के छह साझेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, दो गिरफ्तार
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राजकोट. गुजरात के राजकोट शहर में ‘गेम जोन’ में आग लगने से 27 लोगों की मौत के बाद पुलिस ने इसका संचालन करने वाले एक व्यक्ति और एक प्रबंधक को गैर इरादतन हत्या के आरोप में रविवार को गिरफ्तार कर लिया. जांच में सामने आया है कि ‘गेम जोन’ के पास अग्नि संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी नहीं था.

त्रासदी के एक दिन बाद रविवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ‘गेम जोन’ में अग्नि सुरक्षा उपकरण थे लेकिन आग पर काबू पाने के लिए की गई कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी, जिससे शनिवार को त्रासदी हुई. गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘गेम जोन’ में आग लगने की घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे प्रथम दृष्टया ”मानव निर्मित आपदा” बताया है. पीठ ने कहा कि ‘गेम जोन’ में पेट्रोल, फाइबर और फाइबरग्लास शीट जैसी अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री को रखा गया था.

राजकोट के पुलिस उपायुक्त (अपराध) पार्थराजसिंह गोहिल ने कहा कि टीआरपी गेम जोन का संचालन करने वाली रेसवे एंटरप्राइज के एक साझेदार युवराज सिंह सोलंकी और इसके प्रबंधक नितिन जैन को गिरफ्तार किया जा चुका है. प्राथमिकी के अनुसार, राजकोट तालुका पुलिस ने रविवार को जिन छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, उनमें धवल कॉर्पोरेशन के मालिक धवल ठक्कर, रेसवे एंटरप्राइज के साझेदार- अशोक सिंह जडेजा, किरीट सिंह जडेजा, प्रकाशचंद हिरन, युवराज सिंह सोलंकी और राहुल राठौड़ शामिल हैं.

राजकोट के पुलिस आयुक्त राजू भार्गव ने संवाददाताओं को बताया कि चारों फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए अपराध शाखा की चार अलग-अलग टीम गठित की गई हैं. भार्गव ने कहा कि स्थानीय पुलिस ने नवंबर 2023 में ‘गेम जोन’ के लिए बुकिंग लाइसेंस दिया था, जिसे एक जनवरी से 31 दिसंबर 2024 तक की अवधि के लिए नवीनीकृत किया गया था.

अधिकारी ने कहा, ”गेम जोन को सड़क और भवन विभाग से अनुमति मिल गई थी. इसने अग्निशमन संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए अग्नि सुरक्षा उपकरण का प्रमाण भी जमा किया था. इस पर काम प्रक्रिया में था और अभी तक पूरा नहीं हुआ है.” उन्होंने कहा कि ‘गेम जोन’ में अग्नि सुरक्षा उपकरण थे लेकिन आग पर काबू पाने के लिए की गई कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी, जिससे शनिवार को त्रासदी हुई.

प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी व्यक्तियों ने ‘गेम जोन’ बनाने के लिए मेटल शीट फैब्रिकेशन का उपयोग करके लगभग दो-तीन मंजिला ऊंचा, 50 मीटर चौड़ा और 60 मीटर लंबा ढांचा बना रखा था. उन्होंने कहा कि मामले की जांच अपराध शाखा और संयुक्त अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विधि चौधरी के नेतृत्व में राजकोट पुलिस की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंप दी गई है. गुजरात सरकार ने भी घटना की जांच के लिए राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुभाष त्रिवेदी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय एसआईटी का भी गठन किया है.

राजकोट के जिलाधिकारी प्रभाव जोशी ने कहा कि सभी मृतकों के डीएनए नमूने रविवार तड़के एयर एम्बुलेंस से गांधीनगर एफएसएल भेजे गए. मलबे को हटाने और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खोजी कुत्तों के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम को लगाया गया. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एसीपी) विनायक पटेल ने कहा कि घटनास्थल से 27 शव बरामद किए गए और उन्हें शहर के सिविल अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने बताया कि घटना में तीन लोग घायल हुए हैं, उनकी हालत स्थिर है.

उन्होंने कहा, ”शव बुरी तरह से जले हुए हैं. हमने शवों की शिनाख्त के लिए शवों से और मारे गए लोगों के परिजन के डीएनए के नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. मृतक संख्या बढ.ने की आशंका नहीं है.” मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने रविवार सुबह घटनास्थल और एक अस्पताल का दौरा किया जहां घायल व्यक्तियों को भर्ती कराया गया है. बाद में पटेल ने बचाव और राहत कार्य, घायलों के इलाज और स्थानीय प्रशासन द्वारा उठाए गए अन्य कदमों के संबंध में राजकोट के हीरासर हवाई अड्डे पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सिविल अस्पताल में 100 बिस्तरों की क्षमता वाला एक ‘बर्न वार्ड’ स्थापित किया गया तथा जामनगर, अहमदाबाद, मोरबी, जूनागढ. और भावनगर से चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सों को तुरंत राजकोट बुलाया गया. गुजरात के पुलिस महानिदेशक विकास सहाय ने एहतियात के तौर पर राज्य के विभिन्न शहरों में सभी ‘गेम जोन’ को बंद करने का आदेश दिया है और आग से संबंधित सुरक्षा उपायों सहित सुरक्षा उपायों का सत्यापन किया जा रहा है. गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे गेमिंग जोन और मनोरंजक सुविधाएं सक्षम अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी के बिना बनाए गए हैं.

न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव और न्यायमूर्ति देवन देसाई की पीठ ने अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट नगर निगमों के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे सोमवार को उसके समक्ष इस निर्देश के साथ उपस्थित हों कि कानून के किन प्रावधानों के तहत अधिकारियों ने इन इकाइयों को अपने अधिकार क्षेत्र में स्थापित किया या संचालित करना जारी रखा.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘गेम जोन’ में आग लगने की घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. पीएमओ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि हादसे में घायल लोगों को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे. गुजरात सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को 4-4 लाख रुपये और घायल व्यक्तियों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है.

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