नयी दिल्ली. जी20 देशों की संसद के पीठासीन अधिकारियों ने आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ का मुकाबला करने के लिए अपने विधायी, बजटीय और निरीक्षण कार्यों का उपयोग करने का शुक्रवार को संकल्प लिया. यहां पार्लियामेंट-20 (पी20) शिखर बैठक में स्वीकृत किये गये एक संयुक्त बयान में उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की. इसमें विदेशी लोगों को पसंद न करने की प्रवृत्ति (ज.ेनोफोबिया), नस्लवाद और असहिष्णुता के अन्य रूपों या धर्म अथवा आस्था के आधार पर आतंकवाद भी शामिल है.
पी20 शिखर बैठक की अध्यक्षता करने वाले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पी20 भारत में आम सहमति से स्वीकृत किया गया संयुक्त घोषणापत्र वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को प्रर्दिशत करता है. जन प्रतिनिधि होने के नाते हम एक मानव केंद्रित, समृद्ध और सौहार्द्रपूर्ण भविष्य के लिए सहयोग करने का संकल्प लेते हैं. समर्थन करने के लिए सभी प्रतिनिधियों को बधाई.” जी20 देशों की संसद के पीठासीन अधिकारियों का यह संयुक्त बयान रूस-यूक्रेन युद्ध जारी रहने, और इजराइल एवं हमास के बीच हाल में शुरू हुए भीषण संघर्ष के बीच आया है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को एक सबसे गंभीर खतरा पैदा किया है.
संयुक्त बयान में कहा गया है, ”हम महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों सहित अहम बुनियादी ढांचों, और अन्य कमजोर लक्ष्यों के खिलाफ सभी आतंकी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं. आतंकवाद के सभी कृत्य आपराधिक और अनुचित हैं, चाहे उनकी प्रेरणा कुछ भी हो और ये कृत्य कहीं भी, कभी भी और किसी ने भी किए हों.” इसमें कहा गया है कि आतंकवाद रोधी प्रभावकारी उपाय, आतंकवाद पीड़ितों की मदद और मानवाधिकारों की रक्षा परस्पर विरोधी लक्ष्य नहीं, बल्कि पूरक और पारस्परिक रूप से मजबूत हैं.
बयान के अनुसार, ”अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर एक समग्र दृष्टिकोण, आतंकवाद का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है. आतंकवादी समूहों को सुरक्षित ठिकाने,आवाजाही और भर्ती की आज़ादी के साथ-साथ वित्तीय, साजो-सामान या राजनीतिक समर्थन से वंचित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रभावकारिता बढ.ाने के प्रयासों को मजबूत किया जाना चाहिए.”
बयान में कहा गया है,”अपने विधायी, बजटीय और निरीक्षण कार्यों के आलोक में, हम आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ से निपटने में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लेते हैं.” पीठासीन अधिकारियों ने भारत की अध्यक्षता में जी20 नेताओं के शिखर बैठक के दौरान हुई व्यापक व रचनात्मक वार्ता का भी स्वागत किया, जिसमें सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी), प्रौद्योगिकीय परिवर्तन और समावेशी डिजिटल अर्थव्यवस्था, वैश्विक आर्थिक सुधार, खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दों का समाधान करने पर चर्चा की गई थी.
उन्होंने बहुपक्षवाद को बढ.ावा देने, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और वैश्विक स्वास्थ्य ढांचा मजबूत करने पर भी चर्चा किये जाने का स्वागत किया. संयुक्त बयान में कहा गया है, ”नौवें पी20 के दौरान हुई रचनात्मक चर्चाओं और पिछले पी20 में प्राप्त अनुभव को ध्यान में रखते हुए, हम जी20 प्रक्रिया में प्रभावी और सार्थक संसदीय योगदान देने के लिए अपने संयुक्त कार्य को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं.” संयुक्त बयान में, पिछले महीने दिल्ली में आयोजित जी20 नेताओं के घोषणा पत्र से सात पैराग्राफ को लिया गया, जिसमें रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र भी शामिल है.