प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में एक अनोखा अनुभव साझा किया। यहां उन्होंने 33 साल पहले ब्रह्मलीन हो चुके आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार यानी होलोबॉट से बातचीत की
इस तकनीक के जरिए ऐसा लगा, मानो स्वामी चिन्मयानंद स्वयं प्रधानमंत्री के सामने मौजूद हों और उनसे बात कर रहे हों
इस दौरान PM मोदी ने 1993 में स्वामी जी से हुई अपनी मुलाकात को याद किया और उनसे अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए आशीर्वाद मांगा। मोदी ने उनसे सवाल किए तो गुरुदेव ने उसका उत्तर भी दिया।
.
समझें क्या है होलोबॉट तकनीक और कैसे करती है काम
चिन्मय अमृत महोत्सव में पीएम मोदी ने 33 साल पहले ब्रह्मलीन हुए स्वामी चिन्मयानंद के 3D होलोग्राफिक अवतार से बातचीत की। यह बातचीत 3D प्रोजेक्शन और जनरेटिव AI तकनीक के जरिए संभव हुई, जिसने स्वामी जी की आवाज और हाव-भाव को हूबहू रीक्रिएट किया। इस तकनीक ने 1993 की ऐतिहासिक मुलाकात को जीवंत कर यह दिखाया कि भविष्य में वर्चुअल अवतारों से संवाद कैसे संभव होगा।
दरअसल वीडियो में मंच पर दिखने वाला स्वामी चिन्मयानंद का अवतार होलोबॉट था, जो कि होलोग्राम और चैटबॉट तकनीक का मिला-जुला रूप है। आमतौर पर एक होलोग्राम में किसी शख्स या वस्तु की 3D छवि तैयार की जाती है।
इस तकनीक को पहले भी कई कॉनसर्ट्स में इस्तेमाल किया जा चुका है। इसमें हाई-एंड लेजर बीम्स, खास कैमरों और हाई-डेफिनिशन 3D प्रोजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल होता है।
इस तकनीक में रोशनी की किरणों को इस तरह से प्रोजेक्ट किया जाता है कि हवा में तैरती हुई छवि बिना किसी स्क्रीन के दिखाई दे सकती है। यह देखने में ऐसा ही लगता है कि जैसे कोई शख्स हमारे सामने खड़ा हो।
होलोग्राम को किसी इंसान की आवाज और हाव-भाव देने का काम AI से किया जाता है। इसके लिए उस शख्स के पुराने वीडियो, ऑडियो टेप, तस्वीरें और उनके लिखे गए दस्तावेजों के डेटाबेस की जरूरत पड़ती है।
इसके बाद डीप-लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से चेहरे के हावभाव, बनावट, बात करने के तरीके, बॉडी लैंगवेज और आवाज की बारीकियों को मैप करते हुए एक कॉपी बना ली जाती है।
आवाज को हूबहू कॉपी करने के लिए असल आवाज का एक डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है। इससे किसी को भी ऐसा लग सकता है कि सामने दिख रहा होलोग्राम ठीक उस व्यक्ति की तरह बात कर रहा है, जो आज इस दुनिया में है भी नहीं।
जनरेटिव AI संभालता है बातचीत का काम
एक बार शख्स का अवतार पूरी तरह तैयार होने के बाद AI का जनरेटिव भाषा मॉडल बातचीत का काम संभाल लेता है। ऐसे में जब कोई होलोग्राम से सवाल पूछता है, तो स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक सवाल को समझती है।
इसके बाद AI मॉडल स्वामी जी के जीवन के विचारों, संस्मरणों और भाषणों के डेटाबेस से संदर्भ खोजकर तुरंत सही जवाब तैयार करता है। इसी के चलते मंच पर 1993 की वडोदरा मुलाकात और ‘श्रीखंड’ का संदर्भ बिल्कुल सटीक और स्वाभाविक संवाद के तौर पर सामने आ सका।