
नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम/शिलांग. मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोपों में छत्तीसगढ़ में दो ननों की गिरफ्तारी को लेकर केरल में मचे बवाल के बीच कांग्रेस नीत गठबंधन यूडीएफ के एक सांसद ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि ननों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे.
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (यूडीएफ) के घटक दलों के सांसदों ने छत्तीसगढ़ में ननों की गिरफ्तारी को लेकर गृह मंत्री से नयी दिल्ली में मुलाकात की तथा उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित केरल के सभी राजनीतिक दलों ने गिरफ्तार ननों के प्रति अपना समर्थन जताया है, जिन्हें भाजपा शासित छत्तीसगढ़ में हिरासत में लिया गया है.
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि शाह ने आश्वासन दिया है कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार दो ननों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे. प्रेमचंद्रन ने संवाददाताओं से कहा कि केरल के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर शाह से मुलाकात की.
सांसद ने कहा कि अमित शाह ने उन्हें आश्वासन दिया कि दोनों ननों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के दौरान शाह की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि उनका मानना है कि नन निर्दोष हैं. प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह ”दुर्भाग्यपूर्ण” है कि छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित एक सत्र अदालत ने ननों का मामला राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अदालत में स्थानांतरित कर दिया, जो आतंकवाद से संबंधित मामलों की सुनवाई करती है.
उन्होंने कहा, ”यह किसी भी पक्ष को सुने बिना किया गया. वास्तव में ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं थी.” सांसद ने कहा कि बैठक के दौरान शाह ने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार मामले को वहां से स्थानांतरित करने के लिए एनआईए अदालत में याचिका दायर करेगी.
उन्होंने बताया कि गृह मंत्री ने उन्हें बताया कि राज्य सरकार को ननों की जमानत याचिका का विरोध नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं.
प्रेमचंद्रन ने कहा, ”इसलिए हमें 99 प्रतिशत उम्मीद है कि ननों को आज ही जमानत मिल जाएगी. केंद्र सरकार और गृह मंत्री ने इस मामले में अनुकूल रुख अपनाया है.” इस बीच, ‘एर्नाकुलम-अंगामाली डायोसीज’ ने दोनों ननों के साथ हुई घटना के विरोध में प्रदर्शन किया और उनके लिए न्याय की मांग की.
सैकड़ों पादरियों और ननों ने मलयालम, अंग्रेजी और हिंदी में लिखी तख्तियों तथा बैनरों के साथ अंगामाली नगर क्षेत्र में मार्च किया, जिन पर ‘लोकतंत्र खतरे में है, देश अराजकता की ओर बढ़ रहा है’, ‘धार्मिक उत्पीड़न समाप्त करें’ और ‘ननों के लिए न्याय, आस्था कोई अपराध नहीं है’ जैसे नारे लिखे थे. उनके अलावा, सैकड़ों श्रद्धालु भी प्रदर्शन मार्च में शामिल हुए. कई महिला श्रद्धालुओं ने एक टीवी चैनल से कहा, ”हम छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार की गईं ननों के लिए न्याय चाहते हैं.” कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि करीब 28 सांसदों ने बुधवार को पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा और फिर अमित शाह से मुलाकात की.
उन्होंने कहा, ”हम चाहते हैं कि दोनों ननों की जल्द रिहाई हो.” केरल की नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस को सुखमन मंडावी के साथ 25 जुलाई को राज्य के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने स्थानीय बजरंग दल के एक पदाधिकारी की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया था. बजरंग दल कार्यकर्ता ने उन पर आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले की तीन युवतियों का जबरन धर्मांतरण कराने और उनकी तस्करी करने का आरोप लगाया था.
ननो की गिरफ्तारी: मेघालय के कैथोलिक ईसाइयों के संगठन ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा
मेघालय के शिलांग में कैथोलिक ईसाइयों के एक संघ ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर मानव तस्करी और धर्मांतरण में कथित रूप से शामिल दो ननों की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त की है और दावा किया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप “निराधार” और “फर्जी” हैं.
नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस और एक अन्य व्यक्ति सुकमन मंडावी को 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी एक स्थानीय बजरंग दल पदाधिकारी की शिकायत पर की गई थी. शिकायत में उन पर राज्य के आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले की तीन महिलाओं का जबरन धर्मांतरण और उनकी तस्करी करने का आरोप लगाया गया था.
कांग्रेस के पूर्व सांसद विंसेंट एच. पाला की अध्यक्षता वाले कैथोलिक एसोसिएशन ऑफ शिलांग (सीएएस), मेघालय ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति “18 वर्ष से अधिक आयु की तीन युवतियों के साथ, उनके माता-पिता की पूर्ण सहमति से, नौकरी के सिलसिले में जा रहे थे.” एसोसिएशन ने पत्र में कहा, “उनका काम मानवता की सेवा है, चाहे उनकी जाति, पंथ या धर्म कुछ भी हो. हमारा मानना है कि इस तरह के कार्य राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने में मदद करते हैं.”



