बांग्लादेश के न्यायाधिकरण ने हसीना के ‘घृणास्पद भाषणों’ के प्रसार पर प्रतिबंध लगाया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 05 Dec 2024 08:46 PM
बांग्लादेश के न्यायाधिकरण ने हसीना के ‘घृणास्पद भाषणों’ के प्रसार पर प्रतिबंध लगाया
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ढाका. बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को मीडिया एवं सोशल नेटर्विकंग प्लेटफॉर्म पर अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के सभी ”घृणास्पद भाषणों” के प्रसार पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया. यह आदेश हसीना के हालिया भाषण के बाद आया है, जो चार महीने पहले बांग्लादेश से जाने के बाद उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था. इसमें उन्होंने देश के अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस पर तीखा हमला करते हुए उन पर ‘नरसंहार’ करने और हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था.

बांग्लादेश संवाद संस्था (बीएसएस) ने बताया कि न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजूमदार के नेतृत्व में दो सदस्यीय न्यायाधिकरण ने आदेश पारित किया और अधिकारियों को सोशल मीडिया से हसीना के सभी ‘घृणास्पद भाषणों’ को हटाने तथा भविष्य में सभी प्रकार के मीडिया में उनके प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया.

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अब्दुल्ला अल नोमान ने समाचार एजेंसी को बताया कि न्यायाधिकरण ने आईसीटी प्रभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा बांग्लादेश दूरसंचार विनियामक आयोग (बीटीआरसी) के सचिवों से आदेश को क्रियान्वित करने के लिए कहा है.
अभियोजन पक्ष ने पहले याचिका दायर की थी, जिसमें अपदस्थ प्रधानमंत्री के ऐसे सभी प्रकार के घृणास्पद एवं भड़काऊ भाषणों को हटाने एवं प्रतिबंधित करने का अनुरोध किया गया था जो गवाहों या पीड़ितों को डरा सकते हैं या जांच में बाधा डाल सकते हैं.

इससे पहले अभियोजक गाजी एम एच तमीम ने इस संबंध में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि केवल बांग्लादेश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के हर कानून तथा हर देश में घृणास्पद भाषण देना एक अपराध है. तमीम ने कहा, ”शेख हसीना ने भाषण दिए हैं, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि उन्हें 227 लोगों को मारने का लाइसेंस मिला है, क्योंकि उनके खिलाफ इतने ही मामले दर्ज किए गए हैं. उन्हें इन भाषणों के माध्यम से अपने खिलाफ मामलों के पीड़ितों तथा गवाहों को धमकी देते हुए भी सुना गया.”

न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में अपने समर्थकों को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए हसीना ने यह भी दावा किया कि उन्हें और उनकी बहन शेख रेहाना को मारने की योजना बनाई जा रही है, ठीक उसी तरह जैसे 1975 में उनके पिता शेख मुजीब उर रहमान की हत्या की गई थी.

यूनुस को ”सत्ता का भूखा” बताते हुए फिलहाल भारत में रह रही हसीना ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में पूजा स्थलों पर हमले हो रहे हैं और मौजूदा सरकार इस स्थिति से निपटने में पूरी तरह विफल रही है. हसीना रविवार को 16 दिसंबर को मनाए जाने वाले “बिजॉय डिबोस” या विजय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपनी अवामी लीग पार्टी के समर्थकों को संबोधित कर रही थीं. बांग्लादेश में घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने बताया कि हसीना ने पिछले कुछ महीनों में कई बयान दिए हैं, लेकिन शरण लेने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था.

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