
प्रयागराज. मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटी शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए अधिवक्ता आयोग के गठन और सर्वेक्षण के तौर तरीकों के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सुनवाई 17 जनवरी तक के लिए टाल दी. बृहस्पतिवार को जैसे ही मामले में सुनवाई शुरू हुई, मुस्लिम पक्ष की ओर से दो आधार पर सुनवाई टालने की प्रार्थना की गई. पहला आधार था कि सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई लंबित है और इस पर 16 जनवरी को सुनवाई किए जाने की संभावना है.
मुस्लिम पक्ष का दूसरा आधार था कि उनके वकील पुनीत गुप्ता के पिता का हाल ही में देहांत हो गया है और वह इस मामले में सुनवाई टालने का प्रार्थना पत्र पहले ही दे चुके हैं, इसलिए आज इस मामले में सुनवाई नहीं की जानी चाहिए. न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने कहा, “अदालत को सूचित किया गया है कि उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील पुनीत कुमार गुप्ता ने इस आधार पर सुनवाई टालने की अर्जी दी है कि उनके पिता का देहांत हो गया है और वह अदालत आने में समर्थ नहीं हैं. आयोग के गठन के संबंध में उनकी दलील भी सुनी जानी है.”
आयोग के स्वरूप और सर्वेक्षण के तौर तरीके के मुद्दे पर हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि सर्वेक्षण टीम के गठन के आदेश से किसी पक्ष को कोई नुकसान नहीं होने जा रहा है और अदालत उच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में सर्वेक्षण टीम गठित करने का आदेश पारित कर सकती है.
अदालत ने संबंधित पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 17 जनवरी 2024 निर्धारित की. गत 14 दिसंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए एक अधिवक्ता आयुक्त की नियुक्ति पर सहमति दी थी. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उस मस्जिद में हिंदू प्रतीक चिन्ह हैं जिससे पता चलता है कि वह कभी हिंदू मंदिर था. न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और सात अन्य द्वारा दायर वाद पर सुनवाई के बाद अधिवक्ता आयुक्त के गठन की अर्जी मंजूर की थी.



