नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2008 के बटला हाउस मुठभेड़ मामले में दोषी करार दिए गए आरिज खान को सुनाई गई फांसी की सजा को बृहस्पतिवार को उम्रकैद में तब्दील कर दिया. बटला हाउस मुठभेड़ के दौरान दिल्ली पुलिस के निरीक्षक मोहन चंद शर्मा की मौत हो गई थी.
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस बात से अवगत है कि देश ने एक बहादुर पुलिस अधिकारी को कर्तव्य निभाते हुए खो दिया, लेकिन मामला ”दुर्लभ से दुर्लभतम” की श्रेणी में नहीं आता जिसमें मौत की सजा दी जाए. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें खान को पुलिस अधिकारी की हत्या का दोषी ठहराया गया था. अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों और अन्य सामग्री से उसकी मौजूदगी घटनास्थल पर होने की बात साबित होती है और उसके मौके से फरार होने के दौरान अधिकारियों पर गोली चलाने की बात भी साबित होती है.
हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड में कुछ नहीं है कि अधिकारी को लगी गोली के लिए किसी आरोपी विशेष को जिम्मेदार ठहराया जा सके. अदालत ने घटना के समय बीटेक के 23 वर्षीय छात्र रहे खान को सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि करने से इनकार करते हुए कहा कि इस अदालत की सुविचारित राय है कि सश्रम आजीवन कारावास की सजा उचित होगी.
अगस्त महीने में दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें पूरी की थीं, जिसके बाद पीठ ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था.
दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई के अधिकारी शर्मा की मौत 19 सितंबर, 2008 को दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर में पुलिस और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ के दौरान हुई थी. राष्ट्रीय राजधानी में पांच सिलसिलेवार बम विस्फोटों के कुछ दिन बाद हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी भी मारे गए थे. विस्फोटों में 39 लोगों की मौत हुई थी और 159 लोग घायल हुए थे. शर्मा ने विस्फोटों के जिम्मेदार आतंकवादियों की तलाश में इस इलाके में छापा मारा था.
निचली अदालत ने आठ मार्च, 2021 को खान को दोषी ठहराया था और कहा था कि यह विधिवत साबित हो गया कि उसने और उसके सहयोगियों ने पुलिस अधिकारी की हत्या की. इसने कहा था कि खान का अपराध ”दुर्लभ से दुर्लभतम” की श्रेणी में आता है जिसमें अधिकतम सजा दी जानी चाहिए जो ‘मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाना’ है.
इसने 15 मार्च, 2021 को खान को मौत की सजा सुनाई थी और उस पर 11 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. अदालत ने कहा था कि 10 लाख रुपये तत्काल शर्मा के परिवार के सदस्यों को दिए जाने चाहिए. इसके बाद खान को सुनाई गई मौत की सजा के मामले को पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय में भेजा गया. जब कोई निचली अदालत किसी व्यक्ति को मृत्यु की सजा सुनाती है तो उच्च न्यायालय फैसले का अध्ययन करता है और अपराधी को फांसी देने से पहले सजा की पुष्टि उसे करनी होती है.
आरिज खान की संलिप्तता वाले बटला हाउस मुठभेड़ का घटनाक्रम
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2008 के बटला हाउस मुठभेड़ के दौरान पुलिस निरीक्षक मोहनचंद शर्मा की हत्या के मामले में आरिज खान की दोष सिद्धि को बरकरार रखते हुए उसे सुनाई गई मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया. इस मामले का घटनाक्रम इस प्रकार है:-
— 13 सितंबर 2008: दिल्ली में सिलसिलेवार हुए बम विस्फोटों में 39 लोगों की मौत और 159 जख्मी.
— 19 सितंबर 2008: पुलिस और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़. प्राथमिकी दर्ज.
–तीन जुलाई 2009: आरिज खान और शहजाद अहमद को निचली अदालत ने भगोड़ा घोषित किया.
— दो फरवरी 2010: शहजाद अहमद को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया.
–एक अक्टूबर 2010: मामले की जांच को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपा गया.
— 30 जुलाई 2013: इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादी और सह आरोपी शहजाद अहमद को निचली अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई.
— 14 फरवरी 2018: एक दशक तक फरार रहने के बाद आरिज खान को गिरफ्तार किया गया.
— आठ मार्च 2021: आरिज खान को निचली अदालत ने हत्या और अन्य अपराधों में दोषी ठहराया.
— 15 मार्च 2021: निचली अदालत ने आरिज खान को मौत की सजा सुनाई और उस पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.
— 10 जनवरी 2022: दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने व सजा सुनाए जाने के खिलाफ आरिज खान की अपील पर पुलिस को नोटिस जारी किया.
— सात मार्च 2022: उच्च न्यायालय ने मौत की सजा की पुष्टि की जाए या नहीं, इस संदर्भ में खान को नोटिस जारी किया.
–18 अगस्त 2023: उच्च न्यायालय ने मामले में आरिज खान को सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि पर अपना फैसला सुरक्षित रखा.
–12 अक्टूबर 2023: उच्च न्यायालय ने निरीक्षक मोहन चंद शर्मा की हत्या के मामले में खान की दोष सिद्धि को बरकरार रखा लेकिन मौत की सजा को उम्र कैद में बदला.
दोषी की मौत की सज़ा को बदलने पर मृत अधिकारी की पत्नी ने हैरानी जताई
दिवंगत पुलिस निरीक्षक मोहनचंद शर्मा की पत्नी ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आरिज़ खान की मौत की सज़ा को उम्र कैद में बदलने पर बृहस्पतिवार को हैरानी जताई. खान दिल्ली के बटला हाउस इलाके में 2008 में हुई एक मुठभेड़ के दौरान पुलिस अधिकारी की हत्या करने का दोषी है.
माया शर्मा ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश से दिल्ली पुलिस के र्किमयों के मनोबल पर असर पड़ सकता है. इससे पहले दिन में, उच्च न्यायालय ने निरीक्षक शर्मा की हत्या के लिए खान को दोषी ठहराने वाले निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन मृत्युदंड की पुष्टि करने से इनकार कर दिया.
निचली अदालत ने आठ मार्च 2021 को खान को दोषी ठहराया था और कहा था कि यह विधिवत साबित हो गया कि उसने और उसके साथियों ने पुलिस अधिकारी की हत्या की. उसने कहा कि खान का अपराध ‘दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी’ में आता है जिसमें अधिकतम सजा दी जानी चाहिए जो ‘मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाना’ है.
माया शर्मा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”हम हैरान और स्तब्ध हैं. सालों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद निचली अदालत ने आरिज को मौत की सजा सुनाई थी. अदालत ने कहा था कि यह ‘दुर्लभ से दुर्लभतम मामला है. इसलिए, यह साबित हो गया कि वह समाज के लिए खतरा है.” उन्होंने कहा, “तो फिर उसकी मौत की सज़ा कैसे कम की जा सकती है? क्या आपको नहीं लगता कि इससे बल का मनोबल गिरेगा, खासकर उन अधिकारियों का, जो ऐसी मुठभेड़ों में आगे रहते हैं?” माया शर्मा ने कहा कि उन्हें लोगों के फोन आ रहे हैं और दावा किया जा रहा है कि “इस देश में न्याय हो ही नहीं सकता.”
उन्होंने कहा, ” आप उस परिवार के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं जिसने यह नुकसान सहा है.” यह पूछे जाने पर कि क्या उनका परिवार इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा तो माया शर्मा ने कहा, “बेशक, हम कुछ योजना बनाएंगे. लेकिन पहले आदेश की प्रति आने दीजिए और हम देखेंगे कि उच्च न्यायालय ने किस आधार पर यह फैसला दिया है.”