नयी दिल्ली/गुवाहाटी. कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन के बाद उन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इसमें मोदी ने इतनी बार राजग का नाम लिया जितनी पिछले 10 वर्ष में नहीं लिया था. मुख्य विपक्षी दल ने यह दावा भी किया कि अब ‘एनडीए’ (राजग) ‘नीतीश/नायडू डिपेंडेंट अलायंस (पर निर्भर गठबंधन)’ बन गया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का संविधान को माथे लगाना एक नाटक था क्योंकि उन्होंने पिछले 10 वर्ष में इसी संविधान पर आक्रमण किया है. नरेन्द्र मोदी को शुक्रवार को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) संसदीय दल का नेता चुन लिया गया.
इस मौके पर मोदी ने राजग को ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत के लिए प्रतिबद्ध एक स्वाभाविक गठबंधन करार दिया और कहा कि वह अपनी अगली सरकार के सभी फैसलों में सर्वसम्मति सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगले कार्यकाल में उनकी सरकार अगले 10 साल में सुशासन, विकास, जीवन की गुणवत्ता और आम नागरिकों के जीवन में न्यूनतम हस्तक्षेप पर ध्यान केंद्रित करेगी.
कांग्रेस नेता रमेश ने एक बयान में कहा, ”एक तिहाई प्रधानंत्री की दोहरेपन की कोई सीमा नहीं है. मूर्छित राजग में जान फूंकने की कोशिश कर रहे हैं, संविधान के सामने माथा टेक रहे हैं. उन्होंने संविधान पर 10 साल में आक्रमण किया, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया. 400 पार का नारा दिया गया ताकि संविधान को बदला जा सके.” उन्होंने दावा किया कि अब मोदी संविधान को माथे से लगाने का नाटक कर रहे हैं.
रमेश ने कहा, ”नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत, रजनीतिक और नैतिक हार हुई है. वह कुर्सी छोड़ना नहीं छोड़ना चाहते. वह ‘डेमोक्रेसी (लोकतंत्र)’ नहीं, ‘डेमो-कुर्सी (कुर्सी के दिखावे)’ में विश्वास रखते हैं.” इससे पहले , रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भाजपा की संसदीय दल की बैठक नहीं हुई पर राजग ने एक तिहाई प्रधानमंत्री पहले ही नियुक्त कर दिया. यह इसलिए किया गया क्योंकि नरेन्द्र मोदी को विश्वास नहीं था कि भाजपा के चुने हुए सांसद उनको अपना नेता चुनेंगे या नहीं.” उन्होंने दावा किया, ”ख.ुद बहुत कम वोटों से जीते सांसद नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत अनिश्चितता और बौखलाहट का यह सीधा प्रमाण है. उन्होंने भाजपा के सांसदों की ‘बाईपास सर्जरी’ कर दी है.” कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने जिनता 10 साल में राजग का नाम नहीं लिया, उससे ज्यादा बार डेढ़ घंटे के भाषण में ले लिया.
उन्होंने कहा, ”उनका इतना अटपटा भाषण था कि वह झेंप नहीं मिटा पा रहे थे…अब तो एनडीए ‘नीतीश/नायडू डिपेंडेंट अलायंस’ है.” खेड़ा ने दावा किया, ”पहले कहा गया कि अकेला सबसे भारी. पहले मोदी की गारंटी की बात की गई. अब एनडीए की गारंटी की बात हो रही है. लेकिन दोनों लोगों (नीतीश और चंद्रबाबू नायडू) को पता है कि इस व्यक्ति की गारंटी पर कोई भरोसा नहीं करता, वो लोग भी नहीं करते.”
प्रधानमंत्री के रूप में मोदी का भविष्य अनिश्चित है: गौरव गोगोई
लोकसभा सदस्य एवं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने शुक्रवार को यहां कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी का भविष्य अनिश्चित है क्योंकि गठबंधन सरकार चलाने के लिए बड़े दिल, खुले दिमाग और समावेशी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है. गोगोई और कांग्रेस के दो अन्य निर्वाचित सांसदों को यहां पार्टी की राज्य इकाई के मुख्यालय में सम्मानित किए जाने के अवसर पर पार्टी नेता ने संवाददाताओं से कहा, ”ये वे गुण हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी में थे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मोदी में ये गुण हैं इसलिए उनके लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने की संभावनाओं पर संदेह है.”
जोरहाट लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तपन गोगोई के खिलाफ जीत हासिल करने वाले गौरव गोगोई ने उत्तर प्रदेश के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने ”राहुल गांधी को प्रधानमंत्री से भी बड़ा दर्जा दिया.” निवर्तमान लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा, ”अगर हम उत्तर प्रदेश में रायबरेली और वाराणसी के मतों के अंतर की तुलना करें, तो गांधी ने मोदी से दोगुने से भी अधिक अंतर से जीत हासिल की है जबकि भाजपा का दावा है कि उत्तर प्रदेश में उसकी ‘डबल इंजन सरकार’ फल-फूल रही है.”
उन्होंने कहा, ”जब उत्तर प्रदेश के लोग प्रधानमंत्री से नाखुश हैं, तो इसे लेकर संदेह पैदा होता है कि गठबंधन उनके नेतृत्व से कितने समय तक संतुष्ट रहेगा.” उन्होंने कहा, ”फिलहाल मेरा सबसे बड़ी आशंका मोदी के पांच साल तक प्रधानमंत्री बने रहने को लेकर है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के लोगों ने अस्वीकृति व्यक्त की है जो रायबरेली की तुलना में वाराणसी में उनके मतदान करने के तरीके से स्पष्ट है.”