एएसआई ने शुरू किया ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण, मुस्लिम पक्ष की याचिका शीर्ष अदालत में खारिज

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 04 Aug 2023 08:54 PM
एएसआई ने शुरू किया ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण, मुस्लिम पक्ष की याचिका शीर्ष अदालत में खारिज
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वाराणसी/नयी दिल्ली. इलाहाबाद उच्च न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक टीम ने कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार सुबह वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण का कार्य शुरू कर दिया. सर्वे से विरत रहे मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. वहीं, वाराणसी की जिला अदालत ने काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद में चल रहे वैज्ञानिक सर्वेक्षण को पूरा करने के लिए एएसआई को चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है.

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि एएसआई की 43 सदस्यीय टीम कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह करीब सात बजे ज्ञानवापी परिसर में दाखिल हुई और काम शुरू किया. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया.

हिंदू पक्ष के ही एक अन्य अधिवक्ता सुभाष चतुर्वेदी ने बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद में जुमे की नमाज की वजह से सर्वेक्षण का कार्य दोपहर 12 से दो बजे तक के लिए रोका गया. उन्होंने बताया कि दो बजे के बाद काम फिर शुरू किया गया. उन्होंने बताया कि आज ज्ञानवापी परिसर की मैपिंग और फोटोग्राफी की गयी है.

सर्वेक्षण कार्य के दौरान अपना कोई प्रतिनिधि नहीं भेजने वाले मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण पर रोक लगाने के लिये उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की थी लेकिन न्यायालय ने सर्वे कराने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
सर्वेक्षण यह तय करने के लिए किया जा रहा है कि क्या 17वीं शताब्दी की मस्जिद का निर्माण एक हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया है.

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एएसआई को सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की तोड़फोड की कार्रवाई से मना कर दिया. पीठ ने एएसआई और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों का संज्ञान लिया कि सर्वेक्षण के दौरान कोई खुदाई नहीं की जाएगी और न ही संरचना को कोई नुकसान पहुंचाया जाएगा.

इस बीच, वाराणसी की जिला अदालत ने शुक्रवार को काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद में चल रहे वैज्ञानिक सर्वेक्षण को पूरा करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया. जिला न्यायाधीश ए.के. विश्वेश ने एएसआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सर्वेक्षण कार्य पूरा करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया.

सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहे हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने बताया कि अब सर्वे कार्य पूरा करने की समय सीमा चार सितंबर तक बढ.ा दी गई है. पिछले आदेश के मुताबिक सर्वे चार अगस्त को पूरा करना था. यादव ने बताया कि सर्वे के दौरान मामले की वादी लक्ष्मी सिंह, सीता साहू, रेखा पाठक और मंजू व्यास तथा उनके एक-एक वकील मौके पर मौजूद रहे. मामले की एक अन्य वादी राखी सिंह उपस्थित नहीं है लेकिन उनके वकील मौजूद थे.

मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे से खुद को अलग रखा. अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने इसकी पुष्टि करते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मुस्लिम पक्ष का वकील इस सर्वे में शामिल नहीं हुए, क्योंकि मुसलमानों की तरफ से उच्चतम न्यायालय में इस सर्वे के निर्णय को पहले ही चुनौती दी गयी थी.

इससे पहले, वाराणसी की जिला अदालत के निर्णय के बाद एएसआई की टीम ने पिछली 24 जुलाई को भी ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का काम शुरू किया था लेकिन कुछ ही घंटों बाद कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इस सर्वे पर तत्काल रोक लगा दी थी और मामले को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष रखने को कहा था. उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी थी. ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा .

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