‘मिशन हर शिखर तिरंगा’ के बाद जब पर्वतारोही टीम का सामना हुआ सिक्किम की बाढ़ से ….

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Tue, 17 Oct 2023 03:07 PM
‘मिशन हर शिखर तिरंगा’ के बाद जब पर्वतारोही टीम का सामना हुआ सिक्किम की बाढ़ से ….
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गुवाहाटी: देश के सभी 28 राज्यों की सबसे ऊंची चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए ‘मिशन हर शिखर तिरंगा – एक मुहिम मातृभूमि के लिए’ चलाया गया और इसकी कमान कर्नल रणवीर ंिसह जामवाल ने संभाली। अभियान सफलतापूर्वक संपन्न होने की खुशी थी और कर्नल जामवाल एवं उनकी पर्वतारोही टीम सिक्किम में हिमालय की तलहटी में उस रात सुकून की नींद सोने की तैयारी कर रही थी।

लेकिन किसे पता था कि ये रात उनकी ंिजदगी की सबसे भयानक रात साबित होगी। जामवाल ने पीटीआई-भाषा को बताया कि तीन अक्टूबर की रात उनके लिए सबसे डरावनी रातों में से एक बन गई क्योंकि बादल फटने से सिक्किम में तबाही मच गई और उस दिन उनकी जान जाते-जाते बची। उन्होंने कहा कि सिक्किम अभी भी सामान्य स्थिति में वापस लौटने के लिए संघर्ष कर रहा है।

उन्होंने बताया, “हमने दो अक्टूबर को मिशन की आखिरी चोटी, सिक्किम में माउंट जोंगसोंग पर चढ़ाई की थी। अगले दिन, हम जनक में एक भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) चौकी पर रात भर रुकने वाले थे। हमने अपने मिशन को पूरा करने के बाद मुश्किल से कुछ ही देर राहत की सांस ली होगी कि तभी रात दस बजे बाढ़ का पानी घुसना शुरु हो गया।”

जामवाल ने कहा, “हमारी टीम दस मिनट में अपना सामान लेकर बाहर निकलने में कामयाब रही और पर्वतारोही होने के नाते हम नीचे जाने की बजाय पहाड़ी पर चले गए जिससे हमारी जान बच गयी।” जामवाल देश के सभी 28 राज्यों की सबसे ऊंची चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मिशन पर राष्ट्रीय पर्वतारोहण और साहसिक खेल संस्थान (एनआईएमएएस) के पर्वतारोहियों और अन्य लॉजिस्टिक सहायक कर्मचारियों सहित लगभग 20 लोगों की एक टीम का नेतृत्व कर रहे थे।

‘मिशन हर शिखर तिरंगा – एक मुहिम मातृभूमि के लिए’ पिछले साल 16 अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश से शुरू किया गया था। इस महीने की शुरुआत में सिक्किम में अंतिम चोटी पर तिरंगा फहराए जाने के साथ मिशन संपन्न हो गया।

यह अभियान रक्षा मंत्रालय के तहत चलाया गया था और एनआईएमएएस इसी के अधीन आता है। कर्नल जामवाल वर्तमान में एनआईएमएएस के निदेशक हैं और टीम इसे सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अरुणाचल प्रदेश के दिरांग में संस्थान में लौट रही है।

कर्नल जामवाल ने बताया, ‘‘ मैंने पहले भी प्रकृति के कहर को देखा है। मैं अपने बेस कैंप में था जब माउंट एवरेस्ट क्षेत्र में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था। रौंगटे खड़े करने वाला अनुभव था। सिक्किम की वह रात भी उतनी ही डरावनी थी।’’

गुवाहाटी के रास्ते एनआईएमएएस लौट रहे कर्नल जामवाल ने कहा कि मिशन की सफलता से वह खुश हैं और उन्हें इस बात से भी बड़ी राहत मिली है कि उनकी टीम के सभी सदस्य सही सलामत हैं। एक और बड़ी चुनौती सभी राज्यों की सबसे ऊंची चोटी का पता लगाने की थी और मानचित्र तैयार करने में लगभग तीन महीने लग गए। उन्होंने कहा, ‘‘अनुसंधान, योजना और प्रशिक्षण के बाद, सभी आवश्यक मंजूरी के साथ चोटियों की सूची बनाई गई और उनकी रेकी की गई और फिर टीम ने काम शुरू किया।

कर्नल जामवाल ने दावा किया कि अभियान और अनुसंधान के दौरान महत्वपूर्ण खोजें भी की गईं, जैसे कि यह पाया गया कि माउंट रेओ पुर्ग्यिल वास्तव में हिमाचल प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी है और पंजाब का सबसे ऊंचा शिखर नैना देवी रेंज में स्थित है और अभी तक उसे कोई नाम नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, “जागरूकता की कमी के कारण कई ऊंची चोटियां अज्ञात हैं।”

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