बार्क आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली में अनुसंधान एवं विकास परिसर का विस्तार करेगा

अमरावती. भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान (बार्क) आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले में 3,000 एकड़ में फैले अपने अनुसंधान और विकास परिसर का विस्तार करने की योजना बना रहा है. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रमुख बहु विषयक परमाणु अनुसंधान केंद्र ने इस उद्देश्य के लिए 148.15 हेक्टेयर (366 एकड़) भूमि इस्तेमाल में बदलाव के लिए आंध्र प्रदेश सरकार से संपर्क किया है. मंत्रालय के अधीन एक विशेषज्ञ आकलन समिति (ईएसी) ने इस महीने की शुरुआत में प्रस्ताव की समीक्षा की और वन भूमि के एक हिस्से के भू इस्तेमाल में बदलाव को ‘सैद्धांतिक’ मंजूरी की सिफारिश की.

ईएसी की बैठक विवरण के मुताबिक, ‘‘भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र रणनीतिक कारणों से विशाखापत्तनम के पास पूर्वी तट पर एक नया परिसर स्थापित कर रहा है. स्थल का चयन स्थल चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया था और परमाणु ऊर्जा आयोग द्वारा इसे अनुमोदित किया गया था.’’ बीएआरसी परियोजना के लिए 1,200 हेक्टेयर (लगभग 3,000 एकड़) से अधिक राजस्व भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है. ईएसी के मुताबिक, प्रस्तावित 148.15 हेक्टेयर वन भूमि के भू इस्तेमाल में बदलाव किया जाना है, जो पूर्व में अधिग्रहित भूमि से सटी हुई है और परियोजना स्थल तथा समुद्र के बीच है.

यह परियोजना केंद्र सरकार की एक रणनीतिक पहल है, और इसलिए, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगाई गई है. बैठक विवरण के मुताबिक, प्रस्ताव में एक परिधि परिसर की दीवार, क्षेत्रीय सुरक्षा बाड़, गश्ती सड़कें, एक पंप हाउस, निगरानी टावर, नालियां, सेवा लाइनें और क्षेत्र विकास कार्यों का निर्माण शामिल है, हालांकि गतिविधि की प्रकृति निर्दिष्ट नहीं की गई है.

प्रस्ताव के तहत उक्त जमीन पर मौजूद 21,244 पेड़ों में से 1,722 पेड़ काटे जाएंगे. हालांकि, समुद्र के निकट स्थित पेड़ों को नहीं काटा जाएगा, और इससे समग्र पारिस्थितिकी तंत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. ईएसी ने कहा, ‘‘यह केंद्र ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल और केंद्र द्वारा निर्धारित अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में अनुप्रयोगों के साथ परमाणु क्षेत्र में अनुसंधान करके राष्ट्र निर्माण में योगदान देगा.’’ वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संपर्क करने पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बार्क ने विस्तार के लिए भूमि आवंटन का अनुरोध करते हुए राज्य सरकार से संपर्क किया था. गहन जांच के बाद, वन भूमि बार्क को आवंटित कर दी गई. ईएसी ने प्रस्ताव को मंजूरी देने की सिफारिश करते हुए कहा कि जिस भूमि के इस्तेमाल में बदलाव की मंजूरी दी जा रही है, उसपर भविष्य में गैर-विशिष्ट गतिविधियों के लिए किसी भी प्रकार के भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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