नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि वह संसद के आगामी मानसून सत्र में मणिपुर हिंसा के मामले पर सरकार से स्पष्ट जवाब और जवाबदेही की मांग की करेगी. मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मणिपुर का दौरा करना चाहिए और खुद की अगुवाई में सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ”प्रधानमंत्री ने हम सभी को गौरवान्वित करने वाली शानदार जीत के सिलसिले में भारतीय फुटबाल टीम को बधाई देने का समय निकाल लिया. लेकिन वह मणिपुर के विषय पर लगातार चुप्पी साधे हुए हैं. मणिपुर के तीन फुटबॉल खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा हैं. और प्रधानमंत्री की चुप्पी इन सभी को आहत करती है.” लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने संवाददाताओं से कहा, ”भाजपा की राजनीति पूर्वोत्तर को अस्थिर करना है. पूर्वोत्तर दो दशक के उग्रवाद से उबरकर शांति की तरफ बढ.ा था, लेकिन अब वह खतरनाक स्थिति की तरफ जा रहा है. ”
उन्होंने दावा किया, ”पूवोत्तर भारत का वो हिस्सा है जिसका भूराजनीतिक रूप से बहुत महत्व है. लेकिन हम देख रहे हैं कि भाजपा सरकार में सीमावर्ती इलाकों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है.” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है और मणिपुर का इस्तेमाल ‘एटीएम’ की तरह कर रही है.
गोगोई ने एक सवाल के जवाब में कहा, ”संसद का मानसून सत्र आ रहा है. हम सरकार से स्पष्ट जवाब चाहेंगे. प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठक बुलाएं. वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं भागें.” कांग्रेस प्रवक्त अजय कुमार ने दावा किया, ”राहुल गांधी जी के मणिपुर दौरे से पूरा सरकारी तंत्र बौखला गया था. सरकार का षड्यंत्र था कि राहुल कुकी समुदाय के बीच चुराचांदपुर जाएं लेकिन मोइरांग में मैतेई समाज के बीच में न जाएं, ताकि माहौल बिगड़े. भाजपा ने झूठ फैलाया कि राहुल जी को रोका गया जबकि जनता उनका समर्थन कर रही थी.” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर नहीं जाएंगे. अब उनका नारा है कि न जाऊंगा और जाने दूंगा.”
कुमार ने सवाल किया, ”मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह जी कहते हैं कि मणिपुर में बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप है. अगर मणिपुर में बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप है तो देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जी मणिपुर क्यों नहीं जा रहे हैं?” मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच झड़पों में 120 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. पहली बार हिंसा तीन मई को तब भड़की जब मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में राज्य के पहाड़ी जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च आयोजित किया गया था.