महाकुंभ ग्लैमर और पांच सितारा संस्कृति का अड्डा नहीं, आस्था का संगम है: महंत धर्मेंद्र दास

महाकुंभ नगर. प्रयागराज के महाकुंभ-2025 में चमक-दमक की दुनिया से जुड़े लोगों की चर्चा संतों के एक वर्ग को पसंद नहीं आयी और इस वर्ग का मानना है कि इसकी वजह से अध्­यात्­म और सनातन के इस महापर्व से ध्­यान भटकता है. श्री उदासीन अखाड़ा बंधुआ कला छावनी के प्रमुख और अखिल भारतीय उदासीन संप्रदाय संगत के सभापति श्री महंत धर्मेंद्र दास इन साधुओं में से एक हैं.

प्रयागराज महाकुंभ में त्रिवेणी रोड मेला स्थल के सेक्टर-20 में स्थित अपनी छावनी (शिविर) में धर्मेन्­द्र दास ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा ” ”अगर इतने साधु संतों की सेवा को छोड़कर मीडिया ऐसे लोगों का प्रचार करे तो दोष तो मीडिया का है. मीडिया घराने ऐसा क्यों कर रहे हैं, इस पर आप लोगों को ही चिंतन करना चाहिए.” दास ने महाकुंभ के दौरान मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया, माला बेचने वाली मोनालिसा और अन्य व्यक्तियों की चर्चा के बारे में पूछे जाने पर यह टिप्पणी की.

महंत ने कहा, ”महाकुंभ ग्लैमर और पांच सितारा संस्कृति का अड्डा नहीं, यह संतों, श्रद्धालुओं और सनातन की आस्था का संगम है.” हाल ही में पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी समेत कई लोगों को महाकुंभ में महामंडलेश्­वर बनाने और कुछ लोगों को हटाने की बात पर बिना किसी का जिक्र किए उन्होंने कहा कि “महामंडलेश्वर और मंडलेश्वर का पद अखाड़ों के संतों से परामर्श के बाद दिया जाता है. यदि कोई महान विद्वान है और उसकी सेवा सराहनीय है, तो उसे मंडलेश बनाया जाता है. मंडलेश्वर की उपाधि अस्थायी होती है और यदि कोई गलत काम करता है, तो अखाड़े को उसे वापस लेने का अधिकार है.” महंत ने मौनी अमावस्या के पर्व पर 29 जनवरी को महाकुंभ में भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत और 60 लोगों के घायल होने पर एक बार फिर दुख प्रकट किया.

दास ने यह कहा, “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी मेहनत की, व्यवस्था की निगरानी के लिए कई बार महाकुंभ का दौरा किया, लेकिन अधिकारी अति विशिष्ट व्यक्तियों की आवाजाही में अधिक व्यस्त दिखे और आम श्रद्धालुओं की देखभाल के लिए उनके पास समय नहीं था.” उन्होंने कहा, “अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को विशेष सुविधाएं देने में अधिक रुचि दिखाई और योगी आदित्यनाथ के प्रयासों पर पानी फेर दिया.” भगदड़ के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान के समय की शुरुआत का इंतजार कर रहे या सो रहे कई श्रद्धालु कुचल गए. दास से जब पूछा गया कि अगर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं होतीं, तो क्या यह त्रासदी नहीं होती.

इसपर उन्होंने कहा, ”श्रद्धालुओं की आस्था है कि वे यहां आकर रेत पर ही सोते हैं. आप विश्व की कितनी बड़ी टेंट सिटी बना लें, सारी व्यवस्था कर लें लेकिन आस्था और गंगा से प्रेम के कारण लोग मानते हैं कि वे रेत पर सोएंगे और खुले आसमान के नीचे रात बिताकर सुबह स्नान करके घर चले जाएंगे.” दास ने दावा किया, ”ऐसे श्रद्धालुओं की संख्या छोटी-मोटी नहीं बल्कि 35 प्रतिशत है. अगर महाकुंभ में 50 करोड़ लोग आ रहे हैं तो लगभग 15 से 20 करोड़ ऐसे होंगे जो रेत में रहकर गंगा स्नान करेंगे और न उन्हें आपकी व्यवस्था से मतलब है, न चमक-दमक से. वे संगम के लिए आये हैं. उनसे हमें बड़ी सीख लेना चाहिए. असली तपस्या उनकी ही है.”

भगदड़ के दोषियों की पहचान कैसे की जाए और उन पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए, इस बारे में दास ने कहा, ”उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया है और अब इस आयोग की जिम्मेदारी है कि जिसकी भी लापरवाही हो उन्हें दोषी ठहराए, यह भी जांच करें कि पीपे के पुलों को किसके आदेश से बंद किया गया जिससे संगम नोज पर भारी भीड़ जमा हो गयी.” भगदड़ के बाद भी लोगों के यहां आने के सवाल पर दास ने कहा ह्ल पहले की अपेक्षा संख्या कम जरूर हो गयी है, लेकिन श्रद्धालुओं में अपनी आस्था और परंपरा को लेकर एक अलग सी ललक होती है. एक अलग सा प्रेम होता है और एक अलग सा अनुराग भी, जिसे उमड़ने से कोई रोक नहीं सकता. यही सनातन की विशेषता है.”

सरकार पर दुनिया भर से लोगों को आमंत्रित करने लेकिन कोई व्यवस्था नहीं करने के विपक्षी दलों के आरोपों पर उन्होंने कहा, “महाकुंभ या कुंभ में पूरी दुनिया बिना किसी आमंत्रण के प्रयागराज में स्वत? ही एकत्रित हो जाती है.” समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों ने महाकुंभ में कुप्रबंधन का दावा किया है, जिसकी ओर ध्यान दिलाने पर महंत ने कहा ह्लदरअसल, यह मेला है, यह फाइव स्­टार होटल नहीं है. कष्ट उनको नहीं है जो गंगा की रेत में समय व्यतीत कर लेते हैं और सुबह भजन करते हुए स्नान करके लौट जाते हैं, कष्ट उनको है जो फाइव स्टार सेवा चाहते हैं.ह्व दास के शिविर के एक तरफ उदासीन पंचायती अखाड़ा (बड़ा) और दूसरी तरफ उदासीन पंचायती अखाड़ा छोटा (नया) का शिविर लगा है और बीच में स्थापित उनके शिविर में एक विशाल धर्म ध्वज लहरा रहा है. बाबा सहजराम की परंपरा के गद्दीनशीन श्री महंत धर्मेंद्र दास ने इस छावनी में 10 जनवरी को यह ध्वज स्थापित किया था.

ध्वज की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ”1680 में बाबा सहजराम ने प्रयागराज कुंभ में धार्मिक ध्वज स्थापित किया था और यह परंपरा आज भी चली आ रही है.” बाबा सहजराम के बारे में उन्होंने कहा, “अपने शासन के दौरान अंग्रेजों ने आदेश दिया था कि महाकुंभ में उनके (ब्रिटिश हुकूमत) झंडे के अलावा कोई और झंडा नहीं फहराया जा सकता, तब बाबा सहजराम ने उन्हें अपने मंत्रों और तप से ध्­वज खड़ा कर दिया. तब से अंग्रेजों ने राजपत्र में ध्वज के लिए जगह तय कर दी और इसे बाबा सहजराम की छावनी के नाम पर आवंटित कर दिया. तब से, महाकुंभ में नियमित रूप से ध्­वज फहराया जाता है.” प्रयागराज में महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू हुआ और 26 फरवरी तक चलेगा.

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