कैंसर के खिलाफ जंग में बड़ी जीत: मेलेनोमा के मरीजों के लिए नई उम्मीद,तीसरे चरण के ट्रायल में वैक्सीन ने दिखाया असर

हर मरीज के ट्यूमर की आनुवंशिक जानकारी के आधार पर बनी इंटिस्मेरान वैक्सीन को इम्यूनोथेरेपी के साथ देने पर क्लिनिकल ट्रायल में कैंसर दोबारा लौटने का खतरा कम पाया गया।
Author: www.navabharat.news
UPDATED: Sat, 24 Oct 2026 03:51 PM
कैंसर के खिलाफ जंग में बड़ी जीत: मेलेनोमा के मरीजों के लिए नई उम्मीद,तीसरे चरण के ट्रायल में वैक्सीन ने दिखाया असर
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वैज्ञानिकों ने एक पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे पेश किए हैं, जो मेलेनोमा जैसे आक्रामक स्किन कैंसर के मरीजों के लिए उम्मीद बढ़ाने वाले हो सकते हैं। ट्रायल में इसे इम्यूनोथेरेपी के साथ देने पर कैंसर के दोबारा लौटने या शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने का खतरा कम पाया गया।

मेलेनोमा क्या है?

मेलेनोमा स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक प्रकारों में से एक है। यह तेजी से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है। जब कैंसर पास की लिम्फ नोड्स या फेफड़ों, लिवर और दिमाग जैसे दूर के अंगों तक फैल जाता है, तो लेख के अनुसार केवल करीब 40 प्रतिशत मरीज ही पांच साल तक जीवित रह पाते हैं।

इंटिस्मेरान वैक्सीन क्या है?

लेख के अनुसार, यह पहली ऐसी पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन है जिसने तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में सकारात्मक नतीजे दिखाए हैं। तीसरे चरण का ट्रायल किसी इलाज की प्रभावशीलता और सुरक्षा को बड़ी संख्या में मरीजों पर परखने का अहम चरण होता है।

इस वैक्सीन की खासियत यह है कि इसे हर मरीज के ट्यूमर की आनुवंशिक जानकारी के आधार पर तैयार किया जाता है। इसका मकसद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं को बेहतर पहचानना सिखाना है। अगर इलाज के बाद कैंसर कोशिकाएं बच जाती हैं और दोबारा बढ़ने लगती हैं, तो पहले से तैयार इम्यून सिस्टम उन पर हमला करने में मदद कर सकता है। यानी इसका मकसद सिर्फ़ इलाज नहीं, बल्कि कैंसर के दोबारा लौटने की आशंका कम करना भी है।

ट्रायल कैसे हुआ?

इस अध्ययन के नतीजे यूरोपियन सोसाइटी फॉर मेडिकल ऑन्कोलॉजी के कैंसर सम्मेलन में पेश किए जाने हैं। ट्रायल में कुल 1,137 मरीज शामिल थे। इन सभी का कैंसर सर्जरी के जरिए निकाल दिया गया था, लेकिन डॉक्टरों को आशंका थी कि बीमारी दोबारा लौट सकती है।

सभी मरीजों को एक साल तक पेम्ब्रोलिजुमैब नाम की इम्यूनोथेरेपी दवा दी गई। लगभग दो-तिहाई मरीजों को इसके साथ इंटिस्मेरान वैक्सीन भी दी गई, जबकि बाकी मरीजों को असली वैक्सीन की जगह प्लेसिबो दिया गया। अध्ययन के अनुसार, वैक्सीन के साथ इम्यूनोथेरेपी लेने वाले मरीजों में केवल इम्यूनोथेरेपी लेने वालों की तुलना में कैंसर के दोबारा लौटने या फैलने का खतरा कम पाया गया।

साइड इफेक्ट्स

वैक्सीन के कुछ दुष्प्रभाव भी सामने आए। लेख के मुताबिक, हर 100 मरीजों में करीब छह को इलाज से जुड़े दुष्प्रभाव हुए, जिनमें बुखार, थकान और इंजेक्शन की जगह पर प्रतिक्रिया शामिल थी।

विशेषज्ञों की राय

कैंसर रिसर्च यूके की रिसर्च डायरेक्टर डॉ. कैथरीन इलियट ने नतीजों को उत्साहजनक बताया। उनके मुताबिक हर व्यक्ति का कैंसर अलग हो सकता है, इसलिए मरीज की जरूरत के हिसाब से इलाज तैयार करने पर शोध जरूरी है।

इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च, लंदन के प्रोफेसर एलन मेल्चर ने कहा कि मेलेनोमा में ऐसी वैक्सीन आगे बढ़ती दिख रही है और किडनी, ब्लैडर और फेफड़ों के कैंसर में भी इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हालांकि अभी यह समझना बाकी है कि किस प्रकार के कैंसर और किन मरीजों में यह तरीका सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य सूचना के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं है। ट्रायल के नतीजे अभी सम्मेलन में पेश किए जाने हैं। किसी भी इलाज के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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