छत्तीसगढ़ सरकार ने पेश किया 1.65 लाख करोड़ रुपये का बजट, नक्सल प्रभावित बस्तर के विकास पर जोर

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया. बजट में पर्यटन, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के साथ ही नक्सल प्रभावित बस्तर के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वित्त मंत्री ओ पी चौधरी द्वारा पेश किए गए 2025-26 के बजट का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के परिवर्तन को प्राथमिकता देते हुए बस्तर को एक नए विकास मॉडल के रूप में स्थापित करना है.

छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए केंद्र के राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के समान एक विशेष संचालन समूह (एसओजी) स्थापित करने की योजना बना रही है. इसके अतिरिक्त, 10 जिलों में मादक पदार्थ विरोधी टास्क फोर्स और पांच जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. बजट प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य में बढ़ते औद्योगीकरण के परिप्रेक्ष्य में औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा की दृष्टि से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तर्ज पर राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) बनाया जाएगा.

इसमें कहा गया है कि नक्सलवाद को समाप्त करने की लड़ाई में बस्तर ‘फाइटर’ का सराहनीय योगदान रहा है और इसे देखते हुए इस वर्ष 3,200 अतिरिक्त बस्तर फाइटर पदों के सृजन का प्रावधान किया गया है. साथ ही राज्य में पुलिस बल को मजबूत करने के लिए एक नवीन भारत रक्षित वाहिनी का गठन किया जाएगा. इसके नवीन पदों के लिए बजट में 39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वहीं राज्य के दो अत्यधिक नक्सल प्रभावित गांवों एल्मागुंडा और डब्बाकोंटा में नए पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाएंगे.

बजट में आदिवासी खेलों और परंपराओं का जश्न मनाने वाले वार्षिक बस्तर ओलंपिक के लिए पांच करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों द्वारा गहन अभियानों के कारण, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यभार संभालने के बाद से, केवल 15 महीनों में 305 माओवादियों को मार गिराया गया है तथा एक हजार माओवादियों के आत्मसमर्पण के साथ बस्तर में नक्सल नेटवर्क ध्वस्त हो गया है.

वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट में कहा गया है कि बिना कोई नया कर लगाए सरकार के राजस्व में 11 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. इस वर्ष, सरकार ने पूंजीगत व्यय के लिए 26,341 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत की वृद्धि है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर और अन्य क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क, पुल, स्कूल और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ा कदम उठाने की भी घोषणा की है. आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 221 करोड़ रुपये का कोष आवंटित किया गया है. पीएम जनमन योजना में स्कूली शिक्षा के लिए 30 करोड़ रुपये, आदिवासी कल्याण के लिए 12 करोड़ रुपये और आवास परियोजनाओं के लिए 300 करोड़ रुपये शामिल हैं.

बजट प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047’ शुरू किया है, जो स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, कृषि, शिक्षा, आईटी और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने वाले 10 प्रमुख मिशन की रूपरेखा तैयार करता है. इस मिशन का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को 2047 तक विकसित राज्य में बदलना है.

इसमें कहा गया, ”सरकार को 2,804 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद है, जिससे छत्तीसगढ़ भारत के वित्तीय रूप से मजबूत राज्यों में से एक बन जाएगा. राज्य का कुल राजस्व 1.41 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से कर संग्रह और केंद्र सरकार के आवंटन से प्राप्त होगा. छत्तीसगढ़ की आर्थिक वृद्धि दर 7.51 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक है.” बजट की अन्य मुख्य बातों में नागरिकों और व्यवसायों के लिए राहत तथा वैट में कटौती कर पेट्रोल की कीमत में एक रुपये प्रति लीटर की कमी शामिल है. राज्य सरकार के बजट में नई सड़कों के निर्माण के लिए दो हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

ग्राम पंचायतों में यूपीआई भुगतान प्रणाली शुरू की जाएगी और कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नया पेंशन कोष बनाया जाएगा तथा राज्य कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) में तीन प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी.
बजट में कहा गया है कि राज्य सरकार ने बस्तर और सरगुजा के लिए होमस्टे नीति भी शुरू की है. अब इन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटक गांवों में रह सकते हैं और समृद्ध स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं. इसके अलावा जशपुर में ‘एडवेंचर टूरिज्म’ और टूरिज्म र्सिकट विकसित किया जाएगा, जो आगंतुकों को एक रोमांचक यात्रा अनुभव प्रदान करेगा.

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