नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर मनरेगा के बजट में कटौती के बारे में ”दुष्प्रचार” करने का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कानून (मनरेगा) के तहत काम की बढ.ती मांग को पूरा करने के लिए बजट अनुमानों में बार-बार संशोधन किया है.
खरगे ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ग्रामीण भारत के लोग मनरेगा के तहत काम की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं क्योंकि प्रधानमंत्री ने इसके बजट में भारी कटौती की है. उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि चुनावी राज्यों में कांग्रेस की आलोचना करके प्रधानमंत्री अपनी विफलताओं को छिपा रहे हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने भर्ती परीक्षा के पेपर लीक, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि उसे केवल अपने ‘वोट बैंक’ की चिंता है, राजस्थान के लोगों की नहीं.
खरगे पर पलटवार करते हुए भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर लिखा, “2023-24 में मनरेगा के लिए बजट में कटौती के बारे में उनका दावा झूठा है.” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस आंकड़ों को झूठ में लपेटकर लोगों के सामने पेश करने में माहिर हो गई है. मनरेगा के बारे में झूठा प्रचार और विलाप भी उसी का एक प्रदर्शन है.” भाजपा नेता ने कहा कि मनरेगा मांग आधारित कार्यक्रम है और केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत काम की बढ.ती मांग को पूरा करने के लिए अपने बजट अनुमानों को बार-बार संशोधित किया है.
खरगे ने यह दावा भी किया कि ग्रामीण भारत में आर्थिक संकट इतना गहरा है कि मनरेगा के तहत काम की सितंबर की मांग चार वर्षों में 30 प्रतिशत बढ. गई है. कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस बारे में कुछ करने के बजाय प्रधानमंत्री अपनी भारी विफलताओं को छिपाने के लिए चुनावी राज्यों में अपने भाषणों में कांग्रेस को ”कोस” रहे हैं.
खरगे की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मालवीय ने आरोप लगाया, ”बेहतर होता कि कांग्रेस अध्यक्ष आरोप लगाने से पहले इस (मनरेगा) योजना को समझ लेते.” उन्होंने कहा, ”शायद खरगे जी भूल गए कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना है, जिसका मतलब है कि जब अधिक मांग होती है, तो अधिक धन आवंटित किया जाता है.” मालवीय ने कहा कि मोदी सरकार गरीब लोगों के अधिकारों की रक्षा कर रही है जबकि कांग्रेस ने गरीबों के अधिकारों को छीनने का काम किया है.
रेलवे कुली के वेतन में संशोधन के बारे में राहुल गांधी का दावा फर्जी, भ्रामक
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह रेलवे कुलियों के वेतन में वृद्धि का श्रेय लेने के लिए सोशल मीडिया पर ‘फर्जी और भ्रामक’ दावा कर रहे हैं. भाजपा की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी द्वारा कुलियों के वेतन में वृद्धि के संबंध में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करने के बाद आई. इसके साथ ही राहुल ने लिखा, “यह देखकर अच्छा लगा कि भारतीय रेलवे और सरकार ने मेरे कुली भाइयों की आवाज सुनी है.” गांधी ने दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन की अपनी यात्रा के दौरान कुलियों के साथ खींची गई तस्वीरें भी साझा कीं.
कांग्रेस नेता के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स (पूर्व में ट्विटर)’ पर लिखा, “भारतीय रेलवे और सरकार हर दो साल में कुली भाइयों की बात सुनती है. राहुल गांधी का ट्वीट, जो श्रेय लेने के लिए है, फर्जी और भ्रामक है.” भाजपा नेता ने कुली वर्ग के मेहनताने में संशोधन पर उत्तर रेलवे के हालिया आदेश की एक प्रति ट्विटर पर साझा करते हुए कहा कि कुलियों के वेतन में संशोधन के लिए एक प्रक्रिया है और हर साल इसका पालन किया जाता है.
मालवीय ने कहा, “आदेश में तारीखें दी गई हैं, जब उत्तर रेलवे के विभिन्न मंडलों में वेतन संशोधन की कवायद की गई थी. कुल पांच मंडल में से चार मंडलों ने 21 सितंबर को राहुल गांधी के आनंद विहार स्टेशन का दौरा करने से पहले ही वेतन संशोधन कर लिया था.” उन्होंने आरोप लगाया, ”इस पोस्ट के साथ संलग्न आधिकारिक आदेश राहुल गांधी के दुष्प्रचार का पर्दाफाश करता है.” उत्तर रेलवे ने भी कांग्रेस नेता के दावे को खारिज किया है.
उत्तर रेलवे ने कहा, “रेल सहायकों के शुल्क की दरों में संशोधन एक आवधिक प्रक्रिया है, जो उत्तर रेलवे समय-समय पर करता है. उत्तर रेलवे के पांच में से चार मंडलों ने दौरे से पहले ही शुल्कों में संशोधन कर लिया था और दिल्ली मंडल में संशोधन की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है.”