
नयी दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने 1992 के सनसनीखेज अजमेर ब्लैकमेल व यौन शोषण कांड के छह दोषियों के लिए बुधवार को मृत्युदंड की मांग की जिन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. इस बहुर्चिचत कांड में अजमेर शहर की 100 से अधिक लड़कियों का यौन शोषण किया गया था और उन्हें ब्लैकमेल किया गया था.
उल्लेखनीय है कि 1992 के इस बहुर्चिचत प्रकरण में लड़कियों की अश्लील तस्वीरें खींचकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया था. पुलिस के अनुसार इन तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी देकर 100 से अधिक लड़कियों का यौन शोषण किया गया. मामले में अजमेर के एक मशहूर निजी स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को फार्म हाउस में बुलाया जाता था जहां उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था. पीड़ित लड़कियों की उम्र 11 से 20 साल के बीच थी.
इस मामले में कुल 18 आरोपी थे. इनमें से छह आरोपियों पर अलग से मुकदमा चल रहा है, जबकि बाकी आरोपी या तो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं या फिर अदालत से बरी हो चुके हैं. इनमें से कुछ पर अलग से भी मामले चल रहे हैं. विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने आरोपियों को सजा सुनाए जाने का स्वागत किया लेकिन कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें मृत्युदंड दिया जाना चाहिए.
उन्होंने एक बयान में कहा, ”विश्व हिन्दू परिषद अजमेर बलात्कार मामले में इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करती है और मांग करती है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए सभी दोषियों को न केवल जेल में डाला जाए बल्कि उन्हें फांसी की सजा भी दी जाए.” अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा कि इन छह लोगों के खिलाफ अलग से मुकदमा चलाया गया क्योंकि पहला आरोपपत्र दाखिल किए जाने के वक्त उनके खिलाफ जांच लंबित रखी गई थी. अजमेर की एक विशेष अदालत ने 1992 के इस बहुर्चिचत कांड में छह आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. दोषियों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.



