सरकार गठन की कवायद के बीच JDU ने अग्निपथ योजना की समीक्षा की मांग उठाई

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 06 Jun 2024 08:16 PM
सरकार गठन की कवायद के बीच JDU ने अग्निपथ योजना की समीक्षा की मांग उठाई
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नयी दिल्ली/पटना. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के महत्वपूर्ण घटक दल जनता दल (यूनाइटेड) ने केंद्र में सरकार गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से की जा रही कवायदों के बीच सेना में भर्ती की ‘अग्निपथ’ योजना की समीक्षा किए जाने की मांग उठाई है.

जद (यू) के वरिष्ठ नेता के सी त्यागी ने यहां संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ”अग्निपथ योजना को लेकर मतदाताओं के एक हिस्से में नाराजगी रही है. हमारी पार्टी चाहती है कि विस्तार से उन कमियों और खामियों को दूर किया जाए जिसको लेकर जनता ने सवाल उठाए हैं.” केंद्र सरकार ने साल 2022 में 14 जून को सेना में जवानों की भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की थी. कांग्रेस और कई विपक्षी दलों ने इस योजना का विरोध किया था. कुछ राज्यों में इसके विरोध में प्रदर्शन भी हुए थे.

कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में अग्निपथ योजना को बड़ा मुद्दा बनाया था और कहा कि यदि वह सत्ता में आते हैं तो इसे रद्द कर देंगे. विपक्षी दलों के भारी विरोध के बावजूद भाजपा और उसके नेता इस योजना का बचाव करते रहे हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के दौरान ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि युवाओं के लिए ‘अग्निपथ’ से अधिक आकर्षक कोई योजना हो ही नहीं सकती, क्योंकि यह चार साल के बाद सेवानिवृत्त होने वाले ‘अग्निवीरों’ के लिए सशस्त्र बलों में पूर्णकालिक सरकारी नौकरी की गारंटी देती है.

शाह ने कहा था कि उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तरस आता है, जिन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन के सत्ता में आने पर इस अल्पकालिक भर्ती योजना को खत्म करने का वादा किया है. शाह ने दावा किया कि चार साल के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त होने वालों के लिए नौकरी के अवसर उनकी संख्या से साढ़े सात गुना अधिक होंगे, क्योंकि उनके लिए विभिन्न राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में आरक्षण की व्यवस्था की गई है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश के राजनीतिक सलाहकार और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता त्यागी ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के खिलाफ नहीं है. भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में आने पर यूसीसी लागू करने का वादा किया है. त्यागी ने कहा, ”यूसीसी पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) विधि आयोग के अध्यक्ष को चिट्ठी लिख चुके हैं. हम इसके विरुद्ध नहीं हैं. लेकिन जितने भी हितधारक हैं, चाहे मुख्यमंत्री हों, विभिन्न राजनीतिक दल हों या समुदाय हों, सबसे बात करके ही इसका हल निकाला जाना चाहिए.

JDU की नज़र केंद्र में ”तीन” मंत्रालयों पर, राज्य को विशेष दर्जा देने की भी मांग

केंद्र में अगली सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगियों पर काफी हद तक निर्भर रहने के बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) केंद्रीय मंत्रिमंडल में ”सम्मानजनक” प्रतिनिधित्व दिए जाने की उम्मीद कर रही है.
नीतीश ने 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में केवल एक स्थान की पेशकश को ठुकरा दिया था, और तीन साल तीन साल बाद उनकी पार्टी ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था. राजग में तेदेपा के बाद जद(यू) भाजपा की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है.

नाम नहीं बताने की शर्त पर जद (यू) के एक शीर्ष नेता ने कहा कि पार्टी की नजर कैबिनेट की ”तीन” सीट पर है, जिससे उसे जाति गणना का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है, जो अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण है.
बिहार में 12 लोकसभा सीटें जीतने वाली जद(यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बृहस्पतिवार को पीटीआई-भाषा से कहा कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और हमारे नेता नीतीश कुमार जी के द्वारा तय किया जाएगा.

कुमार ने कहा, ”केंद्रीय मंत्रिमंडल में जद(यू) को कितने मंत्री पद मिलनी चाहिए, इस बारे में निर्णय हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (नीतीश कुमार) करेंगे, लेकिन यह ”सम्मानजनक” होना चाहिए.” मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा से 1995 से विधायक और उनके करीबी माने जाने श्रवण कुमार ने हालांकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया और कहा, ”2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए, इसबारे में निर्णय लिया जाना चाहिए.” जद(यू) सूत्रों ने कहा कि पार्टी को चुनाव से पहले कथित तौर पर तीन कैबिनेट पद और एक राज्य मंत्री (एमओएस) पद देने का वादा किया गया था. 2004 और 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद यह जद(यू) का तीसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन है जब पार्टी ने क्रमश? आठ और दो सीटें जीती थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 16 सीटें जीती थीं.

सूत्रों ने कहा कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों के लिए भी बड़े मंत्रालयों रेलवे, ग्रामीण विकास, कृषि, जल संसाधन एवं भारी उद्योग जैसे विभागों की मांग कर सकते हैं. नाम न छापने की शर्त पर पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, ”अगर हमारे सांसदों को ये मंत्रालय मिलते हैं, तो यह जद(यू) को बिहार के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाएं प्राप्त करने में मदद करेगा और इससे राज्य में विकास कार्यों में तेजी आएगी.” पार्टी के भीतर मंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जाने वालों राज्यसभा सांसद संजय झा, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (मुंगेर), कौशलेंद्र कुमार (नालंदा) रामप्रीत मंडल (झंझारपुर) और लवली आनंद (शिवहर) का नाम शामिल हैं.

सूत्रों ने कहा कि पार्टी केंद्रीय मंत्रिमंडल में उच्च जाति, अन्य पिछड़ी जाति, अत्यंत पिछड़ी जाति और एक महिला सांसद को भेजने का प्रयास करेगी. इसके अलावा जद(यू) नेता इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि वह राज्य के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा जैसी अपनी लंबे समय से लंबित मांगों पर कायम रहेंगे.

पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को कहा था, ”जद(यू) राजग में है और इसमें बना रहेगा. लेकिन बिहार की वित्तीय स्थिति और अर्थव्यवस्था से संबंधित कुछ मांगें हैं जिन्हें केंद्र द्वारा संबोधित करने की आवश्यकता है.” चौधरी ने कहा था, ”बिहार अपने वित्त का प्रबंधन स्वयं कर रहा है. हम देश के सबसे गरीब राज्यों में से हैं. हम (जद(यू)) बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज की अपनी मांग पर कायम हैं.”

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