कटरा/इस्लामाबाद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने सात दशकों तक भारत का पानी सीमा पार बहने दिया और संसाधन के उपयोग के लिए बांध बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. माता वैष्णो देवी के नाम से नवनिर्मित विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के समर्थन में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार क्षेत्र की पूर्ण पर्यटन क्षमता का दोहन करने के लिए सड़क संपर्क में लगातार सुधार कर रही है.
उन्होंने कहा, ”नेकां और कांग्रेस संचालित सरकारों ने हमारे पानी को सीमा पार बहने दिया. उन्होंने कभी भी यहां एक बड़ा बांध बनाने की हिम्मत नहीं की. शाहपुर कंडी बांध परियोजना वर्षों तक अधर में रही और परिणामस्वरूप, जम्मू में हजारों हेक्टेयर भूमि बंजर हो गई.” मोदी ने कहा कि अगर केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं बनती तो कठुआ और सांबा जिलों के संकटग्रस्त किसानों को शाहपुर कंडी बांध से नया जीवन नहीं मिलता.
प्रधानमंत्री ने कहा, ”चार पनबिजली परियोजनाओं – पाकल दुल, किरू, रतले और क्वार पर काम तेजी से चल रहा है. इससे न केवल बिजली की उपलब्धता में सुधार होगा, बल्कि युवाओं को रोजगार भी मिलेगा.” उन्होंने नेकां और कांग्रेस पर रियासी तथा उधमपुर जिलों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चिनाब नदी पर एक रेलवे पुल अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रस्तावित किया गया था, लेकिन दोनों दलों ने फाइल को दबाए रखा.
मोदी ने नदी तल से 359 मीटर ऊपर (पेरिस के एफिल टॉवर 35 मीटर ऊंचा) स्थित 1.3 किलोमीटर लंबे चिनाब रेल पुल का जिक्र करते हुए कहा, ”आपने काम मोदी तथा भाजपा को सौंप दिया और हमने न केवल इसे पूरा किया, बल्कि इसे लोगों के लिए आकर्षण बनाया.” यह पुल कटरा से बनिहाल तक 111 किलोमीटर की दूरी में एक महत्वपूर्ण सम्पर्क है, जो जारी प्रतिष्ठित उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना का हिस्सा है. उन्होंने कहा, ”एफिल टॉवर से भी ऊंचे इस पुल ने इस क्षेत्र को वैश्विक केंद्र में ला दिया है.” मोदी ने कहा कि सरकार ने परियोजना शुरू होने के तुरंत बाद कटरा के लिए वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी दे दी.
प्रधानमंत्री ने कहा, ”आज, ऐसी दो ट्रेन दिल्ली और कटरा के बीच चल रही हैं. कटरा और रियासी रेलवे स्टेशनों की हालत खराब थी, लेकिन दोनों को नयी सुविधाओं के साथ आधुनिक बनाया गया है.” यह रेखांकित करते हुए कि पिछले साल दो करोड़ पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और इसके अलावा 95 लाख तीर्थयात्रियों ने वैष्णो देवी मंदिर में दर्शन किए, मोदी ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सड़क और रेल संपर्क में सुधार किया गया है.
मोदी ने कहा, ”पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के आगमन से छोटे व्यापारियों, फल विक्रेताओं और किसानों को लाभ हुआ. हम देविका और तवी रिवरफ्रंट जैसी विभिन्न परियोजनाओं के पूरा होने के साथ क्षेत्र में पर्यटन को और बढ़ावा देंगे.” उन्होंने सबसे कम उम्र के भारतीय पैरालंपिक पदक विजेताओं – शीतल और राकेश का भी उल्लेख किया और कहा कि कटरा ने उनकी सफलता की कहानी में एक बड़ी भूमिका निभाई है.
प्रधानमंत्री ने कहा, ”उन्होंने माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद से यहां प्रशिक्षण के बाद देश को गौरवान्वित किया. यहां बहुत सारे अवसर उपलब्ध हैं और यह मोदी का वादा है कि उनका पूरा उपयोग किया जाएगा.” उन्होंने दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन सड़कों तथा रेलवे सुरंगों के बारे में भी बात की और कहा कि एक बार ये परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, तो कनेक्टिविटी में और सुधार होगा, जिससे समाज के सभी वर्गों, विशेषकर किसानों और बागबानों को लाभ होगा. अपनी पार्टी के लिए लोगों से समर्थन मांगते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विकास की नयी ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा.
पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि के प्रावधानों का सम्मान करने का आग्रह किया
भारत द्वारा सिंधु जल संधि की समीक्षा के लिए पाकिस्तान को औपचारिक नोटिस दिए जाने के कुछ दिनों बाद, इस्लामाबाद ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह इस समझौते को ह्लमहत्वपूर्णह्व मानता है और उम्मीद करता है कि नयी दिल्ली भी 64 साल पहले हस्ताक्षरित इस द्विपक्षीय समझौते के प्रावधानों का पालन करेगा.
नयी दिल्ली में बुधवार को सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत ने 30 अगस्त को पाकिस्तान को एक औपचारिक नोटिस भेजकर 64 साल पुराने समझौते की समीक्षा की मांग की थी, जिसमें उसने परिस्थितियों में ह्लमौलिक और अप्रत्याशितह्व बदलावों और सीमा पार से लगातार जारी आतंकवाद के प्रभाव का हवाला दिया था. भारत और पाकिस्तान ने नौ वर्षों की वार्ता के बाद 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि (आईडब्लूटी) पर हस्ताक्षर किये थे, जिसका एकमात्र उद्देश्य सीमा पार की छह नदियों का प्रबंधन करना था. सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच प्रमुख समझौतों में से एक है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है और दोनों पड़ोसियों के बीच युद्धों और तनावों के बावजूद इसका पालन किया गया है.
भारत के नोटिस पर एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने यहां संवाददाताओं से कहा, ह्लपाकिस्तान सिंधु जल संधि को महत्वपूर्ण मानता है और उम्मीद करता है कि भारत भी इसके प्रावधानों का पालन करेगा.ह्व बलूच ने बताया कि दोनों देशों के बीच सिंधु जल आयुक्तों का एक तंत्र है और संधि से जुड़े सभी मुद्दों पर इसमें चर्चा की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि संधि से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए कोई भी कदम समझौते के प्रावधानों के तहत ही उठाया जाना चाहिए.
पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों, चिनाब, झेलम और सिंधु से सम्पूर्ण जल प्राप्त होता है, जबकि भारत का सतलुज, व्यास और रावी नदियों पर पूर्ण अधिकार है.
संधि के प्रावधानों के अनुसार, 207.2 अरब घन मीटर की कुल आपूर्ति में से, तीन आवंटित नदियों से भारत का हिस्सा 40.7 अरब घन मीटर या लगभग 20 प्रतिशत है, जबकि पाकिस्तान को 80 प्रतिशत मिलता है. नयी दिल्ली में सूत्रों के मुताबिक, भारत द्वारा व्यक्त की गयी विभिन्न चिंताओं में से महत्वपूर्ण हैं जनसंख्या में परिवर्तन, पर्यावरणीय मुद्दे तथा भारत के उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता. भारत ने अपनी सीमा पर कई जलविद्युत परियोजनाओं की योजना बनाई है.
भारत ने समीक्षा की मांग के पीछे एक कारण सीमापार से लगातार जारी आतंकवाद का प्रभाव भी बताया है. डेढ़ साल में यह दूसरी बार है जब भारत ने सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है. पिछले वर्ष जनवरी में भारत ने पाकिस्तान को पहला नोटिस जारी कर संधि की समीक्षा और संशोधन की मांग की थी, क्योंकि इस्लामाबाद कुछ विवादों को निपटाने में ह्लअड़ियल रवैयाह्व अपना रहा था.
भारत ने पिछला नोटिस इसलिए जारी किया था क्योंकि वह मध्यस्थता न्यायालय की नियुक्ति से विशेष रूप से निराश था. विश्व बैंक द्वारा जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जल विद्युत परियोजनाओं पर मतभेदों को सुलझाने के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थता न्यायालय के अध्यक्ष की नियुक्ति की घोषणा के कुछ महीने बाद नयी दिल्ली ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है. भारत ने पिछला नोटिस इसलिए जारी किया था क्योंकि वह मध्यस्थता न्यायालय की नियुक्ति से विशेष रूप से निराश था. सिंधु नदी को पाकिस्तान की जीवन रेखा माना जाता है, क्योंकि उत्तर से दक्षिण तक, जहां यह अरब सागर से मिलती है, लगभग 90 प्रतिशत जल सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश कार्यालय के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि पाकिस्तान उस समझौते में संशोधन में रुचि नहीं रखता है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच जल बंटवारे के जटिल मुद्दे का समाधान किया गया था.