धर्म आधारित आरक्षण संविधान का उल्लंघन है : आरएसएस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 23 Mar 2025 08:09 PM
धर्म आधारित आरक्षण संविधान का उल्लंघन है : आरएसएस
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बेंगलुरु. सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण देने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को कहा कि संविधान धर्म आधारित कोटे की इजाजत नहीं देता. उन्होंने कहा कि इस तरह का आरक्षण बी आर आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान के खिलाफ है.

आरएसएस की सर्वोच्च निर्णायक संस्था ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ की तीन दिवसीय बैठक के समापन के अवसर पर यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए होसबाले ने कहा, ”बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान में धर्म आधारित आरक्षण को स्वीकार नहीं किया गया है. ऐसा करने वाला कोई भी व्यक्ति हमारे संविधान निर्माता के खिलाफ जा रहा है.” उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में अविभाजित आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की ओर से किए गए मुसलमानों के लिए धर्म-आधारित आरक्षण लागू करने के प्रयासों को उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था. होसबाले ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों ने ऐसे आरक्षण के प्रावधानों को खारिज किया है.

महाराष्ट्र में स्थित मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को लेकर उठे विवाद के बारे में पूछे गए सवाल पर संघ नेता ने कहा कि औरंगजेब का महिमामंडन किया गया, उसके भाई दारा शिकोह का नहीं जो कि सामाजिक सद्भाव में विश्वास करने वाला व्यक्ति था. होसबाले ने कहा कि भारत के मूल्यों के खिलाफ जाने वाले लोगों को आदर्श बनाया गया. उन्होंने मुगल बादशाह अकबर का विरोध करने के लिए राजपूत राजा महाराणा प्रताप जैसी शख्सियतों की सराहना की और कहा कि जिन्होंने आक्रमणकारियों का प्रतिरोध किया, वे भी ‘स्वतंत्रता सेनानी’ थे.

आरएसएस नेता ने दावा किया कि ”आक्रमणकारी मानसिकता” वाले लोग भारत के लिए खतरा पैदा करते हैं. उन्होंने कहा, ”हमें उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए जो भारतीय मूल्यों का समर्थन करते हैं.” यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसएस का मानना ??है कि उसे कुछ मामलों पर केंद्र को अपने विचार बताने चाहिए, होसबाले ने कहा कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है.

आरएसएस के सरकार्यवाह ने कहा, ”संघ सरकार को दिन-प्रतिदिन किए जाने वाले कामों के बारे में नहीं बताता है, लेकिन जब भी लोग कुछ मुद्दे उठाते हैं, तो विभिन्न संगठनों के विविध क्षेत्रों में काम करने वाले आरएसएस कार्यकर्ता अपना संदेश पहुंचाते हैं. हमारे पास एक तंत्र है जहां ऐसी चीजों पर चर्चा की जाती है.” यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसएस अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को अपनी उपलब्धि मानता है, उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल संघ की ही उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे हिंदू समाज की उपलब्धि है.

जातिवाद के उन्मूलन के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि संघ शाखाएं इस मुद्दे को सुलझाने के लिए आदर्श मंच हैं और उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि संघ के स्वयंसेवकों के बीच कई अंतरजातीय विवाह हुए हैं. भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बारे में पूछे गए सवाल पर आरएसएस नेता ने कहा कि संघ पार्टी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता है.

आरएसएस ने ‘सौहार्दपूर्ण, संगठित हिंदू समाज’ के निर्माण का संकल्प लिया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने रविवार को अपनी सर्वोच्च निर्णायक संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में विश्व शांति और समृद्धि के लिए ”सौहार्दपूर्ण और संगठित हिंदू समाज” के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया. रविवार को संपन्न हुई तीन दिवसीय बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा, भाजपा महासचिव बी एल संतोष और आरएसएस से संबद्ध 32 संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया. आरएसएस ने अपने प्रस्ताव में कहा कि भारत एक प्राचीन संस्कृति है, जिसकी समृद्ध परंपराएं हैं और इसमें सामंजस्यपूर्ण विश्व बनाने के लिए भरपूर ज्ञान है.

आरएसएस ने कहा, ”हमारा विचार संपूर्ण मानवता को विभाजनकारी और आत्म-विनाशकारी प्रवृत्तियों से बचाता है तथा सभी प्राणियों के बीच शांति और एकता की भावना सुनिश्चित करता है.” प्रस्ताव में कहा गया कि हिंदू समाज अपने वैश्विक उत्तरदायित्व को केवल धर्म पर आधारित आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित एवं सामूहिक जीवन के आधार पर ही प्रभावी ढंग से पूरा कर सकेगा.

इसमें कहा गया है, ”इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम सभी प्रकार के भेदभावों को खारिज करते हुए सामंजस्यपूर्ण प्रथाओं का पालन करते हुए एक आदर्श समाज का निर्माण करने का संकल्प लें, पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली पर आधारित मूल्य आधारित परिवार और आत्मसम्मान से परिपूर्ण नागरिक कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता रखें.” प्रस्ताव में कहा गया है, ”यह संकल्प हमें एक मजबूत राष्ट्रीय जीवन का निर्माण करने, भौतिक रूप से समृद्ध और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण होने, चुनौतियों को कम करने और समाज की सभी समस्याओं को हल करने में सक्षम बनाएगा.” इसमें कहा गया है, ”अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा सभी स्वयंसेवकों से आह्वान करती है कि वे सज्जन शक्ति के नेतृत्व में पूरे समाज को एक साथ लेकर विश्व के समक्ष सामंजस्यपूर्ण और संगठित भारत का आदर्श प्रस्तुत करने के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध करें.” संघ ने उल्लाल की रानी अबक्का को उनकी 500वीं जयंती पर श्रद्धांजलि भी दी. रानी ने पुर्तगाली आक्रमण के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी.

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