हिंदुओं पर कथित हिंसा के विरोध में बांग्लादेश उप उच्चायोग की ओर मार्च निकाला

Author: navabharat digital
UPDATED: Tue, 23 Dec 2025 08:30 PM
हिंदुओं पर कथित हिंसा के विरोध में बांग्लादेश उप उच्चायोग की ओर मार्च निकाला
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कोलकाता/ढाका/नयी दिल्ली. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर कथित हमले के विरोध में एक हिंदूवादी संगठन के सैकड़ों समर्थकों ने मंगलवार दोपहर को यहां बांग्लादेश के उप उच्चायोग की ओर मार्च करने की कोशिश की और जब पुलिसर्किमयों ने उन्हें रोका तो उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई. कोलकाता के बेकबागन में स्थित बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय के करीब पहुंचने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया.

पुलिस के मुताबिक, कम से कम 12 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया. झड़प में कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसर्किमयों को मामूली चोटें आईं. कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”बांग्लादेश उप उच्चायोग के सामने स्थिति नियंत्रण में है. वहां अवैध रूप से इकट्ठा होने की कोशिश करने वालों को हटा दिया गया है. अब तक इलाके में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों को एहतियात के तौर पर गिरफ्तार किया गया है.” उन्होंने कहा कि विदेशी राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिसर के घेराव के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए उप उच्चायोग कार्यालय के पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है.
‘हिंदू हुंकार पदयात्रा’ शीर्षक से विरोध मार्च का आयोजन ‘बोंगियो हिंदू जागरण’ के बैनर तले किया गया. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर कथित हिंसा के खिलाफ नारे लगाते और भगवा झंडे थामे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मार्च में हिस्सा लिया.

यह मार्च सियालदह से शुरू हुआ और जब यह बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय की ओर बढ़ रहा था, तभी बेकबागन इलाके में पुलिस ने इसे रोक दिया. प्रदर्शनकारियों ने ‘हिंदू हिंदू, भाई भाई’, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा’ के नारे लगाए. एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया, ”यहां की पुलिस ऐसे बर्ताव कर रही है जैसे वह बांग्लादेश में हमारे भाइयों को पीट पीट कर मारने वालों को संरक्षण देना चाहती हो. इस साल की शुरुआत में मुर्शिदाबाद में भीड़ द्वारा हिंदुओं को पीट पीट कर मार डालने के दौरान पुलिस ने ऐसा कोई उत्साह नहीं दिखाया था.” बांग्लादेश में 18 दिसंबर को कपड़े की एक फैक्टरी में काम करने वाले 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को मैमनसिंह के बालुका में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को आग लगा दी. प्रदर्शनकारियों ने दास की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की.

बांग्लादेश ने दूतावासों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को लेकर भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया

भारत में बांग्लादेश के दूतावासों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के मद्देनजर बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को मंगलवार को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया. बांग्लादेश के विदेश सचिव असद आलम सियाम ने भारत के उच्चायुक्त को तलब किया और उस समय उप उच्चायुक्त भी मौजूद थे.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वर्मा को 20 दिसंबर 2025 को नयी दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग और आवास के परिसर के बाहर हुई “अप्रिय घटनाओं” और 22 दिसंबर को सिलीगुड़ी में स्थित वीजा केंद्र में “विभिन्न चरमपंथी तत्वों द्वारा की गई तोड़फोड़” पर ढाका की “गंभीर चिंता” से अवगत कराया गया.

बयान में कहा गया है, “बांग्लादेश ने भारत में बांग्लादेश के विभिन्न दूतावासों के परिसरों के बाहर आयोजित हिंसक प्रदर्शनों पर गहरी चिंता व्यक्त की है.” बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश राजनयिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ जानबूझकर की गई हिंसा या धमकी के ऐसे कृत्यों की निंदा करता है, ”जो न केवल दूतावास के र्किमयों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, बल्कि आपसी सम्मान के सिद्धांतों और शांति एवं सहिष्णुता के मूल्यों को भी कमजोर करते हैं.”

इसमें कहा गया है, ”बांग्लादेश सरकार ने भारत सरकार से इन घटनाओं की गहन जांच करने, इस तरह के कृत्यों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने और भारत में बांग्लादेश के दूतावासों और संबंधित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आ”ान किया है.” इसमें कहा गया है कि ढाका को उम्मीद है कि भारत सरकार दूतावास र्किमयों और प्रतिष्ठानों की गरिमा और सुरक्षा के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय और राजनयिक दायित्वों के अनुरूप तुरंत उचित कदम उठाएगी.

पिछले 10 दिनों में यह दूसरी बार है जब वर्मा को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया है. अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान उच्चायुक्त को विभिन्न घटनाओं के सिलसिले में कम से कम छह बार तलब किया जा चुका है. इससे पहले वर्मा को 14 दिसंबर को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया था. भारत के विदेश मंत्रालय ने 17 दिसंबर को ढाका में भारतीय उच्चायोग के आसपास सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए उच्चायुक्त एम रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि उस बैठक के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में इंकलाब मंच के संयोजक शरीफ उस्मान हादी पर हमला करने वाले हमलावरों को भाग कर भारत जाने से रोकने के लिए भारत से सहयोग मांगा गया था. बांग्लादेश ने अनुरोध किया कि यदि आरोपी भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने में सफल हो जाते हैं, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर बांग्लादेश प्र्त्यियपत किया जाए.

हिंदुओं पर कथित हिंसा के विरोध में बांग्लादेश उप उच्चायोग की ओर मार्च निकाला
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर कथित हमले के विरोध में एक हिंदूवादी संगठन के सैकड़ों समर्थकों ने मंगलवार दोपहर को यहां बांग्लादेश के उप उच्चायोग की ओर मार्च करने की कोशिश की और जब पुलिसर्किमयों ने उन्हें रोका तो उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई.कोलकाता के बेकबागन में स्थित बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय के करीब पहुंचने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया.

पुलिस के मुताबिक, कम से कम 12 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया. झड़प में कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसर्किमयों को मामूली चोटें आईं. कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”बांग्लादेश उप उच्चायोग के सामने स्थिति नियंत्रण में है. वहां अवैध रूप से इकट्ठा होने की कोशिश करने वालों को हटा दिया गया है. अब तक इलाके में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों को एहतियात के तौर पर गिरफ्तार किया गया है.”

उन्होंने कहा कि विदेशी राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिसर के घेराव के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए उप उच्चायोग कार्यालय के पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है. ‘हिंदू हुंकार पदयात्रा’ शीर्षक से विरोध मार्च का आयोजन ‘बोंगियो हिंदू जागरण’ के बैनर तले किया गया. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर कथित हिंसा के खिलाफ नारे लगाते और भगवा झंडे थामे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मार्च में हिस्सा लिया. यह मार्च सियालदह से शुरू हुआ और जब यह बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय की ओर बढ़ रहा था, तभी बेकबागन इलाके में पुलिस ने इसे रोक दिया. प्रदर्शनकारियों ने ‘हिंदू हिंदू, भाई भाई’, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा’ के नारे लगाए.

एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया, ”यहां की पुलिस ऐसे बर्ताव कर रही है जैसे वह बांग्लादेश में हमारे भाइयों को पीट पीट कर मारने वालों को संरक्षण देना चाहती हो. इस साल की शुरुआत में मुर्शिदाबाद में भीड़ द्वारा हिंदुओं को पीट पीट कर मार डालने के दौरान पुलिस ने ऐसा कोई उत्साह नहीं दिखाया था.”

बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन, विहिप और बजरंग दल के प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प
बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के खिलाफ भगवा झंडे लिए और नारे लगाते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के सैकड़ों समर्थकों ने मंगलवार को कड़ी सुरक्षा वाले बांग्लादेश उच्चायोग के पास अवरोधक हटा दिए, जिसके बाद उनकी पुलिस से झड़प हो गई.

जब पुलिस भीड़ को काबू करने की कोशिश कर रही थी तो उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई अवरोधक हटा दिए. पड़ोसी देश में एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के खिलाफ हिंदू संगठनों द्वारा घोषित प्रदर्शन से पहले सुबह उच्च सुरक्षा वाले इस इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई थी. इलाके में सात स्तर पर अवरोधक लगाए गए और पुलिस तथा अर्धसैनिक बल की अतिरिक्त टुकडि़यों को तैनात किया गया. इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन से पहले 15,000 पुलिसर्किमयों को तैनात किया गया.
उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को उच्चायोग से लगभग 800 मीटर दूर रोक दिया. प्रदर्शनकारियों को उच्चायोग तक पहुंचने से रोकने के लिए डीटीसी की बसों को अवरोध के तौर पर खड़ा किया गया था.

इस दौरान प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लहरा रहे थे जिन पर बांग्लादेश सरकार के खिलाफ निंदा भरे संदेश लिखे थे. इनमें से एक तख्ती पर लिखा था, ”हिंदू रक्त की एक-एक बूंद का हिसाब चाहिए.” बांग्लादेश में 18 दिसंबर को कपड़ा फैक्टरी में काम करने वाले 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को मैमनसिंह के बालुका में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को आग लगा दी.
पुलिस के मुताबिक, दास को पहले फैक्टरी के बाहर भीड़ ने पीटा और फिर एक पेड़ से लटका दिया तथा उसके शव को आग लगा दी.
इस संबंध में एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ”एक हिंदू आदमी पर बेरहमी से हमला किया गया और उसे मार डाला गया. हम अपनी सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस हत्या के पीछे जो लोग हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. हम यह भी मांग करते हैं कि बांग्लादेश पुलिस इस हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे.”

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