माले/सिंगापुर. भारतीय उच्चायुक्त जी बालासुब्रमण्यम ने कहा है कि भारत और मालदीव के बीच संबंध बहुत पुराना है जो आपसी विश्वास और भरोसे पर आधारित है. साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जतायी कि दोनों देशों के संबंध और मजबूत होते रहेंगे. बालासुब्रमण्यम ने पीएसएम न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में द्विपक्षीय संबंधों को “मजबूत और स्थायी साझेदारी” के रूप में र्विणत किया और दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक सहयोग की ताकत को रेखांकित किया.
मालदीव के विकास में भारत के योगदान की बात करते हुए, उन्होंने ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को सुदृढ. करना है. उन्होंने कहा, ”इस परियोजना के तहत थिलामाले ब्रिज, जो माले को थिलाफुशी से जोड़ेगा, एक प्रमुख पहल के रूप में सामने आता है.” साथ ही उन्होंने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से आर्थिक विकास को आगे बढ.ाने में भारत की भूमिका की पुष्टि की.
उन्होंने पिछले वर्ष मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा को याद किया और कहा कि उनकी ऐतिहासिक यात्रा ने घनिष्ठ द्विपक्षीय सहयोग के लिए आधार तैयार किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुइज्जू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हस्ताक्षरित “दृष्टि दस्तावेजों” को क्रियान्वयन योग्य नीतियों में परिर्वितत करने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं.
उन्होंने कहा, ”ये समझौते रणनीतिक संबंधों को गहरा करने और संयुक्त पहल को आगे बढ.ाने के लिए तैयार किए गए हैं.” नवंबर 2023 में चीन समर्थक झुकाव के लिए जाने जाने वाले मुइज्जू के शीर्ष पद का कार्यभार संभालने के बाद भारत और मालदीव के बीच संबंधों में गंभीर तनाव आ गया. शपथ लेने के कुछ ही घंटे के भीतर ही उन्होंने भारतीय सैन्यर्किमयों को मालदीव से वापस बुलाने की मांग कर दी थी. इसके बाद, भारतीय सैन्यर्किमयों की जगह आम नागरिकों को तैनात कर दिया गया.
मुइज्जू ने पिछले वर्ष अक्टूबर में दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बढ.ावा देने का संकल्प जताया, जिसके बाद संबंधों में मधुरता आयी थी. बालासुब्रमण्यम ने विश्वास जताया कि मालदीव-भारत संबंध मजबूत होते रहेंगे तथा कूटनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सहयोग बढ.ेगा.
सिंगापुर आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है : मंत्री सिम एन
सिंगापुर की एक वरिष्ठ मंत्री ने मंगलवार को भारत के एक सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल से कहा कि उनका देश सभी प्रकार के आतंकी कृत्यों की कड़ी निंदा करता है और इस खतरे के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है. जनता दल (यूनाइटेड) के राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल दक्षिण कोरिया से यहां पहुंचा और सिंगापुर की विदेश एवं गृह राज्य मंत्री सिम एन से मुलाकात की.
प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें पहलगाम आतंकी हमले के बाद की घटनाओं, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति से अवगत कराया. सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग के एक बयान के अनुसार, सिम ने कहा कि सिंगापुर सभी प्रकार के आतंकी कृत्यों की कड़ी निंदा करता है और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है.
उन्होंने यह भी कहा कि सिंगापुर और भारत करीबी साझेदार हैं तथा वे द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के प्रयास जारी रखेंगे.
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अगर भारत पर कोई आतंकवादी हमला होता है तो देश उसका माकूल जवाब देगा. इसने कहा, ”भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेलिंग को बर्दाश्त नहीं करेगा. परमाणु ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक हमला करेगा. भारत आतंकवाद को प्रायोजित करने वाली सरकार और आतंकी आकाओं के बीच कोई अंतर नहीं करेगा.” भारतीय मिशन ने बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सिंगापुर से समर्थन करने का अनुरोध किया, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर.
एफएटीएफ, वैश्विक धन शोधन और आतंकवाद को वित्तपोषण पर नजर रखने वाली संस्था है. बयान के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने इस बात से अवगत कराया कि पहलगाम में आतंकवादी हमला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और सामान्य स्थिति को बाधित करने का एक प्रयास था.
इसमें कहा गया है कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत सरकार ने इसे अंजाम देने वालों और साजिश रचने वालों को न्याय के कठघरे में लाए जाने की आवश्यकता समझी. इस हमले के जवाब में भारत ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया. भारत की प्रतिक्रिया नपी-तुली और जिम्मेदाराना थी. प्रतिनिधिमंडल ने कानून मंत्री एडविन टोंग से भी मुलाकात की.