रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों के लिए आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के टेंडर में दो सरकारी कंपनियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। शिकायत के अनुसार, कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) की आठ दवाओं का तीन साल उत्पादन नहीं होने का उल्लेख है, जबकि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की ओर से पेश कुछ दवाओं के नाम और निर्धारित मानकों पर सवाल उठे हैं।
अधिवक्ता नीलम सिंह यादव ने इसे पात्रता जांच में गंभीर चूक बताते हुए सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने दोनों कंपनियों की दो-दो लाख रुपये की धरोहर राशि जब्त करने, उन्हें तीन से पांच साल तक सरकारी खरीदी से बाहर रखने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। संबंधित निविदा 22 जून 2026 को जारी हुई थी, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।
आठ दवाओं का तीन साल उत्पादन नहीं
शिकायत में कहा गया है कि केएपीएल के उत्पादन विवरण में आठ दवाओं के सामने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में धारवाड़ इकाई में उत्पादन नहीं होने का उल्लेख है। इनमें ये दवाएं शामिल हैं:
- लवण भास्कर चूर्ण
- हरीतकी चूर्ण
- सितोपलादि चूर्ण
- अविपत्तिकर चूर्ण
- त्रयोदशांग गुग्गुल
- रास्नादि गुग्गुल
- सप्तामृत लौह
- बृहत् चतुर्भद्र चूर्ण
सवाल उठाया गया है कि जब इन दवाओं का उत्पादन ही नहीं हुआ, तो तीन साल के उत्पादन और बाजार अनुभव की शर्त कैसे पूरी हुई। इसकी पुष्टि मूल दस्तावेजों से होनी है।
उत्पाद अनुमति के दस्तावेज पर भी सवाल
अधिवक्ता का आरोप है कि केएपीएल ने निविदा में उत्पाद अनुमति की जरूरी सूची अपलोड नहीं की थी। शिकायत में इस पर जांच के दौरान आपत्ति आने का उल्लेख भी है। कंपनी के तत्कालीन प्रबंध संचालक से जुड़े सीबीआई प्रकरण का हवाला देकर सदाचार घोषणा की जांच की मांग की गई है। पत्र में एफआईआर क्रमांक RC0082026A0012, दिनांक 15 जुलाई 2026 का उल्लेख है।
एचएलएल की दवाओं के नाम और मानकों में अंतर का आरोप
एचएलएल की बोली में 10 आयुर्वेदिक दवाओं को लेकर आपत्ति जताई गई है। शिकायत के अनुसार, वासारिष्ट के स्थान पर वासाकासव और आमलकी चूर्ण के बदले सूखा फल प्रस्तुत करने जैसे अंतर सामने आए। बाजार अनुभव के सत्यापन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर से जुड़े सीबीआई प्रकरण का उल्लेख करते हुए 27.66 लाख रुपये के भुगतान और 17 मामलों में बिलों में कथित बदलाव कर दोहरा भुगतान लेने के आरोपों का जिक्र है। एम्स भोपाल में कैंसर की एक दवा 400 रुपये के बजाय 2,100 रुपये में देने और आपात खरीदी 15 लाख से बढ़ाकर 60 करोड़ रुपये करने के दावे भी किए गए हैं।
15 दिन में कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता ने सीजीएमएससी के अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की भी मांग की है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि 15 दिन के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं होने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी और केंद्रीय सतर्कता आयोग, लोकायुक्त तथा प्रवर्तन निदेशालय में शिकायत की जाएगी।