भोपाल. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को परिवारवाद की राजनीति को ”जहर” करार देते हुए कहा कि इस व्यवस्था के तहत किसी पार्टी और उसके नेतृत्व वाली सरकार पर नियंत्रण एक ही परिवार के हाथ में रहता है. शाह ने समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) पर परिवारवादी राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाया.
शाह ने कांग्रेस पर 2015 के बाद से मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में “जातिवाद का जहर फैलाने” के लिए “जाति आधारित आंदोलनों” को प्रायोजित करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने इसे 2018 में मप्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार का कारण बताया.
शाह मप्र की अपनी एक दिवसीय यात्रा के दौरान यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने वर्ष 2003 से 2023 तक मध्य प्रदेश सरकार का ‘रिपोर्ट कार्ड’ जारी किया. मप्र में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. एक सवाल का उत्तर देते हुए शाह ने कहा, ” मैं किसी नेता का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन कांग्रेस, सपा, द्रमुक, शिवसेना (यूबीटी) की परिवारवादी राजनीति का मतलब है कि पार्टी और सरकार में केवल एक ही परिवार के सदस्य आएंगे. इसे ही परिवारवादी राजनीति कहा जाता है.”
भाजपा नेताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट देने का बचाव करते हुए शाह ने कहा, “कहीं-कहीं कुछ लोगों को योग्यता के आधार पर टिकट दिए गए हैं. ऐसा कहकर परिवारवादी राजनीति के मुद्दे को कमजोर ना करें…यह जहर है. जब दल एक परिवार की जागीर बन जाएंगे तो जमीनी स्तर से आने वालों के लिए क्या जगह होगी?”
उन्होंने कहा, ” पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की कोई राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं थी. मैं पार्टी का अध्यक्ष बन गया, मेरे परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं था. भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा जी के परिवार की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है. मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी की पृष्ठभूमि क्या है?”
उन्होंने कहा, ” कांग्रेस के एजेंडे को घुमा फिराकर क्रांति खड़ी मत करिए. परिवारवाद बहुत स्पष्ट है, पार्टी और सत्ता पर नियंत्रण एक परिवार के हाथ में रहना. उसको परिवारवाद कहते हैं.” यह पूछे जाने पर कि अगर साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सत्ता बरकरार रखती है तो क्या चौहान मुख्यमंत्री बने रहेंगे. इसके जवाब में शाह ने कहा, “आप पार्टी का काम क्यों कर रहे हैं? हमारी पार्टी अपना काम करेगी. शिवराज जी मुख्यमंत्री हैं और हम चुनाव में हैं…मोदी जी और शिवराज जी के विकास कार्यों को जनता के बीच ले जाएं. अगर कांग्रेस ने कोई विकास किया है तो उसे भी उजागर करें.”
कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के मद्देनजर मध्य प्रदेश में भाजपा की संभावनाओं के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में शाह ने मणिपुर, असम और उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया, जहां पार्टी ने लगातार चुनाव जीते और मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भी जीत हासिल की.
शाह ने कहा, ”हम हार का सामना करके एक पार्टी बन गए हैं. 1950 में हमारे पास कुछ भी नहीं था, लेकिन अब पंचायत से संसद तक हमारी जीत की दर सबसे अच्छी है. यह हमारे नेता नरेन्द्र मोदी थे, जिन्होंने 30 साल के अंतराल के बाद दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.” जब उनसे कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा भाजपा पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा गया कि मध्य प्रदेश में भी नूंह (हरियाणा) की तरह दंगे भड़काए जाएंगे, तो शाह ने कहा, “उनके मन में जो है, वह उनके मुंह से निकल रहा है. एक माह बाद दिग्विजय सिंह से पूछिएगा कि दंगे क्यों नहीं हुए.”
मप्र भाजपा सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी करने से पहले अपने संबोधन में, शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के तहत 2जी, कोयला, सत्यम, आदर्श और एलआईसी हाउसिंग सहित 24 अलग-अलग घोटाले हुए और इस बारे में कांग्रेस और मप्र कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ से जवाब मांगा.
इन घोटालों में कांग्रेस नेताओं और कमलनाथ के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के सवाल के जवाब में शाह ने कहा, ”हम राजनीतिक प्रतिशोध के आधार पर कार्रवाई नहीं करते हैं. मैंने जितने भी घोटालों का जिक्र किया है, उनकी जांच की जा रही है. कांग्रेस और अन्य नेताओं के भाषणों में आपको जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की हाय तौबा देखने को मिलेगी.”
उन्होंने कहा, “लेकिन जांच अपनी गति से और नियमों के मुताबिक होती है. अगर यह सवाल कमलनाथ की ओर से पूछा जा रहा है तो उन्हें ऐसी कोई गलती नहीं करनी चाहिए. इससे जांच की गति बढ़ सकती है.” मप्र में पिछले विधानसभा चुनाव में हार की वजह के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि कांग्रेस ने जातिवाद का जहर फैलाने के लिए 2015 से मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में जाति आधारित आंदोलन शुरू किया था.
उन्होंने कहा, ”2018 का विधानसभा चुनाव जातिवाद के साये में हुआ, लेकिन भाजपा को विपक्षी दल से करीब एक लाख वोट ज्यादा मिले. इस बार लोगों ने कांग्रेस का 15 महीने का शासन (दिसंबर 2018 से मार्च 2020 तक) देखा है और तुलनात्मक विश्लेषण कर सकते हैं.” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा चाहती है कि चुनाव विकास के एजेंडे पर लड़ा जाए. चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सुविधाओं की घोषणा के बारे में एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि मुफ्त आवास और बिजली जैसी भाजपा सरकार की कल्याणकारी योजनाएं बहुत पहले शुरू की गई थीं.
भाजपा सरकार ने मध्य प्रदेश पर लगा ‘बीमारु टैग’ हटाया : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार का 2003-2023 तक का ‘रिपोर्ट कार्ड’ रविवार को जारी किया और दावा कि इन वर्षों में भाजपा सरकार ने राज्य के ऊपर से ‘बीमारू श्रेणी’ (पिछड़ेपन) का टैग सफलतापूर्वक हटा दिया है. उन्होंने कहा कि ‘बीमारू राज्य’ कांग्रेस शासन की विरासत था. शाह ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना कहा कि प्रदेश के लोगों ने 2003 में ” मिस्टर बंटाधार ” की सरकार को हटाकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया था.
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 20 वर्षों में राज्य को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की नींव रखी. शाह ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार का 20 साल का ‘रिपोर्ट कार्ड’ जारी किया. उन्होंने विपक्षी कांग्रेस से राज्य में अपने लगभग पांच दशक के शासन का रिपोर्ट कार्ड देने को भी कहा. प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं.
शाह ने यह विश्वास भी जताया कि अगले साल होने वाले आम चुनाव में भाजपा राज्य की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतेगी.
‘बीमारु’ (बीआईएमएआरयू) एक संक्षिप्त नाम है जिसका उपयोग अक्सर बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लिए किया जाता है. इन राज्यों को आर्थिक विकास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अन्य सूचकांकों के मामले में पिछड़ा हुआ माना जाता रहा है.
शाह ने कहा, “मध्य प्रदेश 1956 में अस्तित्व में आया और तब से, पांच-छह वर्षों को छोड़कर, कांग्रेस ने 2003 तक राज्य पर शासन किया, लेकिन उनके शासन के दौरान राज्य ‘बीमारू’ बना रहा.” उन्होंने कहा, ”भाजपा सरकार ने सफलतापूर्वक राज्य को ‘बीमारू टैग’ से बाहर निकाला है और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू करके इसे विकास के पथ पर आगे बढ़ाया है.”
शाह ने कहा, ह्ल गेहूं निर्यात में 45 प्रतिशत योगदान के साथ मध्य प्रदेश देश में शीर्ष पर है. प्रदेश ने पहले स्थान पर बने रहने के लिए 3.62 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड (सरकारी स्वास्थ्य योजना के) वितरित किए हैं. मप्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत विकसित ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता देश में सबसे अच्छी है.ह्व उन्होंने कहा कि ‘पीएम आवास योजना’ (पीएमएवाई) के तहत ग्रामीण इलाकों में मकान बनाने में राज्य दूसरे स्थान पर है और स्वच्छता योजना में इंदौर शहर पिछले छह साल से पहले स्थान पर बना हुआ है.
विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, शाह ने कहा, ह्ल पिछले पांच वर्षों में राज्य में 1.36 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं. प्रति व्यक्ति आय 2003 में 12,000 रुपये से बढ़कर वर्तमान में 1.40 लाख रुपये हो गई है. 44 से अधिक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लाखों गरीब परिवारों को पीएमएवाई के तहत पक्के घर मिले हैं.ह्व शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम नहीं लिया लेकिन दावा किया कि ‘मिस्टर बंटाधार’ के शासनकाल में खासकर बिजली, पानी और सड़क सहित हर मामले में राज्य पिछड़ रहा था.
शाह ने कहा, “कभी बीमारु राज्य के रूप में जाना जाने वाला मध्य प्रदेश अब विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है. पिछले 20 वर्षों में भाजपा सरकार ने बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा के क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित किए हैं.” उन्होंने यह साबित करने के लिए सड़क, उद्योग और स्वास्थ्य क्षेत्रों में विकास के आंकड़ों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि मध्य प्रदेश पिछले 20 वर्षों में एक विकसित राज्य बन गया है.
शाह ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य के लोगों ने भाजपा को कुल 29 में से 27 सीटें दीं, जबकि 2019 में उन्होंने उनकी पार्टी को 29 में से 28 सीटें दीं. शाह ने कहा, ” मेरा दृढ़ विश्वास है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की जनता यह बची हुई एक सीट भी भाजपा को देगी.” साल 2019 में कांग्रेस को राज्य में एकमात्र छिंदवाड़ा लोकसभा सीट मिली थी, जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने जीता था.
शाह ने कहा, ”जिस कांग्रेस ने अपने लगभग 53 साल के शासनकाल में राज्य को बीमारू बना दिया, वह अब इसे विकसित राज्य बनाने का वादा कर रही है. अगर कांग्रेस में साहस है, तो उसे राज्य में अपने 50 साल के शासन का रिपोर्ट कार्ड करना चाहिए. हम देश में जहां भी सत्ता में हैं, वहां जवाबदेही देने की एक नई परंपरा शुरू की है.” उन्होंने कहा, ” ‘मिस्टर’ बंटाधार और (कमल)नाथ की जोड़ी कांग्रेस के 53 साल के शासन का रिपोर्ट कार्ड दे.”