पटना/नयी दिल्ली. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक दिन पहले जनसंख्या को नियंत्रित करने में महिला शिक्षा के महत्व से जुड़ी अपनी टिप्पणी के लिए बुधवार को विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ इसके बाहर भी माफी मांगी. विधानसभा परिसर में नीतीश के पहुंचने पर भाजपा विधायक ने हाथों में तख्तियां लेकर उनके बयानों की निंदा की और उनके इस्तीफे की भी मांग की.
राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहने वाले नीतीश कुछ कुछ मिनटों के लिए प्रवेश द्वार पर खड़े रहे, फिर पास में बने एक अस्थायी मंच की ओर बढ़ गए जहां सदन के सत्र के दौरान नेता पत्रकारों को संबोधित करते हैं. पत्रकारों से बातचीत में नीतीश ने कहा, ”मुझे आज पता चला है कि मैंने कल जो कुछ कहा था वह कई लोगों को पसंद नहीं आया. मेरा इरादा महिला सशक्तीकरण पर मेरी सरकार के जोर और जनसंख्या नियंत्रण में महिलाओं के बीच साक्षरता में सुधार की भूमिका को उजागर करना था. हालांकि, अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं माफी मांगता हूं और अपने शब्द वापस लेता हूं.”
सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में भाजपा सदस्य अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए आसन के सामने पहुंच गये, उनमें से कुछ ने पत्रकारों के लिए रखी गई कुर्सियां भी उठा लीं. विपक्षी सदस्य यह आरोप लगाते हुए नारे लगा रहे थे कि मुख्यमंत्री ‘मानसिक रोगी’ हो गए हैं, इसलिए वह बिहार पर शासन करने के लिए अयोग्य हैं.
सदन में मौजूद नीतीश अपनी सीट पर खड़े हुए और कहा, ”मैंने बाहर पत्रकारों से कहा कि अगर मेरे शब्द आपत्तिजनक लगे तो मैं माफी मांगने के लिए तैयार हूं. अगर मेरी किसी बात को लेकर तकलीफ हुई है तो मैं अपनी बात को वापस लेता हूं. भले ही मेरा आशय कोई अपराध करना नहीं था, लेकिन मैं खुद अपनी निंदा करता हूं … आपने (विपक्षी सदस्यों) कहा कि मुख्यमंत्री शर्म करें, मैं ना सिर्फ शर्म कर रहा हूं, मैं इसके लिए दुख प्रकट कर रहा हूं. मैं महिलाओं का पक्षधर रहा हूं.”
हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए हंगामा जारी रखा जिस पर विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने आपत्ति जताई और कहा, ”आपको एक ऐसे नेता से पूछने का कोई अधिकार नहीं है, जिसे लोगों का विश्वास हासिल है. हम रिकॉर्ड देखेंगे और यदि कोई शब्द असंसदीय पाया गया, तो उसे हटा दिया जाएगा.” विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी. इसके बाद मुख्यमंत्री विधान परिषद गए, जहां दोपहर में कार्यवाही शुरू हुई.
भाजपा की विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) निवेदिता सिंह, जिन्होंने पिछले दिन पत्रकारों के सामने रोते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया था, नीतीश के इस्तीफे की मांग करते हुए अपनी सीट से खड़ी हो गईं. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, ”मैं माफी मांगता हूं जैसा कि मैंने पहले पत्रकारों के सामने और विधानसभा में किया.” इस बीच विपक्षी सदस्य तब भड़क गये जब नीतीश ने व्यंग्य करते हुए कहा, ”ये लोग इसलिए शोर मचा रहे हैं क्योंकि इन्हें ऊपर से निर्देश मिला होगा.” विपक्ष द्वारा हंगामा जारी रखने पर सभापति देवेश चंद्र ठाकुर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12.50 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.
बिहार विधान परिषद की दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों के हंगामा जारी रखने पर सभापति ने सदन की कार्यवाही पहले ढाई बजे तक और फिर बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थागित कर दी. परिषद के बाहर एमएलसी और राज्य भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा, ”मैंने कल मुख्यमंत्री से गैरजिम्मेदाराना ढंग से ना बोलने की विनती की थी क्योंकि वह सदन के संरक्षक हैं. लेकिन वह माने नहीं. मुझे आश्चर्य तब हुआ जब उन्होंने आज सुबह पत्रकारों से कहा कि उन्हें अभी-अभी पता चला कि उनके शब्दों ने हंगामा खड़ा कर दिया है.”
चौधरी ने आरोप लगाया, ”अब इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हैं और उन्हें चिकित्सकीय सलाह की आवश्यकता है. उन्हें पद छोड़ देना चाहिए क्योंकि मानसिक रूप से अयोग्य व्यक्ति राज्य पर शासन नहीं कर सकता है.” पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, जो राजद से एमएलसी हैं, ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि नीतीश कुमार ने जो कहा वह उचित नहीं था, लेकिन उन्होंने माफी मांग ली है और हमें इसे भूल जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ”भाजपा सदस्यों को इस तरह के मुद्दे पर बोलने का अधिकार नहीं है. उनकी पार्टी मणिपुर में शासन करती है, जहां महिलाओं को नग्न करके घुमाया गया था. राज्य में आग लगी हुई है और उनका नेतृत्व बेफिक्र है.” भोजनावकाश के बाद राज्य विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों के हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही शाम चार बजकर 50 मिनट तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.
विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा की टि्प्णिणयों को सदन की कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया. सिन्हा ने हमला तेज करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री का ‘समर्थन’ किया था. इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर ‘अपमानजनक और घटिया भाषा’ का इस्तेमाल करने के लिए मुख्यमंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा जैसे विपक्षी नेताओं से विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के प्रमुख नेता नीतीश कुमार की निंदा करने का आग्रह किया. शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने शर्मा पर पलटवार करते हुए उन पर ‘राजनीति से प्रेरित’होने और पक्षपात करने का आरोप लगाया. नीतीश ने मंगलवार को विधानसभा में अपने विवरण में बताया था कि एक शिक्षित महिला अपने पति को संबंध बनाने के दौरान कैसे रोक सकती है. उन्होंने कहा था, ”पति के कृत्यों के कारण अधिक बच्चे पैदा हुए. लेकिन एक शिक्षित महिला जानती है कि उसे कैसे रोकना है… यही कारण है कि जन्मदर में कमी आ रही है.”
नीतीश की टिप्पणी को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी और महिला आयोग की अध्यक्ष के बीच जुबानी जंग
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधानसभा में टिप्पणी को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा और शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के बीच सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जुबानी जंग छिड़ गयी. जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए महिलाओं के बीच शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए नीतीश कुमार ने मंगलवार को सदन में कहा था कि कैसे एक शिक्षित महिला अपने पति को संभोग के दौरान ‘रोक’ सकती है. हालांकि नीतीश कुमार ने अपने बयान के लिए बाद में माफी मांग ली.
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कुमार के बयान की कड़ी आलोचना की तथा मुख्यमंत्री से माफी मांगने का आह्वान करते हुए कहा कि उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों ने देश भर की महिलाओं को प्रभावित किया है. आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कुमार से तत्काल और स्पष्ट माफी की मांग की. उन्होंने नीतीश के ‘अपमानजनक बयान’ की निंदा की और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया.
शर्मा ने ‘एक्स’ पर शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी को टैग किया और उनसे कुमार की टिप्पणियों की निंदा करने और माफी की मांग करने का आग्रह किया. महिला आयोग की प्रमुख ने पोस्ट किया, ”यह अच्छा होगा अगर महिला हितों की चैंपियन और उनके दोस्त नीतीश कुमार की निंदा करने और उनसे माफी की मांग के साथ खड़े हों.” इसके जवाब में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनिंदा ढंग से चुप्पी और कुछ मामलों में कार्रवाई महिला आयोग की प्रमुख के रूप में रेखा शर्मा की कुर्सी के लिए बहुत बड़ा नुकसान कर रही है क्योंकि यह पद भेदभावरहित माना जाता है.
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने कहा, ”मेरी प्रिय पक्षपाती, राजनीति से प्रेरित मैडम, मैं महिलाओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली किसी भी भाषा की स्पष्ट रूप से निंदा करती हूं, चाहे मेरी राजनीति कुछ भी हो, भले ही वह किसी सहयोगी की ओर से की गई हो. मुझे यह भी यकीन है कि मुख्यमंत्री अपने शब्दों के इस्तेमाल पर दोबारा गौर करेंगे और माफी मांगेंगे.”
उनका कहना था, ”जहां तक ??मुझे याद है, जब भी हमने आपसे महिलाओं के लिए खड़े होने की उम्मीद की, आपने चुनिंदा ढंग से चुप्पी और चुनिंदा कार्रवाई को चुना. आपने महिला आयोग के अध्यक्ष के रूप में अपने पद के लिए एक बड़ा नुकसान किया.” रेखा शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा, ”प्रिय प्रियंका जी, क्या आपको याद है कि आपने उस नेता के ख.लिाफ. कुछ भी करने में अपनी असमर्थता कैसे दिखाई थी, जो कभी आपकी पार्टी में था, जब मैंने आपको उसके कृत्यों के सारे सबूत दिखाए थे? आप कितनी निष्पक्ष थीं… याद है?” महिला आयोग की अध्यक्ष ने किसी नेता का नाम नहीं लिया.
चतुर्वेदी ने शर्मा से ‘ट्रोल होने’ के बजाय महिला आयोग के अध्यक्ष पद के प्रति जिम्मेदारी का परिचय देने को कहा. शिवसेना सांसद ने कहा, ”आपको कार्रवाई करने से किसने रोका? वास्तव में मैंने आपसे कहा था कि यदि आपके पास सबूत आदि हैं तो मैं कुछ नहीं कर सकती! क्या मैंने आपके हाथ-पैर बांध दिए थे या आपके होंठ सिल दिए थे?.”