बेंगलुरु में कांग्रेस ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक बिहार चुनाव से पहले ‘चुनावी हथकंडा’: भाजपा

भाजपा-जद (एस) ने किया कर्नाटक में 'रणदीप शासन' होने का दावा, सुरजेवाला को 'सुपर सीएम' करार दिया

बेंगलुरु. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने बुधवार को यहां आयोजित कांग्रेस की ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ‘चुनावी हथकंडा’ करार दिया. भाजपा नेता ने दावा किया कि यह बैठक पिछड़े वर्गों के उत्थान और विकास के बारे में नहीं है. विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रे ने आजादी के बाद लंबे समय तक देश और राज्य पर शासन किया और उसे इन समुदायों के पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ”अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के ओबीसी परिषद ने कल एक बैठक की और यह आज भी जारी है. बैठक का एजेंडा ओबीसी, एससी/एसटी समुदायों के उत्थान या विकास के बारे में नहीं है, बल्कि एजेंडा यह है कि बिहार विधानसभा चुनाव कैसे जीता जाए. यही असली एजेंडा है.”

उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने पिछले 55-60 वर्षों से राज्य और देश दोनों पर शासन किया है और यदि इन समुदायों के लिए विकास और सामाजिक न्याय नहीं है तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? विजयेंद्र ने कहा, ”यह कांग्रेस पार्टी है – आप ही हैं जिसने इस देश पर 55 साल से अधिक समय तक शासन किया. अब, जब बिहार चुनाव नजदीक हैं, तो एआईसीसी की ओबीसी समिति यहां कर्नाटक के बेंगलुरु में बैठक कर रही है, इसका कोई महत्व नहीं है. इस बैठक का कोई औचित्य नहीं है. यह केवल एक राजनीतिक हथकंडा है. यह आगामी बिहार चुनावों के लिए एक चुनावी हथकंडा.”

भाजपा-जद (एस) ने किया कर्नाटक में ‘रणदीप शासन’ होने का दावा, सुरजेवाला को ‘सुपर सीएम’ करार दिया

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बुधवार को कई मंत्रियों के साथ एक के बाद एक बैठक की जिस पर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल सेक्युलर (जद एस) ने सत्तारूढ. कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए सुरजेवाला को ”सुपर मुख्यमंत्री” करार दिया. विपक्षी नेताओं ने सवाल किया कि क्या राज्य में ”रणदीप शासन”लागू हो गया है.

वहीं विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं भाजपा नेता आर अशोक ने दावा किया कि कांग्रेस आलाकमान का मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर जरा भी भरोसा नहीं है और उसने कर्नाटक में ”रणदीप शासन” लागू कर दिया है. सुरजेवाला की मंत्रियों के साथ आमने-सामने की बैठकों का बुधवार को तीसरा दिन है. बताया जा रहा है कि इन बैठकों का उद्देश्य मंत्रियों की शिकायतों को समझना, उनके कामकाज का आकलन करना और पार्टी विधायकों द्वारा मंत्रियों के खिलाफ की गई शिकायतों का समाधान करना है. इससे पहले सुरजेवाला ने राज्य में पार्टी विधायकों के साथ आमने-सामने की बैठके की थीं.

अशोक ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पूछा, ”क्या राज्य में रणदीप शासन लागू है? क्या बृहस्पतिवार की कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता भी सुरजेवाला करेंगे?” उन्होंने दावा किया, ”कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर से पूरी तरह विश्वास खो चुका है और उसने कर्नाटक में ”रणदीप शासन” लागू कर दिया है.” उन्होंने कहा, ”इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर सुरजेवाला, जो केपीसीसी कार्यालय और पांच सितारा होटलों में असंतुष्ट विधायकों की शिकायतें सुन रहे हैं और मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं बृहस्पतिवार को विधान सौध में होने वाली कैबिनेट बैठक में आएं और स्वयं उसकी अध्यक्षता करें.”

अशोक ने कहा, ”मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को विधायकों का समर्थन नहीं है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पास किसी को भी मुख्यमंत्री नियुक्त करने का अधिकार नहीं है.” अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के पास एक भी ऐसा नेता नहीं है जो मुख्यमंत्री पद को प्रभावी ढंग से संभाल सके. इस बीच, जद (एस) के राज्य युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ”कर्नाटक के सुपर मुख्यमंत्री के रूप में सुरजेवाला की पदोन्नति पर उनको बधाई.” उन्होंने कहा, ” ऐसा लगता है कि निर्वाचित मुख्यमंत्री ने सुरजेवाला को सरकार चलाने के लिए जीपीए सौंप दिया है.”

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