तमिलनाडु में धर्मांतरण गतिविधियां ‘चिंताजनक’ हैं, उसे गंभीरता से लिया जाएगा : संघ

आरएसएस ने केंद्र से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश से बात करने का आग्रह किया

पलक्कड़. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक राष्ट्रीय समन्वय सम्मेलन में तमिलनाडु में मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण गतिविधियां चलाने का आरोप लगाया गया है, तथा कहा गया है कि इन्हें गंभीरता से लिया जाएगा. इन गतिविधियों को ‘बहुत चिंताजनक’ करार देते हुए आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सोमवार को समाप्त हुई इस तीन दिवसीय समन्वय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गयी. उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर और जानकारियां जुटायी जायेंगी.

आंबेकर ने कहा, ”तमिलनाडु से कई संगठनों ने अपनी जमीनी रिपोर्ट में बताया कि तमिलनाडु में धर्मांतरण की बहुत सी गतिविधियां चल रही हैं. यह बेहद चिंताजनक है. आने वाले दिनों में इसे गंभीरता से लिया जाएगा और जमीनी स्तर से जानकारी जुटायी जाएगी.”

आरएसएस ने केंद्र से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश से बात करने का आग्रह किया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय समन्वय सम्मेलन ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश सरकार के साथ बातचीत करने का आग्रह किया है. आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सोमवार को यहां संपन्न हुए तीन दिवसीय सम्मेलन ‘समन्वय बैठक’ में बांग्लादेश की स्थिति को ”बहुत संवेदनशील मुद्दा” बताया गया.

उन्होंने कहा कि समन्वय बैठक के दौरान विभिन्न संगठनों ने बांग्लादेश की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की. आंबेकर ने कहा, ”बेशक, यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है. बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को लेकर हर कोई चिंतित है.” उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठनों ने अपने प्रतिनिधियों और बयानों के माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह बांग्लादेश सरकार के साथ मिलकर काम करे, ताकि ”वहां हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.” शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत आने के बाद बांग्लादेश में कई हिंदू मंदिरों, मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया. नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के बाद देश में उथल-पुथल मच गई.

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