नई दिल्ली में मंगलवार, 13 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। संगठन की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई सदस्य शामिल हैं।
CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। संगठन इन मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहता था।
अभिजीत दिपके बोले- प्रतिरोध को खत्म नहीं कर सकते
कार्रवाई के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा, “आप प्रतिरोध को खत्म नहीं कर सकते।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए और आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया।
दिपके का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल किए।
उन्होंने विपक्षी दलों और अन्य संगठनों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दिल्ली पुलिस की ओर से मंगलवार की कार्रवाई की विस्तृत वजह और हिरासत में लिए गए सभी लोगों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
10 अक्टूबर को विमान के अंदर से हिरासत में लिए गए थे नेता
CJP के नेताओं को इससे पहले 10 अक्टूबर को भी हिरासत में लिया गया था। उस दिन पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से हिरासत में लिया गया था। वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।
इसके बाद 11 अक्टूबर को तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया।
रिहाई के बाद भी संगठन ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मांग से पीछे नहीं हटा।
प्रदर्शन की अनुमति के लिए पुलिस स्टेशन पहुंचे थे रांका और दास
12 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए 24 घंटे के भीतर तारीख और समय तय करने की मांग की थी।
CJP का कहना था कि अगर पुलिस की ओर से प्रदर्शन की तारीख तय नहीं की जाती है, तो संगठन खुद आंदोलन का एलान करेगा। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर रोड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया। पुलिस की ओर से रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान बताए गए।
CJP ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग जारी रखी। इसके बाद 13 अक्टूबर की सुबह पार्टी के नेता और कार्यकर्ता तिरंगा लेकर वहां पहुंचे, जहां उन्हें हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
SIR को लेकर क्या है CJP की मांग?
CJP और कुछ छात्र संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।
इसी के साथ संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। दूसरी ओर, मतदाता सूची में बदलाव और कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के पक्ष के आधार पर की जानी चाहिए।
जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन की कोशिश और नेताओं की हिरासत के बाद दिल्ली में राजनीतिक विरोध का मुद्दा फिर चर्चा में है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों पर आंदोलन जारी रखने का एलान किया है। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। हिरासत, प्रदर्शन की अनुमति और SIR से जुड़े आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से पुष्टि की जानी चाहिए।