पाकिस्तानी जनरल खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आतंकवादियों का इस्तेमाल करते हैं: रविशंकर प्रसाद

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 10 Jun 2025 09:12 PM
पाकिस्तानी जनरल खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आतंकवादियों का इस्तेमाल करते हैं: रविशंकर प्रसाद
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा रुख जाहिर करने के लिए छह यूरोपीय देशों की यात्रा करने वाले बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल ने विदेशी वार्ताकारों को बताया कि पाकिस्तान में सेना और आतंकवाद के बीच साठगांठ नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच शांति स्थापना में मुख्य बाधा है.

रविशंकर ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सांसदों, मंत्रियों और थिंक टैंक के सदस्यों सहित विदेशी वार्ताकारों के साथ उनकी बैठकों के दौरान 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले को लेकर भारत के रुख और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की गई.
छह यूरोपीय देशों की यात्रा करने वाले नौ सदस्यीय बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रविशंकर ने किया था. यह प्रतिनिधिमंडल 25 मई से सात जून तक फ्रांस, इटली, डेनमार्क, ब्रिटेन, बेल्जियम और जर्मनी की यात्रा पर था.

रविशंकर ने कहा, “हमने (उन्हें) स्पष्ट कर दिया है कि हम पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ नहीं हैं. समस्या पाकिस्तान के जनरल (सैन्य अधिकारियों) से है, जिनसे पाकिस्तान के लोग भी तंग आ चुके हैं.” उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूरोपीय नेताओं के साथ अपनी बैठकों के दौरान यह संदेश दिया कि दुनिया को यह समझना होगा कि पाकिस्तान “सैन्य जनरल के चंगुल में है, जिनके नापाक गतिविधियों को आतंकवादी और उनके प्रशिक्षण शिविर अंजाम देते हैं.” रविशंकर ने कहा, “पाकिस्तान में नयी व्यवस्था में वे आतंकवाद का इस्तेमाल छद्म रूप में करते हैं. पाकिस्तानी जनरल ने खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आतंकवादियों और उनके शिविरों का इस्तेमाल छद्म रूप में किया. यही कारण है कि वहां शांति नहीं स्थापित हो सकी.”

उन्होंने कहा, “हमने यह भी कहा कि भारत में हर सरकार ने, चाहे वह किसी भी पार्टी की हो, पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में (पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री) नवाज शरीफ को आमंत्रित किया था. वह उनकी नातिन की शादी में भी शामिल होने गए थे. फिर उरी और पुलवामा (आतंकवादी हमले) हुए.” रविशंकर के मुताबिक, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने विदेशी नेताओं से यह भी कहा कि पाकिस्तान न केवल इनकार करने वाला देश है, बल्कि वहां सैन्य-आतंकवादी गठजोड़ एक “घातक संयोजन” बन गया है. उन्होंने कहा, “हमने इतिहास के बारे में बात की. हमने यह भी कहा कि लगभग 55 साल तक पाकिस्तान की कमान जनरल (सेना) के हाथों में रही.”

 

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