पटना. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान जैसे राजग सहयोगियों द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टियों का मुस्लिम संगठनों द्वारा ‘बहिष्कार’ करने की घोषणा पर रविवार को असहमति जताई.
बिहार में कांग्रेस विधायक दल के नेता खान ने अपने फेसबुक पेज पर साझा किए गए एक वीडियो में किसी भी इस्लामी संस्था या राजनीतिक व्यक्ति का नाम लिए बिना अपने विचार व्यक्त किए.
कांग्रेस नेता ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए कहा, ”राजनीति और उत्सव को अलग-अलग रखा जाना चाहिए. यहां तक कि अगर किसी को मेजबान के साथ मतभेदों के कारण किसी समारोह को छोड़ना पड़ता है, तो यह निर्णय संबंधित व्यक्तियों द्वारा लिया जाना चाहिए. संगठनों की ओर से बहिष्कार का आह्वान नहीं किया जाना चाहिए.” जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख अरशद मदनी ने कहा है कि उनका संगठन विरोधस्वरूप जनता दल (यूनाइटेड) अध्यक्ष नीतीश कुमार, तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान जैसे नेताओं द्वारा आयोजित इफ्तार, ईद मिलन और ऐसे अन्य समारोहों में भाग नहीं लेगा. ये सभी दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा हैं.
मदनी ने दावा किया कि यह केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए वक्फ (संशोधन) विधेयक पर राजग नेताओं की ”चुप्पी” के खिलाफ एक ”प्रतीकात्मक विरोध” है. पटना स्थित एक अन्य मुस्लिम संगठन ‘इमारत शरिया’ ने भी घोषणा की है कि वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी इफ्तार के निमंत्रण को स्वीकार नहीं कर रहा है. संगठन ने नीतीश कुमार पर उस विधेयक का समर्थन करने का आरोप लगाया है, जो समुदाय के आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को और बदतर बना सकता है.
चिराग ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से उनकी ‘इफ्तार पार्टी’ का बहिष्कार किए जाने का विरोध किया
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष द्वारा आयोजित ‘इफ्तार’ पार्टी का जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जेयूएच) द्वारा बहिष्कार किए जाने के फैसले पर रविवार को विरोध जताया. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख अरशद मदनी ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा था कि विरोधस्वरूप जमीयत उलेमा-ए-हिंद नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान जैसे स्वयंभू धर्मनिरपेक्ष नेताओं द्वारा आयोजित इफ्तार, ईद मिलन और ऐसे अन्य समारोहों में भाग नहीं लेगा.
मदनी ने इन नेताओं पर मुसलमानों के खिलाफ अत्याचारों पर चुप रहने का आरोप लगाया और साथ ही कहा कि ”वक्फ विधेयक पर उनके अस्पष्ट रुख से उनका कपट स्पष्ट हो गया है.” सोमवार को अपनी पार्टी द्वारा आयोजित किए जा रहे ‘इफ्तार’ की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे पासवान ने संवाददाताओं से कहा, “मैं मदनी साहब का बहुत सम्मान करता हूं. मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं. लेकिन, मैं उनसे आग्रह करूंगा कि वे इस बात पर थोड़ा विचार करें कि क्या राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे हमारे विरोधी जो खुद को मुसलमानों का पैरोकार मानते हैं, क्या अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा करने में सफल हुए हैं?”