बीजापुर: 103 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, 49 पर था एक करोड़ छह लाख रुपए का इनाम

विजयादशमी का पर्व आज हिंसा और भ्रम पर विकास और विश्वास की विजय का साक्षी : CM साय

बीजापुर/रायपुर. छत्तीसग­ढ़ के बीजापुर जिले में 103 माओवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 49 माओवादियों पर कुल 1.63 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. हथियार डालने वाले माओवादियों में 22 महिलाएं भी शामिल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में शामिल डिविजनल कमेटी सदस्य लच्छु पूनेम ऊर्फ संतोष (36), प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य गुड्डू फरसा उर्फ विजय (30), भीमा सोढी उर्फ कमल सिंह (45), कंपनी नंबर 10 की पार्टी सदस्या हिडमे फरसा उर्फ मीना (26) और कंपनी नंबर एक की पार्टी सदस्या सुखमती ओयाम (27) पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था.
उन्होंने बताया कि इनके अलावा आत्मसमर्पण करने वाले चार माओवादियों के पर पांच-पांच लाख रुपये, 15 माओवादियों पर दो-दो लाख रुपये, 10 माओवादियों पर एक-एक लाख रुपये, 12 माओवादियों पर 50-50 हजार रुपये और तीन माओवादियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित था.

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में डिविजनल कमेटी सदस्य, प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य, एरिया कमेटी सदस्य, प्लाटून पार्टी सदस्य, दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष, मिलिशिया कमांडर, डिप्टी कमांडर और जनताना सरकार अध्यक्ष जैसे पदों पर काम करने वाले माओवादी भी शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि अंदरूनी क्षेत्रों में नवीन सुरक्षा शिविरों की स्थापना के साथ शासन की विकासोन्मुखी कार्य सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली और शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजना ग्रामीणों तक पहुंचने लगी है. अधिकारियों ने दावा किया कि सुरक्षाबलों का ग्रामीणों के साथ हो रहे सकारात्मक संवाद, सामुदायिक पुलिसिंग के तहत दी जा रही जनकल्याकारी योजनाओं की जानकारी और राज्य शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के व्यापक प्रचार प्रसार से माओवादियों का संगठन से मोहभंग हुआ है.

उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित संगठनों के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद के कारण माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में जुड़कर सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने के लिए आत्मसमर्पण किया है. अधिकारियों ने बताया कि हाल के महीनों में मुठभेड़ों में माओवादी संगठनों के शीर्ष नेताओं के मारे जाने और संगठन छोड़ कर मुख्यधारा में शामिल होने से संगठन की रणनीतिक क्षमता पर गहरा असर पड़ा है. विशेष रूप से रेवोल्यूशनरी पीपुल्स कमेटी (आरपीसी) के सदस्य बड़ी संख्या में मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं.

उन्होंने दावा किया कि आरपीसी में नेतृत्वहीनता और दिशाहीनता, सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति, पुनर्वास नीति की पारर्दिशता और भरोसेमंद क्रियान्वयन और परिवार और समाज से पुन: जुड़ने की इच्छा ने इन्हे मुख्यधारा में लौटने की दिशा दी है . अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसग­ढ़ शासन द्वारा लागू की गई नक्सल उन्मूलन नीति और ‘नियद नेल्लानार’ योजना ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को ब­ढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने वाले सभी माओवादियों को प्रोत्साहन स्वरूप 50-50 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि एक जनवरी 2025 से अब तक 421 माओवादी गिरफ्तार किसे गए हैं और अन्य 410 माओवादियो ने आत्मसमर्पण किया है. वहीं जिले में अलग-अलग मुठभेड़ में कुल 137 माओवादी मारे गए हैं. उन्होंने बताया कि एक जनवरी 2024 से अब तक माओवादी घटनाओं में संलिप्त 924 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है जबकि 599 अन्य माओवादियो ने आत्मसमर्पण किया है. वहीं इस अवधि के दौरान जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 195 माओवादी मारे गए हैं.

विजयादशमी का पर्व आज हिंसा और भ्रम पर विकास और विश्वास की विजय का साक्षी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

धर्म और न्याय की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व इस बार छत्तीसगढ़ में हिंसा और भ्रम पर विकास और सुशासन की ऐतिहासिक विजय का भी प्रतीक बन गया. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर में 103 नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर सुरक्षा बलों को बधाई देते हुए कहा कि यह कदम प्रदेश के शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव है.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार योजना” ने लाल आतंक के भ्रम से भटके लोगों के दिलों में विश्वास और आशा का दीप प्रज्वलित किया है. “पूना मारगेम अभियान” से प्रेरित होकर बीजापुर में कुल 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें से 49 नक्सली वे भी हैं, जिन पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए तक का इनाम घोषित था.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नई शुरुआत के लिए 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है. साथ ही, नक्सल उन्मूलन नीति के अंतर्गत उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है. अब तक 1890 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता और जनता के विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन किया जाएगा और आत्मसमर्पित लोगों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं उज्ज्वल भविष्य दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल बस्तर की धरती तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण, समृद्ध और विकसित भविष्य की ओर एक सशक्त कदम है.

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