बस्ती. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि देश में जब बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया जा रहा था, तो उस समय सबसे पहले आर्य समाज ने घर वापसी कराकर उसका जवाब दिया था. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने जब भारतीयों पर तुष्टीकरण की नीति को थोपा तब आर्य समाज ने देश में वैदिक आंदोलन की शुरुआत की. उन्होंने आर्य समाज को भारत का जीवंत आंदोलन रहने का दावा करते हुए कहा कि एक समय था जब बस्ती से लेकर कराची तक आर्य समाज का बोलबाला था.
आदित्यनाथ ने बुधवार को होटल बालाजी में आर्य समाज बस्ती द्वारा आयोजित आर्य समाज के स्वर्ण जयंती महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित किया. एक सरकारी बयान के अनुसार इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वदेशी और अछूतोद्धार के कार्यक्रम को आर्य समाज ने आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा, ” आर्य समाज आंदोलन ने अनेक क्रांतिकारी दिए. काकोरी एक्शन के महानायक पंडित रामप्रसाद बिस्मिल आर्य समाज की ही देन थे, जो एक प्रचारक के रूप में सांझापुर में कार्य करते थे. उस समय का हर क्रांतिकारी आर्य समाज के साथ जुड़कर गौरवान्वित महसूस करता था.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा को संस्कारों और आधुनिकता के साथ जोड़ने का कार्य आर्य समाज के संस्थापक मर्हिष दयानंद सरस्वती ने किया था. उन्होंने कहा कि ‘डीएवी’ को एक समय देश की सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में से एक माना जाता था, जहां पर वैदिक प्रार्थना और हवन यज्ञ के साथ दिन की शुरुआत होती थी.