नयी दिल्ली/मुंबई. कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी को लेकर बुधवार को उन पर निशाना साधा और दावा किया कि जब आरएसएस अप्रासंगिक हो गया तो भागवत के बोलने का क्या फायदा है. पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि बीते 10 वर्षों में भागवत ने कई अहम मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी थी, लेकिन अब बोल रहे हैं.
नागपुर में गत 10 जून को डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन परिसर में संगठन के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ के समापन कार्यक्रम में आरएसएस प्रशिक्षुओं की एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आम सहमति की आवश्यकता है ताकि आम जनता के लिए काम किया जा सके. भागवत ने यह भी कहा था कि चुनाव बहुमत हासिल करने के लिए होते हैं और यह एक प्रतिस्पर्धा है, युद्ध नहीं.
खेड़ा ने एक बयान में कहा, ”मोहन भागवत् जी, जो बीज आपने बोया था, अब वह लहलहाता हुआ बबूल का वृक्ष, वृक्षासन लगा रहा है. दोष माटी का नहीं है, दोष माली का है. और वो माली आप हैं. ” उनका कहना था, ”जब किसान राजधानी के बाहर मौसम और पुलिस की मार खा रहे थे, आप चुप थे. जब हाथरस में एक दलित बच्ची का बलात्कार और हत्या कर दी गई, आप चुप थे. जब बिल्कीस बानो के बलात्कारियों की रिहाई हुई और आपके वैचारिक बंधुओं ने उनका स्वागत किया, आप चुप थे. जब दलितों के मुंह में पेशाब किया जा रहा था, आप चुप थे. जब पहलू ख.ान व अख.लाक. को मारा गया, आप चुप थे और जब कन्हैया लाल के हत्यारों का भाजपा से संबंध उजागर हुआ, आप चुप थे. ”
खेड़ा ने कहा, ”आपकी (भागवत) चुप्पी ने और नरेन्द्र मोदी ने आपको और संघ को अप्रासंगिक बना दिया है. अब बोल कर क्या फ.ायदा?” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भागवत जी, याद है वह संत कबीर का दोहा: करता रहा सो क्यों किया, अब करी क्यों पछताए. बोये पेड़ बबूल का, अमुआ कहां से पाए. पर कहते हैं न कि अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत.”
भागवत की टिप्पणी के बाद क्या प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर का दौरा करेंगे: उद्धव ठाकरे
शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बुधवार को सवाल किया कि मणिपुर की स्थिति पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी के बाद क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्वोत्तर राज्य का दौरा करेंगे ? यहां एक संवाददाता सम्मेलन में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने के प्रावधान वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद वहां जमीनी स्तर पर क्या बदलाव आया है ?
मणिपुर में पिछले साल मई से मेइती और कुकी समुदाय के बीच हिंसा जारी है. अब तक इस हिंसा में करीब 200 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि बड़े पैमाने पर हुई आगजनी की वजह से हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं और कई घर और सरकारी इमारतें जलकर खाक हो गई हैं. पिछले कुछ दिनों में मणिपुर के जिरीबाम से हिंसा की ताजा घटनाओं की खबरें आईं. आरएसएस प्रमुख भागवत ने सोमवार को मणिपुर में हिंसा के एक साल बाद भी शांति स्थापित न हो पाने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि संघर्षग्रस्त पूर्वोत्तर राज्य की स्थिति पर प्राथमिकता से विचार किया जाना चाहिए.
ठाकरे ने सवाल किया, ”मोहन भागवत ने कहा कि मणिपुर जल रहा है. उन्होंने कम से कम एक साल बाद यह बात कही है. क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री वहां नहीं जाएंगे? मणिपुर और जम्मू-कश्मीर की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर नरेन्द्र मोदी इसे नहीं संभाल सकते तो उन्हें तीसरी बार प्रधानमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. ठाकरे ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर उबल रहा है. उन्होंने सवाल किया, ”लोगों की जानें जा रही हैं. जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों के लिए कौन जिम्मेदार है?” शिवसेना (यूबीटी) के नेता ने कहा, ”मुझे देश के भविष्य की चिंता है न कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के भविष्य की.”