क्रेडिट कार्ड धारक की मृत्यु के बाद कौन चुकाएगा बकाया कर्ज? जानिए क्या कहते हैं नियम और कानूनी अधिकार

असुरक्षित कर्ज की श्रेणी में आता है क्रेडिट कार्ड; परिजनों पर व्यक्तिगत देनदारी नहीं, जानिए 'एस्टेट' (संपत्ति) से भुगतान और राइट-ऑफ का पूरा गणित।

Author: www.navabharat.news
UPDATED: Mon, 05 Oct 2026 09:36 AM
क्रेडिट कार्ड धारक की मृत्यु के बाद कौन चुकाएगा बकाया कर्ज? जानिए क्या कहते हैं नियम और कानूनी अधिकार

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किसी परिजन की मृत्यु के बाद उनके क्रेडिट कार्ड पर बकाया कर्ज को लेकर परिवारों में अक्सर असमंजस और चिंता की स्थिति बन जाती है। बैंकिंग व कानूनी नियमों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड एक अनसिक्योर्ड (असुरक्षित) लोन होता है, जिसके लिए मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी (पति, पत्नी, बच्चे या माता-पिता) व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं होते हैं। बैंक या कार्ड जारीकर्ता कंपनियां बकाए की भरपाई केवल मृतक द्वारा छोड़ी गई संपत्ति (एस्टेट) से ही कर सकती हैं।

कर्ज निपटान प्रक्रिया और मुख्य नियम

‘एस्टेट’ (मृतक की संपत्ति) से भरपाई: मृतक व्यक्ति के नाम मौजूद बैंक बैलेंस, एफडी, म्यूचुअल फंड और अन्य चल-अचल संपत्तियों को ‘एस्टेट’ कहा जाता है। कानूनन, किसी भी असुरक्षित कर्ज का भुगतान पहले इसी एस्टेट से किया जाता है। कानूनी उत्तराधिकारियों की जिम्मेदारी केवल उन्हें मिली विरासत/संपत्ति की सीमा तक ही सीमित होती है।

 संपत्ति कम और बकाया ज्यादा होने पर (राइट-ऑफ): यदि मृतक के नाम कोई पर्याप्त संपत्ति नहीं है या बकाया कर्ज एस्टेट के मूल्य से अधिक है, तो उपलब्ध राशि का भुगतान करने के बाद बचे हुए बाकी कर्ज को बैंक द्वारा बट्टे खाते में डालकर ‘राइट-ऑफ’ (रद्द) कर दिया जाता है।

 वसीयत और गैर-वसीयती मामलों में प्रक्रिया:

  • वसीयत होने पर: वसीयत का एग्जीक्यूटर संपत्ति से सबसे पहले क्रेडिट कार्ड व अन्य कर्ज चुकाता है, जिसके बाद ही बची हुई संपत्ति वारिसों में बंटती है।
  • वसीयत न होने पर: अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक संपत्ति का प्रबंधन करता है, बकाए का निपटारा करता है और शेष हिस्से को उत्तराधिकार कानून के तहत बांटता है।

किन परिस्थितियों में परिवार पर आएगी जिम्मेदारी?

  • ज्वाइंट अकाउंट या को-एप्लीकेंट: यदि क्रेडिट कार्ड में कोई अन्य परिजन सह-आवेदक (Co-applicant) या ज्वाइंट खाताधारक था, तो बकाया चुकाने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी जीवित सह-आवेदक की होगी।
  • ऐड-ऑन कार्ड (Add-on Card): ऐड-ऑन कार्डधारक प्राइमरी कार्डधारक के खाते का ही उपयोग करते हैं, इसलिए मुख्य देनदारी प्राइमरी कार्डधारक के एस्टेट पर ही रहती है।

सलाह व बचाव

भविष्य में परिवार को वित्तीय और कानूनी उलझनों से बचाने के लिए एक स्पष्ट और अपडेटेड वसीयत (Will) तैयार रखना समझदारी भरा कदम है। साथ ही, किसी भी आकस्मिक स्थिति में बैंक को तुरंत मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ सूचित करना चाहिए ताकि पेनल्टी या अतिरिक्त ब्याज न जुड़े।

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